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सबसे साफ शहर इंदौर की स्वच्छता रैंकिंग पर सवाल क्यों?

इंदौर की गिनती 8 बार से देश के सबसे साफ शहरों में हो रही है लेकिन यहां गंदा पानी पीने से कई मौतें हो चुकी हैं। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार से सवाल पूछ रहा है। पढ़िए रिपोर्ट।

Umang Singhar

कांग्रेस नेता उमंग सिंघार। Photo Credit: Congress/X

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मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर में दूषित पेयजल से लोगों की मौत के मामले को लेकर शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर को लगातार आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया, पर जमीनी हकीकत इसके उलट है। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को जहां एक तरफ फिर से देश के सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला, दूसरी तरफ खराब पानी पीने से कई लोगों की मौतें हो गईं। उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से हुई लोगों की मौत को लेकर सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। 

विधानसभा में उपनेता उमंग सिंघार ने इंदौर के उन प्रभावित इलाकों का दौरा किया और पानी की गुणवत्ता की जांच की। इसके बाद उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला। उमंग सिंघार ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के स्वच्छता और विकास के दावे पूरी तरह असफल साबित हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इंदौर नगर निगम का बजट 8000 करोड़ रुपये से अधिक है, फिर भी लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल पा रहा। इंदौर का बजट, अन्य शहरों की तुलना में ज्यादा है। 

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उमंग सिंघार, कांग्रेस नेता, मध्य प्रदेश:-
स्वच्छता के पुरस्कार लोगों को जिंदा नहीं रखते, जिंदा रहने के लिए साफ पानी चाहिए।

सफाई में नंबर 1 इंदौर, रैंकिंग पर सवाल क्यों उठे?

कुछ दिन पहले इंदौर के भागीरथपुरा में कुछ लोग गंदा पानी पीने की वजह से अपनी जान गंवा बैठे। जिसके बावजूद इंदौर को सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला। इसी विरोधाभास पर उमंग सिंघार ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर लोग सीवेज मिला पानी पीने को मजबूर हैं तो स्वच्छता रैंकिंग का क्या मतलब? इंदौर को आठ बार पुरस्कार कैसे मिला, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। इसमें कहीं न कहीं कागजों का हेरफेर हुआ है।

मौतों के आंकड़ों पर विरोधाभास

इंदौर प्रशासन ने गंदा पानी पीने की वजह से अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि छह महीने के बच्चे समेत 17 लोगों की जान गई है। वहीं, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पहले 10 मौतों की बात कही थी। जिस पर उमंग सिंघार ने यह दावा किया है कि सरकार हकीकत को छुपाने में लगी है, क्योंकि मौतों के आंकड़े 20 हैं। बहरहाल सरकार 18 पीड़ित परिवारों को मुआवजा दे रही है। तो इससे यह साफ झलकता है कि मौतों के आंकड़े अभी अस्पष्ट हैं।

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उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के सीएम से क्या कहा?

उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव से कहा कि स्वच्छता के पुरस्कार लोगों को ज़िंदा नहीं रखते, जिंदा रहने के लिए साफ पानी चाहिए, जिसमें सरकार पूरी तरह विफल रही है। साथ ही यह सुझाव दिया कि पूरे प्रदेश में जल की गुणवत्ता की जांच की जाए और कार्रवाई की जाए। जो दोषी पाए जाएं, उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। 

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