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न ATM, न नेट बैंकिंग..., राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता किसान के खाते से उड़े 80 हजार

शैलेंद्र चांदी को उनकी अनोखी खेती के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार तक मिल चुका है। अब उन्हें 80 हजार की धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा है।

Shailendra Chandi

शैलेंन चांदी। Photo Credit: Social Media

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पश्चिम बंगाल के चर्चित किसान शैलेंद्र चांदी के साथ साइब ठगी हुई है। वह देश में पर्यावरण के अनुकूल खेती के लिए साल 2019 में केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पुरस्कार पा चुके हैं। उनके साथ साइबर ठगी हुई है। पहले उनका फोन चोरी हुआ, फिर उनकेउनके बैंक खातों से कुल 83,244 रुपये निकाल लिए गए। 

29 मार्च को शैलेंद्र चांदी का मोबाइल फोन गुम हो गया। उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उनके बैंक खाते उस फोन के सिम कार्ड से लिंक थे, इसलिए उन्होंने नया सिम तुरंत बनवा लिया। 

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नया सिम लिया तो गायब होने लगे पैसे

नया सिम सक्रिय होते ही उन्हें SMS अलर्ट मिले कि 31 मार्च को उनके एक सरकारी बैंक खाते से 6,000 रुपये और 4,000 रुपये दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन में निकाल लिए गए। इस बात का पता चलते ही 1 अप्रैल को उन्होंने शांतिपुर पुलिस और साइबर क्राइम विभाग में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं। लेकिन ठगी रुकी नहीं। 

खाते से चोरी हो गए 83,244 रुपये

2 अप्रैल को दूसरे सरकारी बैंक खाते से 12 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 71,000 रुपये और निकाल लिए गए। दोनों खातों से करीब 83,244 रुपये चोरी हो गए। 

न इंटरनेट बैंकिंग, न ATM फिर भी उड़ गए पैसे 

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शैलेंद्र चांदी के दोनों बैंक खातों में इंटरनेट बैंकिंग सुविधा चालू ही नहीं थी और उनके पास एटीएम कार्ड भी नहीं था। बैंक अधिकारियों को भी यह समझ नहीं आ रहा है कि बिना ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम के पैसे कैसे निकाले जा सके। इस घटना के बाद बुजुर्ग किसान ने दोनों बैंकों के मैनेजर, नोडल अधिकारी, साइबर क्राइम विभाग और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा को लिखित शिकायतें दीं हैं।

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क्या चाहते हैं शैलेंद्र चांदी?

तीन महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई आरोपी नहीं पकड़ा और न ही कोई संदिग्ध की पहचान की है। शैलेंद्र चांदी ने कहा, 'जिस तरह कुछ लोग कृषि में विज्ञान का दुरुपयोग करके हाइब्रिड और केमिकल से अस्थायी फायदा लेते हैं, उसी तरह साइबर अपराधी भी विज्ञान का दुरुपयोग करके अवैध कमाई कर रहे हैं।'

शैलेंद्र चांदी ने कहा, 'उन्नत शिक्षा, साइबर क्राइम विभाग और सरकार के प्रयासों का क्या फायदा, अगर अपराधी सिस्टम को मात देते रहें? क्या आम लोगों को ठगने वाले ही सबसे ताकतवर साबित होंगे?'

इको-फ्रेंडली खेती के लिए मशहूर शैलेंद्र चांदी इन दिनों आर्थिक मुश्किलों का समाना कर रहे हैं। वह इंसाफ मांग रहे हैं लेकिन अभी तक उनकी मुश्किल का हल पुलिस नहीं निकाल पाई है। 

 


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