फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर फायरिंग करने वाले 7 आरोपियों को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार हुए ज्यादातर आरोपी अभी 20-21 के साल हैं। लॉरेंस बिश्नोई गैंग, सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सक्रिय है। किसी मशहूर शख्स को धमकी देनी हो, कहीं फायरिंग करनी हो, लॉरेंस गैंग के गुर्गे बढ़-चढ़कर क्रेडिट लेते हैं। यही वजह है कि आपराधिक प्रवृत्ति के युवाओं को यह गैंग, अब लुभा रहा है।
गैंगस्टर दिखने की चाहत में इन आरोपियों ने पूछताछ में कबूल लिया है कि वे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शुभम लोनकर गैंग से प्रभावित हैं। आरोपियों को ऐसे गैंगस्टर से प्रभावित थे। इस गैंग के सोशल मीडिया पर कई अकाउंट हैं, खूब स्वैग दिखाते हैं, रील अपलोड करते हैं और रंगदारी वाले वीडियो बनाते हैं। उत्तर भारत में ऐसा चलन हाल के दिनों में बढ़ा है।
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मुंबई पुलिस ब्लॉक करा रही रंगदारी वाले अकाउंट
इंडियन एक्सप्रेस ने मुंबई पुलिस के हवाले से कहा है कि सोशल मीडिया पर कई ऐसे खाते हैं, जिन्हें पुलिस ब्लॉक करा रही है। मुंबई के पुराने अंडरवर्ल्ड के काम करने का तरीका और इनके काम करने के तरीके में अंतर है। नए गैगंस्टर, खुद को दिखाने में ज्यादा भरोसा रखते हैं, सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं, तब के गैंगस्टर, चोरी-छिपे आपराधिक वारदातों को अंजाम देते थे।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग, सोशल मीडिया पर अति सक्रिय है। यह गैंग, सोशल मीडिया पर खुले एलान में भरोसा रखता है। किसी को धमकी देनी हो, किसी पर दबाव बनाना हो, यह गैंग सोशल मीडिया के इस्तेमाल से अपनी मौजूदगी दिखाता है।
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क्या तकनीक अपना रही है पुलिस?
पंजाब पुलिस ने गृह मंत्रालय, अलग-अलग राज्यों के पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को यह बताया है कि 6000 से ज्यादा ऐसे एकाउंट ब्लॉक किए हैं, जो अपराधियों का महिमामंडन करते थे। मुंबई पुलिस भी ऐसे सोशल मीडिया को ब्लॉक करती है, जिनमें लोग खुद को गैंगस्टर दिखाते हैं। हर खाते को ब्लॉक करना मुश्किल है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कैसे यह गैंग काम करता है। यूपी STF के एक अधिकारी ने यह बताया है कि एक आरोपी ने सोशल मीडिया के जरिए गैंग में भर्ती होने का ऑफर दिया था। आरोपी के गांव का ही एक शख्स इस गिरोह में शामिल था।
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कैसे काम करता है यह गैंग?
इंस्टा पर लॉरेंस गैंग के कई फैन अकाउंट हैं। इन अकाउंट्स पर गैंगस्टर रील, AK-47 राइफल, हथियार, माउजर के साथ क्लिक कराई गई तस्वीरें भरी रहती हैं। कई अकाउंट पर 19-20 साल के लड़के लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तस्वीरों वाले शर्ट पहनते हैं, तस्वीरें शेयर करते हैं। सोशल मीडिया पर AI का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।
जिन खातों से आपराधिक घटनाओं की जिम्मेदारी ली जाती है, उस पर लाखों लोग जुटे होते हैं, हजारों लाइक और शेयर मिलते हैं। युवाओं को लुभाने के लिए यही तरीका लॉरेंस गैंग अपना रहा है। कई बार, विवादित अकाउंट्स पर खुद आपराधिक प्रवृत्ति के युवा काम मांगने लगते हैं।
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पैसों के लिए मरने-मारने पर उतारू हैं गैंग में भर्ती लोग
पहले अंडरवर्ल्ड के लोग भी शार्प शूटर तलाशते थे, अब सामान्य घरों आने वाले युवा भी इस गैंग में भर्ती हो जाते हैं। उत्साह में लोग, दबंगई दिखाने के लिए लॉरेंस गैंग में भर्ती हो जाते हैं। लॉरेंस के कई फैन अकाउंट से हत्या, अपहरण, फिरौती और रंगदारी के वीडियोज शेयर होते हैं, युवाओं को शामिल होने के प्रलोभन दिए जाते हैं।
कौन भर्ती होते हैं?
लॉरेंस गैंग की नजर उन युवाओं पर रहती है जो बेहद गरीब या बिखरे हुए परिवारों से आते हैं। उन्हें कनाडा में बेहतर जिंदगी का वादा दिया जाता है और भारत में अपराध कराया जाता है। लोगों को लगता है कि लॉरेंस और गोल्डी बराड़ की तरह कुख्यात हो जाएंगे और नाम बन जाएगा। अपराध के बाद इन लोगों को पुलिस पकड़ती है, तब एहसास होता है कि क्या जुर्म उन्होंने किया है।