स्वीडिश संसद के लिए हाल ही में चुनी गईं नीला विखे पाटिल की चर्चा भारत में भी खूब हो रही है। अब उन्होंने अपने मंत्री चाचा और चचेरे भाई के एक दावे पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वह इससे हैरान हैं। नीला ने कहा है कि महाराष्ट्र के उनके चाचा और बीजेपी मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और चचेरे भाई सुजय विखे पाटिल उनकी राजनीतिक सफलता का श्रेय विखे परिवार को दे रहे हैं, जबकि पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से उनका दोनों से कोई संपर्क नहीं है। बता दें कि नीला, बीजेपी नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के बड़े भाई अशोक विखे पाटिल की बेटी हैं।
मीडिया से बातचीत में नीला विखे ने कहा कि किसी ने उन्हें एक वीडियो भेजा था। इस वीडियो में सुजय विखे पाटिल यह दावा करते नजर आ रहे हैं कि विखे परिवार ने यह सुनिश्चित किया कि महाराष्ट्र में भले ही परिवार के एक सांसद को हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन परिवार का एक दूसरा सदस्य स्वीडन में निर्वाचित हो गया। उनके इसी दावे पर अब नीला ने हैरानी जताई है।
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नीला ने क्या बताया?
नीला ने कहा कि यह बात उनके लिए हैरान करने वाली है, क्योंकि एक दशक से भी अधिक समय से उनका अपने चाचा या चचेरे भाई, दोनों में से किसी से कोई संपर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि वह नियमित रूप से भारत आती रही हैं लेकिन अपने चचेरे भाई और चाचा से कभी नहीं मिली और अब सांसद चुने जाने के बाद उनके चाचा और चचेरे भाई उनकी सफलता का श्रेय लेना चाहते हैं।
41 साल की नीला ने अपने चाचा और चचेरे भाई की राजनीति से भी दूरी बना ली है। उन्होंने कहा, 'उनकी राजनीति मुझसे अलग है। मैं अपनी पार्टी कभी नहीं बदलूंगी, जबकि उन्होंने पार्टी बदली है।' नीला का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके स्वीडन की संसद के लिए चुने जाने को लेकर महाराष्ट्र में उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि की चर्चा पूरे देश में है।
कौन हैं उनके भाई?
नीला के चचेरे भाई सुजय विखे पाटिल लोकसभा के पूर्व सदस्य हैं। उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव अहिल्यानगर लोकसभा सीट से लड़ा था लेकिन इस चुनाव में उन्हें शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार निलेश लंके से हार का सामना करना पड़ा था। वह महाराष्ट्र की राजनीति में काफी सक्रिय हैं और अपनी चचेरी बहन की जीत पर उन्होंने टिप्पणी की थी जिसका अब नीला ने खुद जवाब दिया है।
नीला के चाचा राधाकृष्ण विखे पाटिल 2019 में भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले वह कांग्रेस और शिवसेना में रह चुके हैं। कांग्रेस में रहते हुए राधाकृष्ण विखे पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर काम किया था। इसके साथ ही वह महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। नीला की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए राधाकृष्ण विखे पाटिल ने उनके स्वीडिश संसद के लिए चुने जाने को परिवार के लिए गौरव और खुशी का विषय बताया था।
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स्वीडिश संसद के लिए चुनी गईं नीला
नीला विखे पाटिल 13 सितंबर को हुए राष्ट्रीय चुनाव में स्वीडन की संसद के लिए निर्वाचित हुई हैं। उन्होंने स्टॉकहोम सिटी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता है। स्वीडन की संसद में कुल 349 सदस्य होते हैं और इन्हीं में नीला ग्रीन पार्टी की टिकट पर संसद पहुंची हैं और वह पार्टी की प्रमुख सदस्य हैं। उनका जन्म स्वीडन में हुआ है। उन्होंने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से अर्थशास्त्र और कानून में एमबीए किया। इसके अलावा उन्होंने यूनिवर्सिटी डी कॉम्प्लूटेंस में भी पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद नीला ने स्वीडन के प्रधानमंत्री कार्यालय में राजनीतिक सलाहकार के तौर पर भी काम किया।
अब वह स्वीडन की संसद के लिए चुनी गई हैं। नीला ने बताया कि उनके चाचा राधाकृष्ण विखे पाटिल ने उनकी जीत के बाद उन्हें फोन किया था। उन्होंने कहा, 'मेरे चाचा ने कल मुझे फोन करके मेरी जीत पर बधाई दी, यह उनकी अच्छी बात थी। पिछले एक दशक से मेरा न तो उनसे और न ही अपने चचेरे भाई से कोई संपर्क रहा है।'