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देखेंगे चाल-ढाल और नापेंगे कदम, क्या है Gait जिससे सॉल्व होगा मर्डर केस?

एक मर्डर केस की जांच में दिल्ली पुलिस ने Gait विश्लेषण का इस्तेमाल किया है। इसके जरिए कई बारीक चीजों की जांच की जाती है।

delhi police gait analysis

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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अपराध के मामलों की जांच के लिए पुलिस तमाम तरीकों और टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करती है। समय के साथ टेक्नॉलजी अपग्रेड होती है जिससे पुलिस को भी मदद मिलती है। ऐसी ही एक टेक्नॉलजी का इस्तेमाल दिल्ली पुलिस ने पहली बार किया है जिसमें आरोपी की चाल-ढाल और उसके कदमों का मिलान किया गया। मामला 32 साल के UPSC अभ्यर्थी की हत्या है जिसमें उसकी पार्टनर पर हत्या का आरोप लगा था। अब इस मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने Gait अनैलसिस किया है ताकि मामले की सच्चाई पता लगाई जा सके और यह खुलासा हो सके कि आरोपियों ने ही इस घटना को अंजाम दिया या नहीं।

 

इस केस में आरोप है कि हत्यारोपियों ने पीड़ित को मार डाला और घर में आग लगाकर इसे हादसे का रूप देने की कोशिश की। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मृतक के शरीर पर जलने के निशाने पाए गए जो यह दिखाते हैं कि जब उसे आग लगाई गई तब वह जिंदा था।

Gait क्या है और इससे क्या पता चलेगा?

 

यह एक तरह का वैज्ञानिक विश्लेषण है। इसमें लोगों के चलने के तरीके, उनके पैर रखने, उठाने और आगे-पीछे करने के तरीके, उनकी चाल-ढाल का अध्यययन किया जाता है। यहां तक कि इसमें इंसानों के पोस्चर का भी मिलान किया जाता है। अक्सर इसके लिए घटनास्थल के आसपास के CCTV या अन्य वीडियो फुटेज के जरिए छानबीन की जाती है।

 

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इस केस में दिल्ली पुलिस ने जो सीसीटीवी फुटेज जुटाए हैं उनमें आरोपियों को देखा जा सकता है। पुलिस ने एक वीडियो रीक्रिएट भी किया है। अब एक खास सॉफ्टवेयर की मदद से इन वीडियो का मिलान किया गया। इसके लिए गुजरात से एक्सपर्ट बुलाए गए और पांच अलग-अलग जगहों के ऐसे CCTV फुटेज का अध्ययन किया गया जिनमें आरोपी दिखाई दिए। इस Gait विश्लेषण के जरिए पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि सभी फुटेज में दिखने वाले आरोपी एक ही हैं या नहीं।

 

इसमें लोगों के चलने की रफ्तार, कदमों की लंबाई, दो पैरों के बीच की दूरी, हाथ और पैर के जोड़ों के बीच बनने वाले कोण आदि का मिलान भी कैमरे और सेंसर के जरिए किया जाता है।


क्या है पूरा मामला?

 

अक्तूबर 2025 में 32 साल के राम केश मीणा की लाश उत्तरी दिल्ली के तिमारपुर में स्थित एक कमरे में मिली थी। आरोप लगे कि राम केश की लिव-इन पार्टनगर अमृता चौहान और अमृता के पूर्व बॉयफ्रेंड सुमित कश्यप और एक अन्य शख्स संदीप कुमार ने मिलकर रामकेश को मार डाला। पुलिस के मुताबिक, अमृता रामकेश से परेशान हो चुकी थी क्योंकि वह पुराने अंतरंग वीडियो डिलीट नहीं कर रहा था। इसके बारे में जब सुमित को पता चला तो दोनों ने रामकेश को मारने का प्लान बनाया।

 

जांच के मुताबिक, पहले तो रामकेश को इन लोगों ने मारा-पीटा और फिर फोन के चार्जिंग केबल से गला घोंट दिया। इन लोगों ने इस हत्या को हादसा बताने की कोशिश की और यह बताया कि घर में आग लग गई थी। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह सामने आया कि इन आरोपियों ने पुलिस को भटकाने की कोशिश की और केस को अलग दिशा में ले गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गले पर चोट का निशान मिला जिससे पुलिस ने इस केस की सही दिशा पकड़ी।

 

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पुलिस ने अपनी जांच में बताया है कि अमृता ने इंस्टाग्राम के जरिए सुमित और संदीप को बताया कि रामकेश घर पर है। CCTV फुटेज में देखा गया कि रात के 8:45 बजे दोनों घर में घुसे और 30 मिनट के बाद संदीप घर से चला गया। वहीं, अमृता और सुमित अंदर ही थे। आरोप है कि इन दोनों ने ही रामकेश की लाश पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाई और इसे हादसा दिखाने की कोशिश की। आग लगाने के बाद रात के 2 बजकर 57 मिनट पर दोनों घर से निकले। इस केस में कुल 55 गवाहों से पूछताछ भी की गई है। जांच में पाया गया है कि जिस AC के चलते आग लगने की बात कही गई है उसमें कोई खराबी नहीं थी और न ही कंप्रेसर लीक था। सोमवार को दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी कोर्ट में 813 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है।

और कहां हुआ इस्तेमाल?

 

दिल्ली पुलिस ने भले ही इसका इस्तेमाल पहली बार किया हो। यह टेक्नॉलजी कई मामलों में इस्तेमाल की जा चुकी है। साल 2017 में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या हुई थी, उसमें भी आरोपियों की पहचान के लिए इसका इस्तेमाल हुआ था। इसी तरह 2024 के रामेश्वर कैफे केस और 2021 के साकी-नाका रेप और मर्डर केस में भी इसका इस्तेमाल किया जा चुका है।


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