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सूरत में 100 झुग्गियां जमींदोज, चीख रहे लोग, किसका आदेश? 'पता ही नहीं'

सूरत के नसीरनगर झुग्गी बस्ती में 100 से ज्यादा झुग्गियां तोड़ी दी गईं हैं। यह कार्रवाई किस प्रशासनिक निकाय ने की है, यह पता ही नहीं है। पढ़ें रिपोर्ट।

Demolition Drive

सूरत में 100 झुग्गियां गिराई गई हैं। Photo Credit; Social Media

गुजरात के सूरत में 100 झुग्गियों को बुलडोजर से गिरा दिया गया लेकिन यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई है, कोई भी एजेंसी इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। यह कार्रवाई पुलिस की मौजूदगी में हुई है लेकिन लोगों को यह खबर नहीं है कि किस आधिकारिक या प्रशासनिक निकाय के आदेश पर उनके घरों को तोड़ा गया है।

सूरत के कटारगाम इलाके में लोग बेहद नाराज हैं। नसीरनगर झुग्गी बस्ती में 28 मई से शुरू हुए एक विवादित अभियान में करीब 100 झुग्गियां तोड़ दी गईं। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस भी मौजूद थी। हालांकि सूरत म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (SMC) ने इनकार किया है कि उसने ये तोड़फोड़ कराई। 

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बुलडोजर ऐक्शन पर क्या कह रहा नगर निगम?

SMC आयुक्त एन नागराजन ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कहा है कि उनके अधिकारी सिर्फ एक प्राइवेट पार्टी द्वारा प्रस्तावित सड़क की लाइन मार्किंग करने गए थे। उन्होंने साफ कहा, 'हमने कोई तोड़फोड़ नहीं की। जमीन प्राइवेट है और टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत सड़क बनाने के लिए मार्किंग की गई थी।'

पुलिस क्या कह रही है?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि SMC ने ही उन्हें लिखित आवेदन दिया था, इसलिए उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा मुहैया कराई। स्थानीय बीजेपी विधायक विनु मोरादिया ने इसे 'कुछ गड़बड़' बताया है। उनका कहना है कि यह मामला संदिग्ध है।

विधायक ने क्या कहा है?

विनु मोरादिया ने संदेह जताया कि आसपास एक बिल्डर का प्रोजेक्ट है और उसी के लिए झुग्गियां हटाई गईं। उन्होंने दावा किया कि यह SMC और पुलिस दोनों ही स्थानीय लोगों के सवालों का सही जवाब नहीं दे पाए।

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35 साल से रह रहे थे लोग, अब बेघर 

नसीरनगर के रहने वाले हुसैन अजीज शेख ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि 35 साल से लोग यहां रह रहे हैं, प्रॉपर्टी टैक्स भरते हैं, बिजली- पानी के कनेक्शन हैं, फिर भी बिना उचित प्रक्रिया के घर तोड़े गए। 

अब आगे क्या?

कांग्रेस नेताओं ने भी इस मामले में SMC, पुलिस और अन्य अधिकारियों से शिकायत की थी, जिसके बाद अगले दिन तोड़फोड़ रुक गई। अभी हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई होनी है। उससे पहले जिन लोगों ने घर तोड़े गए हैं, वे इस कार्रवाई से बेहद नाराज हैं। 

 

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