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प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर हाई कोर्ट की रोक, अब SC जाएगी योगी सरकार?

यूपी में पंचायत चुनाव को लेकर हाई कोर्ट ने 13 जुलाई तक चुनाव की रूपरेखा पेश करने के आदेश दिए थे, सरकार अब आदेश के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रही है।

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योगी आदित्यनाथ, File Photo Credit: Social Media

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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी और कानूनी लड़ाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकारी आदेश पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार अब हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ डबल बेंच (या आवश्यकता पड़ने पर फुल बेंच) में अपील दायर करेगी। इसके साथ ही समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को मामले में पक्षकार बनाए जाने के आदेश को भी चुनौती देने की तैयारी है।

 

योगी सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-ए) अभी भी कानून का हिस्सा है और इसी के आधार पर विशेष परिस्थितियों में पंचायतों के प्रशासन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, यही सरकार की अपील का प्रमुख आधार होगा।

हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की सिंगल बेंच ने 25 जून को सुनवाई के दौरान कहा था कि पहले से असंवैधानिक घोषित प्रावधानों के आधार पर ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए नहीं रखा जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243(ई) और 243(के) के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता। साथ ही, राज्य सरकार को 13 जुलाई तक पंचायत चुनाव की स्पष्ट समय-सीमा और रूपरेखा पेश करने का निर्देश दिया है।

 

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आयोग को पक्षकार बनाने पर भी आपत्ति

राज्य सरकार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को मामले में पक्षकार बनाए जाने के आदेश को भी चुनौती देगी। आयोग के अध्यक्ष एवं इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस राम औतार सिंह का कहना है कि कमीशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट की धारा-9 के तहत किसी जांच आयोग को मुकदमे में पक्षकार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने सरकार द्वारा अपील दायर किए जाने की पुष्टि भी की है।

 

शासन का पक्ष है कि वर्ष 1994 में जोड़ी गई धारा 12(3-ए) अभी भी प्रभावी है। इस प्रावधान के तहत यदि अपरिहार्य परिस्थितियों या लोकहित में समय पर चुनाव कराना संभव न हो तो राज्य सरकार वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था लागू कर सकती है। सरकार इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

 

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नवंबर तक आएगी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए राज्य सरकार ने 18 मई को उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था। आयोग अब तक मेरठ, हापुड़ और बागपत सहित कई जिलों का दौरा कर चुका है तथा सभी 75 जिलों से आंकड़े जुटाने और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। आयोग के अनुसार अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में लगभग छह महीने का समय लगेगा और रिपोर्ट नवंबर तक सरकार को सौंप दी जाएगी।

 

सरकार की प्रस्तावित अपील और 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई के बाद ही पंचायत चुनाव की दिशा और समय-सीमा को लेकर तस्वीर साफ होगी। ऐसे में प्रदेश की सियासत और पंचायत चुनाव दोनों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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