दुनिया में जब भी रोचक देशों की बात होगी तो उनमें से एक नाम चिली का जरूर होगा। लिथियम ट्रायंगल का हिस्सा चिली अपने आकार की वजह से अनोखा है। लैटिन अमेरिका का यह देश प्रशांत महासागर के तट पर रिबन के आकार में बसा है। इसकी गिनती दुनिया के सबसे लंबे और संकरे देशों में होती है। दुनिया के सबसे प्राचीन मरूस्थल भी चिली में ही हैं। यह दक्षिण अमेरिका के सबसे समृद्ध देशों में से एक है। यह चीन के साथ फ्री ट्रेड डील करने वाला लैटिन अमेरिका का पहला देश भी है।

 

चिली के उत्तर में पेरू और बोलीविया हैं। पूर्वी सीमा अर्जेंटीना से लगती है। एंडीज पर्वतमाला दोनों देशों के बीच सीमा रेखा का निर्धारण करती है। अर्जेंटीना के साथ ही चिली की सबसे लंबी सीमा लगती है। इसकी लंबाई 6,691 किमी है। यह भारत और पाकिस्तान की सीमा से भी लगभग दोगुनी है।

 

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अगर चिली की तटरेखा की बात करें तो यह करीब 6437 किमी लंबी है। मतलब जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी की जो दूरी है, उससे दोगुनी। देश की लगभग 40 फीसद आबादी राजधानी सैंटियागो के आसपास रहती है। उत्तर से दक्षिण तक चिली की लंबाई 4,300 किमी है। अगर औसतन चौड़ाई की बात करें तो यह महज 175 किमी चौड़ा देश है। देश का सबसे चौड़ा बिंदु 445 किमी है।

 

 

धरती का सबसे शुष्क अटाकामा रेगिस्तान भी चिली में है। इस मरुस्थल के कुछ स्थानों में सैकड़ों वर्षों से एक बूंद पानी नहीं गिरा है, लेकिन यह इलाका तांबे के प्रचुर भंडार से भरा है। दुनिया की सबसे बड़ी तांबे की खदान भी चिली में ही है।

चिली की शासन व्यवस्था

चिली की दक्षिण अमेरिका में सबसे स्थिर देशों में होती है। यहां अन्य देशों की तुलना में तख्तापलट जैसी स्थित कम देखने को मिलती है। पूरे महाद्वीप में इसकी अर्थव्यवस्था भी सबसे तेज गति से बढ़ रही है। चिली में प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष होते हैं। अमेरिका की तर्ज पर यहां हर चार साल में चुनाव होते हैं। यहां की संसद में दो सदन होते हैं- कांग्रेस और सीनेट। मंत्रिमंडल का गठन राष्ट्रपति करते हैं।

 

अमेरिका जैसे समृद्ध लोकतांत्रिक देश में आज तक कोई महिला राष्ट्रपति नहीं बनी है। मगर चिली को 2006 में अपनी पहली महिला राष्ट्रपति मिल चुकी है। इनका नाम मिशेल बाचेलेट है। चिली में पहले राष्ट्रपति का कार्यकाल 6 वर्ष का होता था। 2004 में संवैधानिक संशोधन करके इसे 4 वर्ष कर दिया गया। वहीं सीनेटर की आजीवन नियुक्ति पर भी रोक लगा दिया गया।

 

चिली का इतिहास

देश के उत्तरी भाग में 16वीं शताब्दी में स्पेनियों के नियंत्रण से पहले यहां इंका लोगों का शासन था। देश के स्पेनिश उपनिवेश बनने से पहले दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में मूल मापुचे लोग रहते थे।1810 में स्पेन से आजादी मिली। 1800 के दशक के अंत तक कई यूरोपीय लोग चिली में बसने लगे थे। इनमें जर्मन, फ्रांसीसी, ब्रिटिश और इतालवी लोग शामिल थे। चिली बेहद स्थिर और आजाद ख्याल वाला देश होता था, लेकिन 1973 में एक खूनी संघर्ष ने चिली के इतिहास में काला धब्बा लगा दिया। सल्वाडोर अलेंदे की चुनी हुई मार्क्सवादी सरकार को उखाड़ फेंका गया। इसके बाद जनरल ऑगस्टो पिनोशे ने 16 वर्षों तक चिली में तानाशाही सरकार का नेतृत्व किया। 1989 में लोकतंत्र दोबारा बहाल हुआ।

