कर्नाटक में मंत्रिमंडल का विस्तार होते ही कांग्रेस विधायकों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। दो विधायकों के इस्तीफे पर अब मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने कहा है कि इस्तीफा देने वालों को कोई रोक नहीं सकता है। उन्होंने कहा है कि पार्टी है तभी सब कुछ है। डीके शिवकुमार ने नाराजगी जाहिर करने वाले विधायकों के लिए दोटूक कह दिया है कि जो भी इस्तीफा देगा, उसे वह तुरंत स्वीकार कर लेंगे। सीएम डीके शिवकुमार ने कहा है कि इस तरह तो वह भी इस्तीफा दे सकते थे क्योंकि कई मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में उन्हें भी मंत्री नहीं बनाया गया था। उन्होंने इन नेताओं का नाम लिए बिना ही सब्र रखने की सलाह भी दे डाली है।
डीके शिवकुमार ने नाराज विधायकों से धैर्य रखने और अवसर का इंतजार करने की अपील करते हुए कहा कि सरकारी बोर्ड और निगमों में जल्द ही पद भरे जाएंगे। इससे पहले सोमवार को कर्नाटक में मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। मंत्री ना बनाए जाने से नाराज वाई वी पाटिल और बी गोपालकृष्ण ने इस्तीफे की पेशकश कर दी। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश गुंडू राव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर एक पोस्ट लिखकर नाराजगी जाहिर की है।
कांग्रेस पर भारी पड़ती जा रही नाराजगी
सोमवार को जब कर्नाटक में 19 नए मंत्री शपथ ले रहे थे, उससे पहले ही वाई वी पाटिल ने कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर रुद्रपा लमानी से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने आरोप लगाए कि उनके साथ भेदभाव हुआ है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सुबह तक उनका नाम लिस्ट में था, उन्हें बुलाया भी गया था लेकिन फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं था।
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पिछली बार मंत्रियों के बीच पोर्टफोलियों का बंटवारा होने के बाद मंत्री रामालिंगा रेड्डी नाराज हो गए थे। उन्होंने तुरंत मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, बाद में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उनसे बात करके उन्हें मना लिया और उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था।
क्या बोले डीके शिवकुमार?
विधायकों की नाराजगी के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में डीके ने कहा, 'मुझे जो कहना था, मैंने कह दिया है... राजनीति में इस्तीफे होते रहते हैं। इस्तीफा देने वालों को कोई रोक नहीं सकता। अगर वे पार्टी और अपने भविष्य को चाहते हैं, तो पार्टी जरूरी है। अगर पार्टी है, तो बाकी सब कुछ है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं भी इस्तीफ़ा दे सकता था क्योंकि धर्म सिंह और सिद्धरमैया के मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे मंत्री नहीं बनाया गया था। क्या परमेश्वर (उप-मुख्यमंत्री) और मैंने सब्र नहीं रखा? जब वीरेंद्र पाटिल मुख्यमंत्री थे, तब बंगारप्पा, खरगे (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे)और धर्म सिंह को मंत्री नहीं बनाया गया था। क्या बाद में बंगारप्पा और सिंह मुख्यमंत्री नहीं बने? इंसान को सब्र रखना चाहिए।’ डीके शिवकुमार ने व्यक्ति से ज्यादा पार्टी को अहम बताते हुए कहा, 'अगर कोई इस्तीफा देता है, तो मैं कुछ ही मिनटों में उसे स्वीकार कर लूंगा।’
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एक विधायक ने मारी पलटी
कल तक नाराजगी जाहिर करने वाले विधायक बेलुर गोपालकृष्ण ने अब कहा है, 'कल मैं नाराज था इसलिए मैंने इस्तीफा देने का मन बना लिया था क्योंकि मंत्री पद का वादा किया गया था। मुख्यमंत्री ने ने रात में मुझे फोन किया और मिलने को कहा इसलिए मैं मिलने आया। अब उनसे बात करने के बाद मैंने फैसला लिया है कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगा। मैं उनके साथ रहूंगा और पार्टी को आगे बढ़ाने में मदद करूंगा।'
बता दें कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदले जाने के बाद से ही उथल-पुथल मची हुई है। अब पूर्व सीएम
सिद्धारमैया
ने राजनीति से संन्यास का एलान भी कर दिया है और उनके समर्थकों में खलबली मची हुई है।