AI समिट 2026: USA के दबदबे में चुपके से सेंधमारी कैसे कर रहा चीन?
AI सेक्टर में अमेरिका ग्लोबल लीडर है। माइक्रोसॉफ्ट हो, ग्रोक हो, OpenAI हो, मेटा या गूगल हो, अमेरिकी कंपनियों का दुनिया में बोलबाला है। चीन, इस दबदबे में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा है।

AI Summit 2026। AI इमेज। Photo Credit: Sora
अर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में 3 देशों का दबदबा है। अमेरिका, चीन और भारत। भारत, AI सेक्टर को नई दिशा देने के लिए एक तरफ, जहां 'AI इम्पैक्ट समिट' आयोजित कर रहा है, चीन और अमेरिका के बीच अमेरिका और चीन, दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच अर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में आगे जाने की होड़ मची है। अमेरिका, AI में स्थापित हो चुका है, चीन नंबर वन की रेस में सबसे आगे है। चीन, AI तकनीक में भारत से कहीं ज्यादा आगे है।
अमेरिका AI का जन्मदाता है। साल 1940 के दशक में जब दुनिया बुनियादी समस्याओं से जूझ रही थी, विश्व युद्ध की आशंकाएं बन रहीं थी, तब अमेरिका में प्रोग्रामेबल डिजिटल कंप्यूटर की खोज पूरी हो गई थी। साल 1956 तक, यह देश, AI की बुनियाद तैयार करने में लग गया था।
AI रिसर्च सेंटर की नींव, अमेरिका के डार्टमाउथ कॉलेज कैंपस में रख दी गई थी। लैब में काम कर रहे कुछ वैज्ञानिकों ने तब ही भविष्यवाणी कर दी थी कि एक पीढ़ी के भीतर मनुष्यों जितनी बुद्धिमान मशीनें अस्तित्व में आ जाएंगी। अमेरिकी सरकार ने इस सेक्टर पर पानी की तरह पैसे बहाए। आज बात क्लाउड सिस्टम की हो, कंप्युटिंग की हो, चिप की हो या इनके मिश्रण AI की हो, अमेरिकी तकनीक पर दुनिया रेंग रही है।
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अमेरिका और चीन की AI रेस क्या है?
AI का जन्म अमेरिका के MIT, स्टैनफोर्ड में हुा है। सिलिकॉन वैली और वहां के इनोवेशन कल्चर ने इसे दशकों तक दुनिया में सबसे आगे रखा। चीन की शुरुआत धीमी हुई। साल 2017 में कम्युनिस्ट सरकार ने तय किया कि साल 2030 तक, अमेरिका को चीन पीछे छोड़ेगा। अब चीन AI में निवेश कर रहा है, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में कोर्सेज चला रहा है, दुनियाभर के वैश्विक AI लीडर्स को अपने पाने में लाने की कोशिश कर रहा है।
AI में किसके पास क्या है?
- अमेरिका: अमेरिका में AI की कई दिग्गज कंपनियां हैं, जो सबसे आगे हैं। Google, OpenAI, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, X जैसी कंपनियां, दुनिया के ज्यादातर देशों में छा गईं हैं। अमेरिका के पास अपना मॉडल है, जिसे दुनिया कॉपी करती है। GPT-2, Gemini, LLaMA, Grok जैसी तकनीक से अमेरिका का दबदबा बना है। दुनिया के सबसे एडवांस 40 से ज्यादा मॉडल अमेरिका के हैं। अमेरिका हर साल AI सेक्टर में 159 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश कर रहा है।
- चीन: कम्युनिस्ट देश, अपने AI मॉडल पर जोर दे रहा है। चीन के पास डीपसीक, Baidu, अलीबाबा, हुवेई जैसी दिग्गज टेक कंपियां हैं। चीन के मॉडल, अभी शुरुआती स्टेज में हैं। डीपसीक R1, Enine Bot, Baidu जैसे बेसिक मॉडल पर चीन अभी काम कर रहा है। चीन AI पेटेंट करने में चीन से आगे है। चीन अपनी सरकारी फंडिंग, कभी सार्वजनिक नहीं करता लेकिन कई रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका से ज्यादा चीन, इस सेक्टर में सालाना निवेश कर रहा है। स्टैंडफोर्ड सेंटर ऑन चाइना इकॉनमी एंड इंस्टीट्यूशन ने अनुमान जताया है कि एक दशक में चीन ने इस सेक्टर पर 912 अरब डॉलर, AI पर खर्च किया है।
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अमेरिका की AI ताकत क्या है?
अमेरिका AI तकनीक, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन, मेटा, OpenAI जैसे प्लेटफॉर्म से दुनियाभर में छाई है। भारत, ब्राजील, एशिया के देशों में अमेरिकन तकनीक को लोगों ने स्वीकार किया है, भरोसा जताया है। स्टैनफोर्ड के 2025 AI इंडेक्स रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में अमेरिका ने 40 फ्रंटियर AI मॉडल बनाए, जबकि चीन सिर्फ 15 पर ही अटका रहा।
साल 2024 में अमेरिका ने प्राइवेट सेक्टर में AI पर 109.1 बिलियन डॉलर खर्च कर दिए, यह चीन के 9.3 बिलियन डॉलर से 12 गुना ज्यादा है। अमेरिका को AI में साबित नहीं करना है, GPT-4, Gemini और LLaMA जैसे मॉडल को दुनिया कॉपी करती है। चीन खुद, अमेरिकन तकनीक से प्रभावित है। जिस तरह का जोर-शोर डीपसीक पर मचा था, वह भी फिसड्डी साबित हुआ।
चीन की ताकत क्या है?
