बिहार में भ्रष्ट अफसरों पर निगरानी का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पर्यटन विभाग के अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार सिन्हा के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की है। पटना स्थित उनके आवास, कार्यालय और एक अन्य जगह पर एक साथ छापेमारी की गई।
जांच में पता चला कि इनके पास आय से करीब 75 फीसदी अधिक संपत्ति है। कुल मिलाकर 1 करोड़ 41 लाख 90 हजार रुपये की अतिरिक्त संपत्ति का खुलासा हुआ है। विशेष निगरानी न्यायालय से मिले सर्च वारंट के बाद यह रेड की गई। देर रात तक चली तलाशी में टीम को जमीन, फ्लैट, बैंक खातों, जेवरात और निवेश से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं।
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करोड़ों की जमीन और मकान के कागजात मिले
निगरानी टीम को तलाशी के दौरान सबसे पहले फ्रेंड्स कॉलोनी, आशियाना नगर स्थित करीब 2 कट्ठा 4 धूर जमीन के कागजात मिले। इस जमीन की खरीद 75 लाख 63 हजार रुपये में की गई थी। इसी जमीन पर एक मकान भी बन रहा है।
मकान बनाने के लिए सिविल कॉन्ट्रैक्टर के साथ हुए एमओयू में 20 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं। बाकी 97 लाख रुपये आठ किस्तों में देने की बात लिखी है। इसके अलावा टीम को करीब 75 लाख 62 हजार रुपये मूल्य के एक और भूमि समझौते के कागजात भी मिले हैं। यानी सिर्फ जमीन और मकान को लेकर ही करोड़ों का लेनदेन सामने आया है।
लॉकर में मिले जेवर और नकदी
छापेमारी के दौरान अवधेश कुमार सिन्हा के घर से एक केनरा बैंक का लॉकर भी मिला। लॉकर को नियमानुसार खोलकर उसकी जांच अलग से की जाएगी। घर से 61 हजार रुपये नकद भी बरामद हुए हैं। इसके साथ ही करीब 5 लाख 5 हजार रुपये मूल्य के सोने के आभूषण, 3 लाख 7 हजार रुपये के हीरा जड़ित गहने और 1 लाख 52 हजार रुपये के चांदी के जेवर भी मिले हैं। निगरानी अधिकारियों का कहना है कि इन सभी की खरीद से जुड़े बिल और स्रोत की भी जांच की जाएगी।
19 बैंक खाते और तीन फ्लैट के दस्तावेज
रेड में टीम को 12 संपत्ति डीड, 19 बैंक खातों के कागजात, विभिन्न बीमा योजनाओं में निवेश के दस्तावेज और तीन फ्लैटों से जुड़े पेपर भी मिले हैं। इसके अलावा एक हुंडई कार के कागजात भी बरामद हुए हैं।
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निगरानी ब्यूरो का कहना है कि इतने सारे बैंक खाते और निवेश के कागजात यह दिखाते हैं कि संपत्ति को अलग-अलग जगहों पर छिपाने की कोशिश की गई है। अब सभी खातों की लेनदेन की डिटेल निकाली जा रही है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस
अवधेश सिन्हा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से 1 करोड़ 41 लाख 90 हजार रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की है। यह उनकी कुल आय का लगभग 75 प्रतिशत ज्यादा है। इसी आधार पर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की संशोधित धाराओं के तहत निगरानी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। संपत्ति के पूरे नेटवर्क को खंगाला जाएगा कि यह पैसा कहां-कहां लगाया गया है। साथ ही यह भी पता किया जाएगा कि इसमें और कौन-कौन शामिल हैं।