भारत के शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का एक अनोखा रुख देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां फॉरेन पोर्टफोलियो इंवेस्टर्स (FPI) पुराने शेयरों को बेचने में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे नए IPOs पर खुलकर दांव लगा रहे हैं। साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक शेयर बाजार से रिकॉर्ड 3 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं लेकिन इसी दौरान उन्होंने IPOs में करीब 55,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है।
यह ट्रेंड लगातार तीसरे साल बना हुआ है। यहां विदेशी निवेशक प्राइमरी मार्केट से खरीदारी कर रहे हैं और सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली कर रहे हैं। बाजार जानकारों का मानना है कि सेकेंडरी मार्केट में शेयरों की कीमतें ज्यादा होने के कारण FPIs नए IPOs को तरजीह दे रहे हैं। वहां उन्हें सही कीमत पर अच्छे शेयर मिल जाते हैं।
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अगर नजर डाले पिछले कुछ सालों के रिकॉर्ड पर तो साल 2024 में FPIs का रुख दोनों तरफ बराबर रहा। उन्होंने IPO में करीबन 1.2 लाख करोड़ रुपये डाले, तो वहीं सेकेंडरी मार्केट से भी ठीक 1.2 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए। अगले साल 2025 में IPO में खरीदारी थोड़ी घटकर लगभग 74 हजार करोड़ रुपये रही लेकिन सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली दोगुनी से ज्यादा बढ़ गई। साल 2026 में बिकवाली ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सेकेंडरी मार्केट से 3 लाख करोड़ रुपये निकाले जा चुके हैं जबकि IPOs में 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आया है।
डेट मार्केट में भी भरोसा कायम
शेयरों के अलावा, विदेशी निवेशकों ने भारत के डेट मार्केट यानी बॉन्ड में भी दिलचस्पी दिखाई है। FPIs ने प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह के डेट मार्केट में खरीदारी जारी रखी है। केवल 2025 में सेकेंडरी डेट मार्केट से उन्होंने करीब 24,000 करोड़ रुपये निकाले थे लेकिन उसी दौरान प्राइमरी डेट मार्केट में 32,000 करोड़ रुपये का निवेश करके कुल नेट फ्लो को पॉजिटिव बनाए रखा।
विदेशी निवेशक क्यों चुन रहे हैं IPOs?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, IPOs में पैसा लगाने से विदेशी निवेशकों को बड़ी हिस्सेदारी पाने का मौका मिलता है। इसके साथ ही, यहां शेयरों की सही कीमत का अंदाजा लगाना आसान होता है और जोखिम थोड़ा कम रहता है। साथ ही जब सेकेंडरी मार्केट में शेयर काफी महंगे लगने लगते हैं तब भी भारत का प्राइमरी मार्केट निवेशकों को मजबूत कंपनियों के विकल्प देता रहता है। यही वजह है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा IPOs पर लगातार बना हुआ है।
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अब समझते हैं कि FPIs का आंकड़ा जा कहां रहा है? यह किसी एक जगह जाने के बजाय अर्थव्यवस्था के 4 जरूरी पिलर्स में बंट रहा है। FPIs भारत के IPO बाजार में करोड़ों लगाकर 4 मुख्य सेक्टरों पर बड़ा दांव लगा रहे हैं। पहला, बैंकिंग और फाइनेंस। विदेशी पैसा अब SBI फंड्स और NSE जैसे बड़े शेयर बाजार इंफ्रास्ट्रक्चर में लग रहा है। दूसरा, टेक कंपनियां। विदेशी निवेशक केवल उन्हीं AI, क्विक-कॉमर्स और डेटा टेक कंपनियों में दांव लगा रहे हैं जो वाकई मुनाफा कमा रही हैं।
तीसरा, मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस, भारत के 'मेक-इन-इंडिया' और PLI योजना से फायदा उठाकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स और डिफेंस से जुड़े IPOs में रिकॉर्ड विदेशी पैसा आ रहा है। हेल्थकेयर में मध्यम वर्ग की बढ़ती आय के कारण बड़े अस्पतालों और प्रीमियम ब्रांड्स में लंबे समय के लिए निवेश हो रहा है। अब यह कहना गलत नहीं होगा कि विदेशी निवेशक केवल पुराने बड़े शेयरों तक सीमित नहीं हैं। वे देश की नई और मुनाफा कमाने वाली ग्रोथ स्टोरी में पैसा लगा रहे हैं।
नोट- यह सभी आंकड़े नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड (NSDL) से लिए गए हैं।
