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ममता बनर्जी ने बंद की ट्राम, विदेशी मदद से फिर क्यों शुरू कर रही है BJP सरकार?

कोलकाता की लाइफलाइन कही जाने वाली ट्राम एक बार फिर सुर्खियों में है। जिस ट्राम को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंद कर दिया था, उसे अब BJP फिर से शुरू करने का प्लान कर रही है।

Kolkata Tram,

कोलकाता ट्राम, Photo Credit- PTI

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कोलकाता की लाइफलाइन कही जाने वाली ट्राम एक बार फिर सुर्खियों में है। दो साल पहले साल 2024 में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के ज्यादातर रूटों पर ट्राम सेवा बंद करने का फैसला किया था। तब इसका भारी विरोध हुआ था। स्थानीय लोगों और संगठनों का कहना था कि ट्राम कोलकाता की ऐतिहासिक विरासत और पहचान है।

 

उस समय विपक्षी दलों ने तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार पर ट्राम डिपो की बेशकीमती जमीन बेचने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था। हालांकि सरकार की दलील थी कि बेहद धीमी गति के कारण मुख्य सड़कों पर ट्रामों की आवाजाही के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या होती है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे फिर से शुरू करने की तैयारी में है।

 

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कब शुरू हुई थी ट्राम सेवा?

पहली बार 24 फरवरी 1873 को कोलकाता में सियालदह स्टेशन से आर्मेनियन स्ट्रीट ट्राम चली थी। बताया जाता है कि उस समय इसे घोड़े खींचते थे। बीच में चार साल बंद रहने के बाद वर्ष 1880 में यह सेवा दोबारा शुरू की गई, जब इंजन से ट्राम चलाने की भी नाकाम कोशिश की गई थी। आखिर में 27 मार्च 1902 को बिजली से ट्राम चलाने में कामयाबी मिली। 1930 के दशक में कोलकाता में तीन सौ से ज्यादा ट्रामें चलती थीं। 

 

इन ट्रामों में में बॉलीवुड और बांग्ला फिल्मोद्योग टालीवुड के अनगिनत फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। बता दें कि यह सेवा ऐतिहासिक हावड़ा ब्रिज को पार कर हुगली के दोनों किनारों को आपस में जोड़ती थी।  

क्यों लिया ममता बनर्जी ने बंद करने का फैसला? 

सितंबर 2024 में ममता बनर्जी ने महानगर के ज्यादातर रूटों पर ट्राम सेवा बंद करने का फैसला किया था। सरकार की दलील थी कि धीमी गति के कारण मुख्य सड़कों पर ट्रामों की आवाजाही से ट्रैफिक जाम की समस्या होती है। सरकार का कहना था कि सबसे कम सड़क क्षेत्र होने के बावजूद व्यस्त समय में ट्रैफिक सुचारू रखना जरूरी था, इसके लिए ट्राम हटाने जैसे कड़े कदम उठाने पड़े।

 

सरकार का कहना था कि धीमी और अनियमित समय-सारिणी के कारण कई यात्रियों ने टैक्सी-बस को तरजीह देना शुरू कर दिया, जिससे सवारियां घटती गईं। ऐसी स्थिति में लागत के मुकाबले मुनाफे पर भी असर पड़ा। ऐसे में सरकार को ट्राम सेवा बंद करने का फैसला लेना पड़ा। 

BJP सरकार का क्या है प्लान? 

पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने हाल ही में कहा है कि सरकार कोलकाता की पुरानी और पर्यावरण के लिए अच्छी ट्राम सेवा को फिर से शुरू करने जा रही है। इसके लिए सरकार ने रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस RITES नाम की एक सरकारी एजेंसी को सर्वे करने की जिम्मेदारी दी है, ताकि पता चल सके कि ट्राम को दोबारा कैसे और कहां चलाया जा सकता है।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में मंत्री अर्जुन सिंह ने बताया कि ट्राम से बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं होता। सरकार चाहती है कि इस सेवा को चलाने में ज्यादा पैसा खर्च न करना पड़े। इसके लिए सरकार निजी कंपनियों की मदद (PPP मॉडल) से ट्राम को फिर से शुरू करने पर विचार कर रही है, और जल्द ही इसके लिए टेंडर निकाला जाएगा। 

 

सरकार का मकसद ट्राम को सिर्फ पर्यटन आकर्षण नहीं, बल्कि रोजमर्रा के आवागमन का हिस्सा भी बनाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पुनरोद्धार योजना के तहत केवल हेरिटेज ट्रिप्स ही नहीं चलाई जाएंगी, बल्कि ट्राम को शहर के डेली कम्यूटर्स के लिए मेट्रो लाइनों के साथ भी सिंक किया जाएगा।

 

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विदेशी कंपनियों की मदद से कोलकाता में फिर दौड़ेगी ट्राम? 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस टेंडर में ऑस्ट्रेलिया और बेलारूस की कुछ कंपनियों ने पहले ही दिलचस्पी दिखाई है। साफ है सरकार विदेशी तकनीक और निवेश के सहारे ट्राम नेटवर्क को नया रूप देना चाहती है। यह भी दावा किया जा रहा है कि आधुनिक डिब्बे ऑस्ट्रेलिया से मंगवाए जाने की योजना है, और सरकार यह भी देखना चाहती है कि मौजूदा दो रूटों के अलावा और किन मार्गों पर ट्राम फिर से चलाई जा सकती है। 


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