चीन ने AI रिसर्च में काम कर रहा है। चीन, पेपर और पेटेंट में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। डीपसीक कंपनी का R1 मॉडल बहुत कम खर्च में बना, लेकिन OpenAI और Google के टॉप मॉडल को कुछ मामलों में टक्कर देता है। अमेरिकी चिप पर पाबंदी के बाद भी चीन, यह कमाल कर रहा है। चीन की बड़ी आबादी, अपने डेटा का लाभ ले रही है, चीन AI ट्रेनिंग पर जोर दे रहा है, अपने शैक्षणिक संस्थाओं में रिसर्च पर जोर दे रहा है। अमेरिका 5जी नेटवर्क और स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के दम पर, धमाल मचा रहा है।
किन अमेरिकी कंपनियों का दुनिया में बज रहा है डंका?
- OpenAI: AI प्रॉम्ट लिखवाना हो, इमेज बनवानी हो,शीट बनवानी हो, ऐप के लिए कोडिंग या अपनी मेडिकल रिपोर्ट दिखवानी हो अमेरिकी कंपनी OpenAI के पास हर सवाल का जवाब है। लोग इस पर भरोसा करते हैं, यह काम आसान कर रहा है। OpenAI, ChatGPT के लिए मशहूर है, नेचुरल लैंग्वेज प्रॉसेसिंग में इस कंपनी का जवाब नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट के साथ पार्टनरशिप ने इसे और लोकप्रिय बना दिया है।
- Google: सवाल आपके मन में कुछ भी हो, जवाब तो गूगल से मिलेगा। वेबसाइट आप दुनिया के किसी प्लेटफॉर्म पर बनाइए, उसे विजिबिलटी गूगल के जरिए ही मिलनी है। ट्रैफिक का सारा खेल, गूगल देखता है। गूगल का Gemini AI, ट्रेंड सेटर है, सर्च, क्लाउड और डिवाइस में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। अपनी सटीक जानकारी के लिए लोकप्रिय भी है।
- Meta: मार्क जुकरबर्ग ने जिस 'मेटावर्स' पर बात की थी, दुनिया उसे देख रही है। मेटा को AI में अभी और काम करना है लेकिन LLaMA ओपन-वेट मॉडल लोगों और डेवलपर्स को पसंद आ रहे हैं।
- X: तस्वीर बनवानी हो, वीडियो या कॉन्टेन्ट, ग्रोक का जवाब नहीं है। एलन मस्क ने जब से Twitter को खरीदा, यह और बेहतर हुआ है। पक्षपातपूर्ण जानकारियां देने का आरोप भले ही ग्रोक पर लगता रहा हो लेकिन इन दिनों लोगों को हर सवाल, ग्रोक से चाहिए। ग्रोक, बेबाक होकर बात करता है, डांट भी लगाता है। यह तकनीक, लोगों को लुभा रही है। xAI ने इसे विकसिल किया है, यह एडवांस्ड जनरेटिव AI चैटबॉट है। Grok-1 एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर काम कर रहा है, जिसकी जानकारियां सबसे सटीक होती हैं।
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चीन की कंपनियां कहां खड़ी हैं?
- DeepSeek: चीन का लोकप्रिय मॉडल है। यह R1 मॉडल पर काम करता है। कम खर्च में अच्छा परफॉर्म करता है। OpenAI को टक्कर देने के लिए लॉन्च हुआ था लेकिन लोगों ने इस मॉडल पर कम भरोसा किया। कई बार भ्रामक जानकारियां देता है।
- Baidu: चीन में लोकप्रिय है। ऑटोनॉमस ड्राइविंग और वॉयस AI में काम कर रही है। कम लोकप्रिय है।
- अलीबाबा और टेसेंट: क्लाउड, हेल्थकेयर और लॉजिस्टिक्स में AI। Qwen3.5-Plus भी ChatGPT की नकल लगता है। चीन अभी शुरुआती स्टेज में है।
- Huawei: अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद AI हार्डवेयर और टेलीकॉम में आगे है।
अमेरिकी दबदबे में सेंधमारी कैसे कर रहा है चीन?
अमेरिका के पास AI के लिए दुनिया के बेहतरीन निवेश हैं, एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स हैं, बेहतरीन साइंटिस्ट हैं। ज्यादातर देशों के बड़े सॉफ्टवेयर इंजीनियर, अमेरिका भागना चाहते हैं। प्राइवेट फंडिंग में बेशुमार मौके हैं, हाई क्वालिटी मॉडल पर अमेरिका साल 1956 से काम कर रहा है। अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी है कि सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर अमेरिका आत्मनिर्भर नहीं है। अमेरिका अभी चिप के लिए ताईवान पर निर्भर है, अब जापान और नीदलैंड की तरफ उम्मीद से देख रहा है।
चीन इसी वजह से ताइवान को आए दिन धमकाता है। अमेरिका इनोवेशन में भी ग्लोबल लीडर है। स्थापित कंपनियों की शुरुआत की चीन में हुई है। चीन यह गैप भरने की कोशिश कर रहा है। चीन, अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के देशों पर निर्भर होना चाहता है। अमेरिका प्राइवेट कंपटीशन और फाउंडेशनल रिसर्च पर भरोसा करता रहा है। चीन, कम खर्च वाले हाई-एफिशिएंसी मॉडल पर जोर दे रहा है। चीन का टार्गेट उन देशों की ओर है, जो आर्थिक तौर पर पिछड़े हैं और विकासशील हैं। चीन, काफी हद तक, छोटे देशों में सफल भी हो रहा है।
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