E20 पेट्रोल को लेकर ग्राहकों की बढ़ी चिंता, कंपनियों से क्या पूछ रहे हैं?
E20 पेट्रोल को लेकर लोगों के मन में कई आशंकाएं हैं। ग्राहकों को डर है कि उनकी कार खराब हो रही है। कार कंपनियों की मुश्किलें कैसे बढ़ीं, पढ़ें रिपोर्ट।

मारुतु सुजुकी, सर्विस सेंटर, गुरुग्राम। Photo Credit: PTI
देश में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 20 फीसदी करने को लेकर हंगामा मचा है। E20 पेट्रोल को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कार बनाने वाली कंपनियों का वक्त सफाई देते बीत रहा है कि E20 से गाड़ी खराब नहीं हो रही है। टाटा मोटर्स में ऑटो एक्सपर्ट सिद्धार्थ मिश्रा ने खबरगांव से बातचीत में कहा कि हंगामा बेवजह नहीं हो रहा है। देश में ज्यादातर गाड़ियां और दोपहिया वाहन E20 के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं। ऐसे में लोगों का डरना जायज है।
अप्रैल 2026 से ही E20 को हर पेट्रोल पंप पर स्टैंडर्ड फ्यूल बना दिया गया। कई लोग सोशल मीडिया पर शिकायत कर रहे हैं कि E20 से इंजन में खराबी आ रही है, माइलेज घट गया है और गाड़ी की परफॉर्मेंस कम हो गई है। यूट्यूबर और अब जन सुराज के नेता मनीष कश्यप ने तो
नितिन गडकरी
पर देश को बर्बाद करने का आरोप लगा दिया।
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क्या दावा कर रहे हैं लोग?
मनीष कश्यप ने कहा कि उनकी कार नितिन गडकरी की वजह से खराब हुई है। एथेनॉल के नाम पर गाड़ियों की दुर्दशा की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अपने बेटों की कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नितिन गडकरी बायोफ्यूल पर दांव खेल रहे हैं। दिल्ली में कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी हुआ कि सरकार ने बिना तैयारी के यह नीति थोप दी है, जिससे सर्विसिंग का खर्च बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर आ रही शिकायतों की वजह से अब कार कंपनियां अब ग्राहकों के सावलों से परेशान हैं।
सरकार का पक्ष क्या है?
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल को लेकर जारी खबरों को एक सिरे से खारिज किया है, इसे अफवाह करार दिया है। उनका कहना है कि E20 को लंबे टेस्टिंग के बाद लागू किया गया है और यह इंजन को नुकसान नहीं पहुंचाता।
नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री:-
झूठी कहानी रची जा रही है। E20 को देशभर में लाने से पहले द ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया लैब और गाड़ी कंपनियों ने कई टेस्ट किए थे। पुरानी गाड़ियों में कुछ पार्ट्स पर थोड़ा असर पड़ सकता है। सर्विसिंग के समय कंपनियां उन्हें मुफ्त में बदल रही हैं। एक भी ऐसी गाड़ी दिखाओ जो E20 से खराब हुई हो।
कंपनियां क्या कह रहीं हैं?
दिग्गज कार कंपनियों ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उन्होंने लाखों पुरानी गाड़ियों को सर्विस किया और E20 से जुड़ी कोई बड़ी समस्या नहीं पाई। कंपनियों ने माना कि E20 से फ्यूल एफिशिएंसी 3 से 3.5 फीसदी तक कम हो रही है।
किस तरह के सवाल पूछ रहे हैं लोग?
मारुति सुजुकी के एक सीनियर अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर खबरगांव से बात की है कि ग्राहकों के कौन से सवाल हैं, जो इन दिनों बढ़ गए हैं-
- माइलेज से जुड़े सवाल: E20 पेट्रोल डालने के बाद माइलेज क्यों गिर गया है? क्या E20 से सच में माइलेज 8-10% कम हो जाता है? पुरानी गाड़ी में E20 डालने से माइलेज पर कितना असर पड़ेगा? E20 और नॉर्मल पेट्रोल में माइलेज का अंतर कितना है? क्या ये फर्क हर गाड़ी में एक जैसा है? क्या E20 में ज्यादा ड्राइविंग करने पर भी माइलेज कम रहता है?
