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आंबेडकर की प्रतिमा पर दूध चढ़ाने गए सपा के नेता, पुलिस ने रोका, हंगामा मच गया

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता जिद कर रहे थे कि उन्हें भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा पर दूध चढ़ाने दिया जाए। पुलिस के साथ कार्यकर्ताओं की लंबी बहस हुई है।

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AI इमेज। प्रतीकात्मक तस्वीर। Photo Credit: Sora

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उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा पर दूध चढ़ाने को लेकर तीखी बहस हुई है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता, भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा पर दूध चढ़ाने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोक दिया। कार्यकर्ता बार-बार कहते रहे कि उन्हें भीम राव आंबेडकर का सम्मान करने दिया जाए।

पुलिस अधिकारी ने इस आधार पर उन्हें दूध चढ़ाने से रोक दिया कि बड़े अधिकारियों के आदेश नहीं मिले हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम को रोकने के लिए कहा है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस से सवाल किया कि वे किस आधार पर रोक रहे हैं।

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पुलिस-समाजवादी कार्यकर्ताओं की तीखी झड़प 

पुलिस अधिकारी ने कहा, 'हमारे सीनियर अधिकारियों ने कहा है इसलिए हम रोक रहे हैं। आप अधिकारी से बात कर लीजिए। अगर वह आदेश देंगे तो आप कर लीजिएगा। बिना अधिकारी के आदेश के आप नहीं कर सकते हैं। हमारे अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि नया कोई कार्यक्रम नहीं होगा।'

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा, 'क्या इससे पहले ऐसे कार्यक्रम नहीं होते थे?' जवाब में वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने कहा, 'यहां अनुमति नहीं है। हम इजाजत नहीं देंगे।'

पुलिस ने कहा- नई परंपरा नहीं चलेगी

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि हमें ऐसा करने से न रोका जाए, जवाब में पुलिस ने कहा कि नई परंपरा नहीं करने दी जाएगी। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 

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समाजवादी पार्टी के नेता, सम्राट मलिक ने कहा, 'आंबेडकर की जयंती से एक दिन पहले, उनकी मूर्ति को दूध से नहलाने और माल्यार्पण करने गए थे। पुलिस ने रोक दिया। जब मैंने पूछा पूछा कि क्यों रोक रहे हो तो उन्होंने कहा कि यह ऊपर से आदेश आया है। यह कैसा आदेश भाई जिसकी जब इच्छा होगी तब माल्यार्पण करेगा।'

लोग क्या कह रहे हैं?

सोशल मीडिया पर लोग पुलिस की जमकर आलोचना कर रहे हैं। अनुरंजन सिंह नाम के एक शख्स ने लिखा, 'असमाजिक तत्व जब मूर्ति तोड़कर चले जाते हैं तब तो ये पहरेदार नहीं दिखते हैं।' एहतिशाम अनवर ने लिखा, 'गंगा में 11 हजार लीटर दूध बहा दिया जाए तो वह ठीक लेकिन एक-दो लीटर दूध से अगर बाबा साहब की मूर्ति का स्नान करा दिया जाए तो क्या दिक्कत है।' 

कलुआ क्रांतिकारी नाम के एक X यूजर ने लिखा, 'भाई यह सब मत करो। आंबेडकर को मानना है तो दिल से मानो, यह सब ढोंग दिखावे से नहीं। वह जिंदगीभर इन पाखंडों से लड़े अब तुम लोग ये सब कर रहे हो इनके नाम।'

 

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नेहरूवियन नाम के एक X यूजर ने लिखा, 'अगर इन समाजवादी पार्टी वालों की जगह बीजेपी के लोग ऐसा करते तो यही दरोगा और अधिकारी खुद दूध की बाल्टी ऊपर चढ़ कर बीजेपी के नताओं को पकड़ाते।' 

अक्सद पठान नाम के एक X यूजर ने लिखा, 'यह तो गलत बात है भाई या तो सब को रोकना चाहिए या सबको छूट होना चाहिए। अभी कुछ दिन पहले की बात है कितना दूध नदी में बहाया गया था तो इन लोगों से भी किसी को ऐतराज नहीं करना चाहिए। मैं अपनी सोच बता रहा हूं, उसी दूध की खीर बनाकर गरीबों को खिला दो प्रतिमा के पास और अच्छा रहेगा।'

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