देश में लोगों की खर्च करने की आदत में एक उछाल आया है। खासकर युवा वर्ग में जहां युवा पीढ़ी तेजी से खर्च करने वाली जेनेरेशन बनती जा रही है। इनमें तेजी से क्रेडिट कार्ड और लोन लेने की आदत बढ़ रही है। इस कारण वह शुरुआत में ही कर्ज के बोझ तले दब रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, नए क्रेडिट कार्ड लेने वाले युवाओं में से लगभग एक-तिहाई लोग बेहद कम समय में भारी बकाए और लोन के चक्कर में फंस गए हैं।
बैंकों के लुभावने वादों में युवा आसानी से फंस कर अपने ऊपर बेवजह का बोझ बढ़ा रहे हैं। आपको यह जान कर हैरानी होगी कि 30 साल या उससे कम उम्र के जेन-जी नए क्रेडिट कार्ड बाजार में करीब 50 % हिस्सेदारी रखते हैं। परेशान करने वाली बात यह है कि इनमें से 28% युवाओं ने कार्ड मिलने के महज तीन महीने के भीतर ही 25,000 रुपये या उससे अधिक का कर्ज चढ़ा लिया।
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कमाई और लोन लिमिट का फर्क
इस विषय के जानकारों का मानना है कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट बैंकों की तरफ से दी गई एक सुविधा है जो आपकी असली वित्तीय क्षमता को नहीं दर्शाती। आपको यह समझना पड़ेगा कि कार्ड से कितना खर्च करना है। इसका फैसला आपकी सैलेरी, घरेलू खर्च, मौजूदा EMI और इमरजेंसी फंड की बचत को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।
इस मामले का एक नियम होता है जिसे हम बचत का नियम कहते हैं। इसके मुताबिक आपको अपनी कुल कमाई का कम से कम 20 फीसदी हिस्सा हर महीने बचाना चाहिए। साथ ही क्रेडिट कार्ड पर होने वाला खर्च आपकी कुल आय के 20 से 30 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। आपकी सभी EMI का कुल बोझ महीने की कुल कमाई के 35 से 40 फीसदी से नीचे ही रहना चाहिए।
केवल 'मिनिमम ड्यू' भरने की भूल न करें
अक्सर लोग बिल आने पर सिर्फ 'मिनिमम देय राशि' चुकाकर निश्चिंत हो जाते हैं। इससे आप डिफॉल्टर बनने से तो बच जाते हैं लेकिन बचे हुए बकाये पर भारी ब्याज लगना शुरू हो जाता है। क्रेडिट कार्ड पर सालाना 36 से 48 फीसदी या उससे भी अधिक ब्याज वसूला जाता है।
EMI में बदलने से पहले जानें ये बातें
नकदी की कमी होने पर छोटी बकाया राशि को 2 से 6 महीने की EMI में बदलना कुछ समय के लिए राहत दे सकता है। हालांकि, इसे अपनी आदत बना लेना भारी पड़ सकता है क्योंकि EMI में बदलने पर सालाना 10.5 से 25 फीसदी तक का ब्याज देना पड़ सकता है। साथ ही कुल लेनदेन पर 1 से 5 फीसदी तक का प्रॉसेसिंग चार्ज अलग से लगता है।
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क्रेडिट कार्ड टेस्ट
क्रेडिट कार्ड लेते समय एक बहुत अच्छा और आसान तरीका है। उसके बारे में कुछ सवालों का जवाब ढूंढ कर आप अपना फैसला कर सकते हैं। कार्ड लेने से पहले कुछ सवाल पूछना जरूरी है-
- Joining fee कितनी है?
- Annual fee कितनी है?
- Fee waiver की शर्त क्या है?
- पूरा bill न चुकाने पर ब्याज कितना लगेगा?
- लेट पेमेंट चार्ज कितना है?
- कैश निकालने पर क्या चार्ज है?
- रिवार्ड प्वाइंट की वास्तविक कैश वैल्यू कितनी है?
- क्या मैं हर महीने पूरा बकाया चुका सकता हूं?
अगर आपको इन सवालों का जवाब नहीं पता है तो सिर्फ फोन पर मिले ऑफर के आधार पर कार्ड लेने की जल्दबाजी न करें। साथ ही सभी को अपना क्रेडिट स्कोर और वित्तीय रिकॉर्ड बेहतर बनाए रखने के लिए हर महीने समय पर पूरे बिल का भुगतान करना चाहिए। इसके अलावा, क्रेडिट लिमिट का इस्तेमाल 30 फीसदी से कम रखें। एक ही समय में कई नए क्रेडिट कार्ड या लोन के लिए अप्लाई करने से बचें।
