बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार (24 जुलाई) को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा दिया है। उनके सहयोगी ने यह जानकारी दी। शहाबुद्दीन का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ है जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की बात कही है। मोहम्मद शहाबुद्दीन को शेख हसीना का करीबी नेता माना जाता है।
शहाबुद्दीन से अपने इस्तीफे के पीछे का कारण अपनी स्वास्थ्य की परेशानी बताई है। उन्होंने कहा, 'इस समय मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है।' राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए जातीय संसद के स्पीकर मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद को अपना इस्तीफा सौंपा।
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दो साल बचा था कार्यकाल
उनका कार्यकाल अभी दो साल बचा था। वह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के पूर्व सहयोगी थे। राष्ट्रपति भवन बंगभवन के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहाबुद्दीन के प्रतिनिधि उनका इस्तीफा लेकर संसद के लिए निकल चुके हैं। इस्तीफा संसद के अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद को सौंपा जाएगा, जो बांग्लादेश के संविधान के अनुसार नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे।
प्रवक्ता ने कहा, 'जब तक संसद के अध्यक्ष को त्यागपत्र नहीं मिल जाता, मैं इस्तीफे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकता।' वर्ष 1971 के मुक्ति संग्राम में भूमिका निभाने वाले और निचली अदालत के न्यायाधीश रहे शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी।
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छात्रों के प्रदर्शनों के बाद भी राष्ट्रपति बने रहे
उन्हें देश की पिछली संसद ने सर्वोच्च पद के लिए चुना था और वह एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जो जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी अपने संवैधानिक पद पर बने हुए थे। इन विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई थी। हसीना भारत चली गई थीं और पांच अगस्त 2024 से वहीं रह रही हैं।
