दुनिया का सात अजूबों में से एक भारत के आगरा में मौजूद ताजमहल के बारे में अक्सर चर्चा होती है कि इसके नीचे मंदिर दबा हुआ है। इन चर्चाओं के बीच पहली बार इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ताजमहल से जुड़े विवाद में दखल दिया है।
हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें दावा किया गया है कि दुनिया भर में मशहूर इस ताजमहल के अंदर 'तेजो महालय' मंदिर है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दूसरे उत्तरदाताओं को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने न्यायिक जांच के लायक माना
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने इसे न्यायिक जांच के लायक माना और औपचारिक रूप से कहा कि इस मामले पर संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत विचार करने की जरूरत है। इससे पहले निचली अदालतों ने पहले ताजमहल के परिसर के वैज्ञानिक मूल्यांकन और फिजिकल सर्वे की मांग को खारिज कर दिया था।
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सर्वे बिना सटीक ऐतिहासिक मूल्यांकन नामुमकिन
सोमवार को सुनवाई के दौरान, सीनियर वकील हरि शंकर जैन की तरफ से पेश याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि धार्मिक निशानों और आर्किटेक्चरल अवशेषों के मकसद से एक विस्तृत, वैज्ञानिक और फिजिकल सर्वे के बिना साइट का सटीक ऐतिहासिक मूल्यांकन नामुमकिन है।
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10 दिनों के अंदर जरूरी कदम उठाएं
हाई कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि नोटिस जारी होने के बाद 10 दिनों के अंदर सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने सरकार और ASI को अगली सुनवाई से पहले अपना काउंटर-एफिडेविट फाइल करने की अंतरिम इजाजत और साफ निर्देश भी दिए हैं।
दूसरी तरफ सरकार और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) हैं, जिनका प्रतिनिधित्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और एडवोकेट मनोज कुमार सिंह कर रहे हैं। यह रिट पिटीशन 2015 में आगरा की स्थानीय कोर्ट में शुरू हुई एक लंबी कानूनी लड़ाई से निकली है। 11 साल पहले याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में एक आवेदन करके ताजमहल परिसर का निरीक्षण करवाने की मांग की थी, ताकि संभावित हिंदू मंदिर को लेकर सबूत जुटाए जा सके।