- व्हीकल हेल्थ से जुड़े सवाल: E20 पेट्रोल पुरानी गाड़ियों के इंजन को नुकसान तो नहीं पहुंचाएगा? क्या E20 से रबर के पार्ट्स, फ्यूल लाइन, इंजेक्टर और पंप खराब हो सकते हैं? E20 डालने के बाद इंजन में नॉकिंग, हीटिंग या स्टार्टिंग प्रॉब्लम क्यों हो रही है? क्या E20 से कार्बोरेटर वाली पुरानी बाइक और कार में समस्या ज्यादा होगी? लंबे समय तक E20 इस्तेमाल करने से इंजन की लाइफ पर क्या असर पड़ेगा?
- वारंटी से जुड़े सवाल: क्या E20 डालने से सर्विस सेंटर वाले वारंटी खारिज कर देंगे? एथेनॉल मिला पेट्रोल लंबे समय तक टैंक में रखने पर खराब तो नहीं हो जाएगा? क्या E20 से प्रदूषण सच में कम होता है या सिर्फ कागजों में?
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सवाल और भी, जिन पर मचा है हंगामा?
एथेनॉल मिलाने के बाद भी पेट्रोल की कीमत क्यों नहीं घट रही? सरकार कह रही थी सस्ता होगा, फिर महंगा क्यों है? एथेनॉल ब्लेंडिंग से तेल कंपनियों को फायदा हो रहा है या आम आदमी को? E20 और E10 में प्राइस डिफरेंस क्यों नहीं दिख रहा? दोनों की कीमत लगभग बराबर क्यों? क्या E20 डालने से पैसे बचेंगे या ज्यादा खर्चा हो जाएगा?
E20 पेट्रोल हर गाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है या कुछ मॉडल्स में मना है?
ऑटो दिग्गज क्या कह रहे हैं?
इंजीनियरिंग इंडिया लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्तिका शुक्ला ने कहा, 'यह पेट्रोल में एथनॉल ब्लेंडिंग रातोंरात नहीं की गई है, बल्कि यह एक मापा हुआ, वैज्ञानिक रूप से संचालित चरणबद्ध प्रक्रिया का हिस्सा है। भारत ने 2013-14 में लगभग 1.5 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 20 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल कर लिया। यह तय समय से 5 साल पहले ही पूरा कर लिया गया।'
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा, 'ग्राहकों को जो वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं, वे बेहद अच्छी तरह से इंजीनियर्ड, डिजाइन किए जाते हैं। कई टेस्टिंग एजेसियां इसकी निगरानी करते हैं। एथेनॉल अच्छा तेल है, यह जीरो कॉर्बन ऑयल है जो पौधों से मिल रहा है।'
मारुती सुजुकी इंडिया के सीनियर एग्जीक्युटिव ऑफिसर, राहुल भारती ने कहा, 'एक निर्माता के रूप में हमने E10 कारों को E20 ईंधन पर सभी पैरामीटर्स के लिए टेस्ट किया है और हमें कोई चिंता वाली बात नहीं मिली।'
सरकार क्यों एथेनॉल पर जोर दे रही है?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बार-बार कहा है कि सरकार चाहती है कि आयातित तेल पर निर्भरता कम हो, किसानों को फायदा हो और प्रदूषण घटे। एथेनॉल देश में ही गन्ना और मक्के से बनता है तथा यह पेट्रोल से साफ जलता है। ईरान संकट के बाद इस पर जोर देना जरूरी भी है।
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आलोचना क्यों हो रही है?
टाटा मोटर्स के व्हीकल एक्सपर्ट सिद्धार्थ मिश्रा ने कहा, 'दुनिया के जिन देशों ने E20 की ओर खुद को बढ़ाया है, उन्होंने इसे एक साल या 1 महीने में लागू नहीं क्या है। उन्हें 4 दशक से ज्यादा वक्त, बायोफ्यूल पर खर्च किया है। भारत सिर्फ 3 साल में 30 साल का लक्ष्य हासिल करना चाहता है। सड़कों पर चल रही 75% से ज्यादा गाड़ियां E20 के लिए उपयुक्त नहीं हैं।'
मोटर गैराज के मैकेनिक क्या कह रहे हैं?
सदीक आलम, सिद्धार्थनगर में एक गैराज चलाते हैं। उनका कहना है कि पुरानी गाड़ी के मालिक परेशान हैं। जो लोग सर्विसिंग कराने आ रहे हैं, उनकी शिकायत है कि कार्बोरेटर में गंदी जमा है। अभी ज्यादा असर तो नहीं पड़ा है लेकिन लगो शिकायत कर रहे हैं। ज्यादातर मामलों में ग्राहक बेवजह परेशान हैं।'
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