गोवा में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक नई राजनीतिक पार्टी की एंट्री ने सियासी माहौल गर्मा दिया है। गोवा कांग्रेस पार्टी (GCP) नाम से बने नए दल ने चुनाव आयोग में पंजीकरण के लिए आवेदन किया है। हालांकि पार्टी के गठन से पहले ही उसके नाम को लेकर विवाद शुरू हो गया है। मुख्य विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि यह पार्टी जानबूझकर उसके जैसा नाम रखकर बनाई गई है ताकि चुनाव में उसके वोटों का बंटवारा किया जा सके। दूसरी ओर, नई पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए खुद को गोवा के हितों की लड़ाई लड़ने वाला क्षेत्रीय संगठन बताया है।
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब गोवा कांग्रेस पहले से ही अंदरूनी कलह का सामना कर रही है। हाल ही में गिरीश चोडंकर को दोबारा गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (GPCC) का अध्यक्ष बनाया गया, जिसके बाद कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई। कुछ नेताओं ने पार्टी के पदों से इस्तीफा भी दे दिया। ऐसे माहौल में नई पार्टी की घोषणा ने कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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कौन चला रहा है नई गोवा कांग्रेस पार्टी?
चुनाव आयोग को दिए गए आवेदन के मुताबिक, नई पार्टी के अध्यक्ष फ्रांसिस्को एंटोनियो जैसिंटो गोविया हैं। गोविया पहले मर्चेंट नेवी में मास्टर मेरिनर रह चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के नेताओं का कहना है कि इस नई पार्टी को कांग्रेस से नाराज नेताओं और समाजसेवियों ने मिलकर बनाया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस में कई सालों से मेहनत करने वाले और पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था।
नई पार्टी में सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी (AAP), ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) और रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (RGP) के कुछ पूर्व नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए हैं। पार्टी का कहना है कि वह दिल्ली में बैठे हाईकमान के इशारों पर नहीं चलेगी, बल्कि गोवा के लोगों की जरूरतों, उनकी राय और राज्य के हितों को सबसे ऊपर रखकर काम करेगी।
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कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
गोवा कांग्रेस का कहना है कि नई पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'डिवाइड एंड रूल' रणनीति का हिस्सा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरिश चोडणकर ने आरोप लगाया कि BJP ने विपक्षी वोटों को बांटने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर यह पार्टी खड़ी की है। उनका कहना है कि जब भी BJP को सत्ता विरोधी लहर का एहसास होता है, तब वह इस तरह के नए राजनीतिक प्रयोग करती है ताकि विपक्ष कमजोर हो जाए। हालांकि BJP ने इन आरोपों को निराधार बताया है। BJP नेताओं का कहना है कि कांग्रेस अपनी अंदरूनी कमजोरियों को छिपाने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है।
2027 चुनाव में किसे होगा फायदा और किसे नुकसान?
अगर चुनाव आयोग गोवा कांग्रेस पार्टी को मान्यता दे देता है और उसे चुनाव चिन्ह मिल जाता है, तो इसका सीधा असर कांग्रेस के वोट बैंक पर पड़ सकता है। 'कांग्रेस' नाम होने के कारण कुछ मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बन सकती है, जिससे विपक्षी वोटों का बंटवारा होने की आशंका है।
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हालांकि कांग्रेस का दावा है कि गोवा के मतदाता राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और वे किसी भ्रम में नहीं आएंगे। वहीं नई पार्टी का कहना है कि उसका मकसद केवल गोवा से जुड़े मुद्दों जमीन संरक्षण, भ्रष्टाचार, पर्यावरण, रेलवे परियोजनाओं और म्हादई जल विवाद को मजबूती से उठाना है। ऐसे में अब सबकी नजर चुनाव आयोग के फैसले और 2027 के विधानसभा चुनाव पर है, जहां साफ होगा कि यह नई पार्टी राज्य की राजनीति में नया विकल्प बनेगी या केवल चुनावी समीकरण बदलने का कारण।