मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां बैंगन का भरता खाने के बाद तीन लड़कियों की मौत खबर से हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। तीनों बच्चियों को दफना दिया गया था। पुलिस ने तीनों के शवों को बाहर निकलवा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मामला जिले के ईसानगर थाना क्षेत्र के पिपोरा खुर्द गांव की है। तीनों मृतक बच्चियों की पहचान बालमुकुंद कुशवाहा की बेटियों के तौर पर हुई है। सबसे बड़ी बेटी पूनम सात साल की थी। वहीं दूसरी बेटी मनीषा की उम्र चार वर्ष और सबसे छोटी बेटी चाहत महज नौ महीने की थी। मौत के बाद परिवार ने तीनों बेटियों के शवों को दफना दिया था और घटना की जानकारी पुलिस को नहीं दी।
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घटना की जानकारी मिलने पर ईसानगर की पुलिस डॉक्टरों की टीम के साथ पिपोरा खुर्द गांव पहुंची। तीनों शवों को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। अभी तक की जानकारी में सामने आया है कि बच्चियों ने पिछली रात को बैंगन के भरते के साथ रोटी खाई थी। लेकिन अभी तक मौत की वजह का पता नहीं चला है। यह भी साफ नहीं हो पाया है कि जान बैंगन के भरते की वजह से गई या नहीं।
खाना खाने के बाद बिगड़ी तबीयत: पुलिस
एसपी (सिटी) अरुण सोनी ने बताया कि पिपोरा खुर्द गांव में मुकुंद कुशवाहा की तीन बेटियां रात का खाना खाने के बाद बीमार पड़ गईं। तड़के करीब 3 बजे पूनम (7), मनीषा (4) और एक अन्य बच्ची को उल्टी आने लगी। उन्हें सुबह अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन दो की रास्ते में ही मौत हो गई और सात साल की बच्ची ने अस्पताल में दम तोड़ा। मौत की असल वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगी।
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खाद्य विभाग ने खाने के लिए सैंपल
छतरपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. आरपी गुप्ता ने कहा, 'मुझे तीन बच्चियों की मौत की सूचना मिली, जिसकी वजह संदिग्ध फूड पॉइजनिंग बताई जा रही है। इसके बाद मैं तुरंत पिपोरा खुर्द गांव पहुँचा। हालांकि नौ महीने की बच्ची सिर्फ मां का दूध पीती थी और उसने परिवार के साथ खाना नहीं खाया था। एफएसएल टीम और फूड इंस्पेक्टर ने जांच के लिए खाने के सैंपल लिए हैं।' उधर, अधिकारी परिवार से भी घटना के बारे में पूछताछ करने में जुटे हैं।