छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गांव के लोगों ने मिलकर 50 जानवरों को कलेक्टर ऑफिस तक ले गए और वहीं छोड़ आए। ये लोग गांव में आवारा जानवरों से बेहद परेशान थे। लोगों के मुताबिक, कभी गाय लोगों के खेतों में घुस जाती थीं तो कभी एक साथ सड़क के बीचों-बीच कई जानवर बैठ जाते थे, जिससे लोग परेशान हो गए थे। इसी वजह से लोगों ने अधिकारियों से कई बार शिकायत की थी लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया था। इसी वजह से लोगों ने अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए जानवरों को कलेक्टर ऑफिस के गेट पर छोड़ दिया।
यह मामला भकुरा गांव का है, जहां कई आवारा पशु लोगों के खेतों में घुसकर फसलें खा जाती थीं। इसी वजह से गांव के लोग गुरुवार को पशुओं को कलेक्टर ऑफिस के बाहर छोड़ आए। जानकारी के मुताबिक, गांव के लोग लगभग 13 किलोमीटर दूर अंबिकापुर कलेक्टर ऑफिस तक आए थे। गांव के लोगों ने साफ तौर पर अधिकारियों को बता दिया कि अगर प्रशासन पशुओं को सड़कों और खेतों में घुसने से रोक नहीं सकता है तो वे जानवरों को रखने की व्यवस्था करें।
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लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन
गांव के लोगों ने कलेक्ट्रेट ऑफिस जाकर अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। गांव के लोगों का आरोप है कि आवारा मवेशी उनके खेतों की फसलों को चौपट कर देते हैं लेकिन प्रशासन ने कोई एक्शन नहीं लिया। इसी वजह से लोगों ने कलेक्टर ऑफिस के बाहर बड़ी संख्या में मवेशियों को ले गए, जिसे देखकर कलेक्टर ऑफिस के अधिकारी हैरान रह गए।
इस मामले को लेकर गांव के पूर्व सरपंच मनोज कुमार सिंह ने कहा था कि ये आवारा पशु लगातार लोगों की फसलों को नष्ट करते थे, जिसकी वजह से गांव के किसानों को 24 घंटे खेत की निगरानी करनी पड़ती थी। इसी सिलसिले में गांव के एक व्यक्ति ने कहा, 'हम इन जानवरों को कलेक्टर साहब के दरवाजे पर ले आए हैं। अब प्रशासन तय करेगा कि इन जानवरों को कहां रखना चाहिए।'
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लोगों का आरोप?
इसके अलावा लोगों ने आरोप लगाया कि कई पशुपालक अपने पशुओं को जानबूझकर छोड़ देते हैं, जिसकी वजह से कई मवेशी सड़क पर पहुंच जाते हैं। इससे सड़क पर दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।