logo

मूड

ट्रेंडिंग:

ज्यादा स्क्रीन टाइम वाले छात्रों की मैथ्स कमजोर! रिपोर्ट में दिखा पैटर्न

OECD की PISA रिपोर्ट में 15 साल के छात्रों के रीडिंग, गणित और विज्ञान के स्कोर में गिरावट सामने आई। ज्यादा स्क्रीन टाइम वाले छात्रों में यह पैटर्न अधिक दिखा।

representative image of Students

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Chatgpt

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) के प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (PISA) की नई रिपोर्ट में 15 साल के छात्रों की पढ़ाई को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में OECD के ज्यादातर देशों में छात्रों के रीडिंग, गणित और विज्ञान के स्कोर में गिरावट आई है। इनमें रीडिंग का प्रदर्शन सबसे ज्यादा कमजोर हुआ है, जबकि विज्ञान के स्कोर में गिरावट तुलनात्मक रूप से कम रही है। रिपोर्ट में इसके पीछे एक पैटर्न उन स्टूडेंट्स में देखा गया है जो ज्यादा स्क्रीन टाइम देते हैं।

 

PISA 2025 में 91 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के 7.6 लाख से ज्यादा 15 साल के छात्रों ने हिस्सा लिया। ये छात्र दुनिया भर के करीब 3.3 करोड़ 15 साल के बच्चों का प्रतिनिधित्व करते हैं। नतीजों में पूर्वी एशिया के शिक्षा तंत्र का दबदबा साफ दिखा। गणित में टॉप-10 में सात स्थान इसी क्षेत्र के देशों या शिक्षा प्रणालियों ने हासिल किए।

 

यह भी पढ़ें: भारत में आया Meta Muse तो क्या बदल जाएगा WhatsApp का इस्तेमाल? समझिए

 

2015 के मुकाबले रीडिंग का स्कोर 28 अंक कम हुआ है। वहीं गणित के स्कोर में 22 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जिसे करीब एक साल की पढ़ाई के बराबर माना गया है। रिपोर्ट में डिजिटलाइजेशन, बढ़ता स्क्रीन टाइम और मनोरंजन के लिए किताबें कम पढ़ने को इस गिरावट से जुड़े संभावित कारणों में शामिल किया गया है। हालांकि रिपोर्ट किसी एक कारण को सीधे तौर पर गिरते प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराती।

इन देशों के छात्रों का प्रदर्शन बेहतर

यूरोपीय संघ में एस्टोनिया, फिनलैंड, आयरलैंड, ऑस्ट्रिया, पोलैंड और चेकिया ऐसे देश रहे, जहां रीडिंग, गणित और विज्ञान तीनों में छात्रों ने OECD के औसत से बेहतर प्रदर्शन किया। इसके उलट स्पेन, क्रोएशिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, ग्रीस, रोमानिया, साइप्रस और बुल्गारिया तीनों विषयों में औसत से नीचे रहे।

 

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शिक्षा पर ज्यादा खर्च करना हमेशा बेहतर नतीजों की गारंटी नहीं देता। OECD में शिक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला लक्जमबर्ग विज्ञान में आयरलैंड, फ्रांस और इटली से पीछे रहा।

 

यह भी पढ़ें: ऑक्सफोर्ड ने ‘Brain Rot’ को चुना वर्ड ऑफ द इयर, जानें इसका Gen Z मतलब

अमीर छात्रों के स्कोर में ज्यादा गिरावट

छात्रों की आर्थिक स्थिति और उनके प्रदर्शन के बीच अंतर में भी बदलाव आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतर के कम होने की वजह वंचित छात्रों का प्रदर्शन बेहतर होना नहीं, बल्कि संपन्न छात्रों के स्कोर में ज्यादा गिरावट आना है।

 

रीडिंग में अपेक्षाकृत संपन्न छात्रों के स्कोर में 20 अंकों की गिरावट आई, जबकि वंचित छात्रों के स्कोर में 4 अंक ही कम हुए। यानी दोनों समूहों के बीच का अंतर पहले के मुकाबले घट गया है।

 

यह भी पढ़ें: धरती को गर्म कर रहा है भारत! IIT खड़गपुर की स्टडी ने एनर्जी और खेती पर उठाए सवाल

ज्यादा स्क्रीन टाइम और कमजोर मैथ्स का संबंध

PISA 2025 में डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल और छात्रों के प्रदर्शन के बीच संबंध भी देखा गया। स्कूल के बाहर मनोरंजन के लिए रोज चार घंटे से ज्यादा डिजिटल डिवाइस इस्तेमाल करने वाले छात्रों का गणित में प्रदर्शन आम तौर पर कम पाया गया। ऐसे छात्रों ने स्कूल से जुड़ाव भी कमजोर महसूस किया।

 

वहीं, संतुलित डिजिटल इस्तेमाल करने वाले छात्रों का प्रदर्शन बिल्कुल डिवाइस न इस्तेमाल करने या बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने वाले छात्रों की तुलना में बेहतर रहा। रिपोर्ट यह संबंध दिखाती है लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ज्यादा स्क्रीन टाइम ही कम स्कोर का एकमात्र कारण है।

Related Topic:#Tech News#Technology

और पढ़ें