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मुंबई में रिकॉर्ड बारिश क्यों? बदलते मानसून के पीछे क्या है नया विज्ञान

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में इस साल 27 साल का बारिश का रिकॉर्ड टूट गया। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर इस बार मानसून इतना खतरनाक और रिकॉर्डतोड़ क्यों साबित हो रहा है?

Mumbai monsoon weather

बारिश के बाद मुंबई के इलाकों में पानी भरा, File Photo Credit: ANI

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महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई इस साल ऐसी बारिश का सामना कर रही है, जिसने पिछले 27 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से शहर की रफ्तार थम गई है। सड़कों पर जलभराव, लोकल ट्रेनों और उड़ानों पर असर, पेड़ों का गिरना, भूस्खलन और स्कूल-कॉलेजों की छुट्टियां बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस बार मानसून सामान्य नहीं, बल्कि असाधारण रूप ले चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मुंबई में इस बार इतनी भारी और रिकॉर्ड तोड़ बारिश क्यों हो रही है?

 

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 7 जुलाई के बीच मुंबई में करीब 1,240 मिमी बारिश हुई है। यह पिछले 27 साल में इस अवधि के दौरान हुई सबसे ज्यादा बारिश है। 6 जुलाई तक ही शहर में पूरे मानसून सीजन में होने वाली औसत बारिश का 60 फीसदी से ज्यादा पानी बरस चुका है, जबकि मानसून खत्म होने में अभी करीब तीन महीने बाकी हैं। ऐसे में मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी मुंबई के लिए हालात चुनौतीपूर्ण बने रह सकते हैं।

 

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मुंबई में इतनी ज्यादा बारिश क्यों हो रही है?

इस बार एक साथ कई मौसमी सिस्टम एक्टिव होने की वजह से बारिश ने और ज्यादा रफ्तार पकड़ ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून पहले से ही पूरी तरह सक्रिय था। इसके साथ ही अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र, पश्चिमी तट के पास मौजूद मानसून ट्रफ और समुद्र से लगातार आ रही नमी से भरी हवाओं ने मिलकर मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार मूसलाधार बारिश कराई। सिर्फ 2 से 6 जुलाई के बीच ही मुंबई में 750 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। इस दौरान दो दिन ऐसी बारिश हुई, जिसे मौसम विभाग (IMD) 'अत्यधिक भारी बारिश' की कैटेगरी में रखता है। वहीं, 5 जुलाई को शहर के कुछ इलाकों में 225 मिमी से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई।

 

ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण अब मानसून का स्वरूप बदल चुका है। पहले जहां बारिश कई दिनों तक सामान्य रूप से होती थी, वहीं अब कम समय में बेहद तेज बारिश होने लगी है। वातावरण और समुद्र के लगातार गर्म होने से हवा में नमी बढ़ गई है, जिससे बारिश की तीव्रता भी बढ़ रही है। IMD के पूर्व महानिदेशक डॉ के जे रमेश के मुताबिक, अब अल नीनो जैसे मौसमीय प्रभावों से अलग भी मानसून का स्वभाव बदल गया है और भविष्य में इस तरह की अत्यधिक बारिश की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

 

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इस बार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों तरफ से लगातार नमी मिल रही है। ऊपर से बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र ने भी मानसून को और ताकत दे दी है। पश्चिमी घाट से टकराकर नमी से भरी हवाएं ऊपर उठती हैं, जिसकी वजह से मुंबई में तेज और लगातार बारिश होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आने वाले सालों में मुंबई जैसे बड़े शहरों में कम समय में बहुत ज्यादा बारिश की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। इससे बाढ़, जलभराव और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी पहले के मुकाबले ज्यादा हो सकता है।


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