उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनाने वाली निजी एजेंसियों के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रदेशभर में स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस की प्रिंटिंग और डिलीवरी का काम कर रहीं एजेंसियों को हर महीने करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। बताया जा रहा है कि इस घाटे की भरपाई कर्मचारियों से नियुक्ति के नाम पर लाखों रुपये वसूलकर, एडवांस वेतन लेने और आवेदकों से वसूली का दबाव बनाकर की जा रही है। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है, जिसके बाद जांच भी शुरू हो गई है।
प्रदेश में सिल्वर टच, रोजमार्टा और फोकाम लिमिटेड को ड्राइविंग लाइसेंस की प्रिंटिंग और घर-घर डिलीवरी की जिम्मेदारी दी गई है। एजेंसियों को प्रति स्मार्ट डीएल 45 रुपये का भुगतान मिलता है, जबकि प्रिंटिंग, पैकिंग और डिलीवरी समेत कुल खर्च करीब 60 रुपये प्रति कार्ड बताया जा रहा है। प्रदेश में हर महीने करीब दो लाख स्मार्ट डीएल जारी होते हैं, जिससे एजेंसियों को लगभग 30 लाख रुपये का मासिक घाटा उठाना पड़ रहा है।
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सात महीने में 2.10 करोड़ के नुकसान का दावा
सूत्रों के अनुसार पिछले सात महीनों में एजेंसियों को करीब 2.10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके बावजूद एजेंसियां काम जारी रखे हुए हैं, जिससे उनके संचालन के तरीके और वित्तीय मॉडल पर सवाल उठ रहे हैं। नुकसान की भरपाई के लिए एजेंसियां नए कर्मचारियों की भर्ती के समय तीन से चार लाख रुपये तक वसूल रही हैं। कई कर्मचारियों से वेतन भी एडवांस में लिया जा रहा है। इतना ही नहीं, कंप्यूटर और अन्य उपकरण भी कर्मचारियों से ही उपलब्ध कराने के आरोप हैं। आवेदकों से अतिरिक्त वसूली करने का दबाव बनाने की भी शिकायतें सामने आई हैं।
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सीएम कार्यालय तक पहुंची शिकायत, जांच शुरू
पीड़ित कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में वसूली, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई है। सूत्रों के अनुसार मामले की प्रारंभिक जांच शुरू हो चुकी है। यदि आरोप सही पाए गए तो डीएल एजेंसियों के कामकाज और भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। इससे पहले प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम स्मार्ट चिप कंपनी के पास था। कंपनी के प्रतिनिधियों के अनुसार उस समय भी प्रति कार्ड मिलने वाली राशि वास्तविक खर्च से कम थी और इस संबंध में परिवहन मंत्री तथा विभागीय अधिकारियों के समक्ष कई बार आपत्ति दर्ज कराई गई थी।