हिमाचल प्रदेश में वनभूमि पर कथित तौर पर खरपतवार नाशक रसायन ग्लायफोसेट (Glyphosate) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर मटर की खेती किए जाने का मामला सामने आया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इसे गंभीर घटनाक्रम बताते हुए प्रदेश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और ग्लायफोसेट के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है।
हिमालय नीति अभियान के प्रदेश संयोजक गुमान सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस संभावित खतरे से आगाह किया है। वहीं, मंडी जिले के नाचन वन मंडल की थाची वन रेंज में वनभूमि पर कथित अवैध रूप से उगाई गई मटर की फसल के मामले में वन विभाग द्वारा कार्रवाई कर फसल उखाड़े जाने का भी दावा किया गया है।
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शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हो सकता और प्रदेश के अन्य वन क्षेत्रों में भी इस तरह वनभूमि के कथित अतिक्रमण की जांच जरूरी है।
पहले वनस्पति नष्ट, फिर मटर की बिजाई का आरोप
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को भेजे गए पत्र में गुमान सिंह और कुलभूषण उपमन्यु ने आरोप लगाया है कि कुछ क्षेत्रों में पहले ग्लायफोसेट जैसे खरपतवार नाशक का छिड़काव कर वनस्पति को नष्ट किया जाता है और इसके बाद वहां मटर की बिजाई की जाती है। उनका कहना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से इस तरह मटर की खेती किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ क्षेत्रों में वनभूमि पर भांग की खेती के मामले भी सामने आने और विभागीय कार्रवाई का उल्लेख पत्र में किया गया है।
पर्यावरण पर गंभीर असर का दावा
पत्र में ग्लायफोसेट के इस्तेमाल को लेकर मिट्टी, वनस्पति, जल स्रोतों और जैव विविधता पर संभावित प्रतिकूल प्रभावों की चिंता जताई गई है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इसके अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी के सूक्ष्मजीव तंत्र और प्राकृतिक वनस्पति प्रभावित हो सकती है तथा भूमि क्षरण और जल स्रोतों के प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने ग्लायफोसेट के मानव स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई है। हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी दावों की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक एवं नियामक स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अलग से जांच आवश्यक होगी।
Mission-32 के बीच वनभूमि पर खेती ने खड़े किए सवाल
शिकायतकर्ताओं ने सरकार के Mission-32 लक्ष्य का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि जब प्रदेश सरकार वर्ष 2030 तक वन आवरण बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, ऐसे में वनभूमि पर वनस्पति नष्ट कर खेती किए जाने की शिकायतें इस लक्ष्य के लिए गंभीर चुनौती हैं।
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ग्लायफोसेट पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग
पत्र में सरकार से Glyphosate 41% SL और इसके विभिन्न व्यापारिक नामों से बाजार में उपलब्ध उत्पादों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। साथ ही पेड़ों को सुखाने अथवा वनस्पति नष्ट करने के लिए ग्लायफोसेट के कथित प्रचार-प्रसार वाले सोशल मीडिया विज्ञापनों पर भी कार्रवाई की मांग उठाई गई है।इसके अलावा वनभूमि पर इस तरह की गतिविधियों की जांच, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
पूरे प्रदेश में जांच और जनजागरण की मांग
पत्र में पंचायत प्रतिनिधियों, पर्यावरणविदों, बुद्धिजीवियों, प्रबुद्ध नागरिकों तथा सेवानिवृत्त वन एवं कृषि अधिकारियों को शामिल कर स्थानीय स्तर पर जांच एवं जनजागरण समितियां गठित करने का सुझाव दिया गया है। इन समितियों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में वनभूमि पर इस तरह की गतिविधियों की निगरानी और लोगों को जागरूक करने की मांग की गई है। पर्यावरण चिंतक गुमान सिंह और कुलभूषण उपमन्यु ने मुख्यमंत्री से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर वनभूमि पर कथित अवैध खेती और रासायनिक खरपतवारनाशकों के इस्तेमाल की व्यापक जांच कराने की मांग की है।