 

 

चिली की 'चलने' वाली रहस्यमयी मूर्तियां

आप ने इंटरनेट पर ऊपर वाली ये तस्वीरें तो जरूर देखी होंगी। यह मूर्तियां चिली के ईस्टर द्वीप पर स्थित हैं। इस द्वीप को रापा नुई नाम से भी जाना जाता है। यहां कुल 887 मूर्तियां हैं। इनमें 15 प्रतिमाएं प्रशांत महासागर की तरफ पीठ किए हुए खड़ी हैं। बिना पैरों वाली इन मूर्तियों का वजन 88 दिन तक होने का अनुमान है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी वजनी मूर्तियां आज से 900 साल पहले यहां कैसे पहुंची। शोधकर्ता आज भी यह पता लगाने की कोशिश में जुटे हैं कि ये मूर्तियां समुद्र तट तक कैसे पहुंचीं? 

 

चिली का खूनी तख्तापलट

दुनिया में पहली बार लोकतांत्रिक तरीके से एक मार्क्सवादी नेता चिली का राष्ट्रपति बना। यह साल था 1970 था। मगर तीन साल बाद 1973 में चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ऑगस्टो पिनोशे ने तख्तापलट कर दिया। राष्ट्रपति एलेन्डे को गद्दी गंवानी पड़ी। तानाशाह जनरल ऑगस्टो पिनोशे का करीब 17 वर्षों तक क्रूर शासन चला। एक अनुमान के मुताबिक उनके शासन में चिली में तीन हजार से ज्यादा लोगों को या तो मारा गया या गायब कर दिया गया।

 

साल 1990 में जनरल पिनोशे ने राष्ट्राध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। उनकी जगह क्रिश्चियन डेमोक्रेट पेट्रीसियो आयल्विन राष्ट्रपति बने। हालांकि सेना की कमान पिनोशे के पास ही रही। 1998 में ब्रिटेन ने पिनोशे को गिरफ्तार किया। साल 2006 में उनकी मौत हो चुकी है।

 

चिली का सबसे विनाशकारी भूकंप

चिली का अधिकांश भूभाग पड़ाहों से घिरा है। यह करीब 36 सक्रिय और कुल तीन हजार ज्वालामुखी है। चिल्ली भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील देश है। हाल ही में यहां सबसे भयानक भूकंप 2010  में आया था। यह भूकंप 27 फरवरी 2010 को दक्षिण-मध्य चिली में आया था। इसकी तीव्रता 8.8 मापी गई थी। भूकंप के बाद करीब 29 मीटर ऊंची लहरों वाली सुनामी ने भारी तबाही मचाई थी। कुल 521 लोगों की जान गई। 30 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ। 46 लोग लापता हो गए। कुल मौतों में से 156 की जान सुनामी की वजह से गई थी।

 

चिली के इतिहास में सबसे विनाशकारी भूकंप 1960 में आया था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 9.5 मापी गई थी। 1600 से अधिक लोगों की जान गई थी। 3000 से लोग घायल हुए थे। 20 लाख लोग एक झटके में बेघर हो गए थे।

 

 पड़ोसियों से विवाद

  • चिली का पड़ोसी देश बोलीविया आज लैंड लॉक्ड देश है। मगर हमेशा ऐसा नहीं था। 1879 से पहले बोलीविया की करीब 400 लंबी तटरेखा थी, लेकिन 1879 से 1884 तक चले प्रशांत युद्ध में बोलिविया को अपनी तटरेखा से जुड़ी करीब 1,20,000 वर्ग किलोमीटर जमीन खोना पड़ा।

 

  • आज यह देश चारों तरफ से जमीन से घिरा है। बोलीविया चाहता है कि उसे प्रशांत महासागर तक पहुंच मिले। इसी वजह से उसने 2013 में चिली के खिलाफ हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा भी दायर किया है। हालांकि 2018 में न्यायालय ने चिली के पक्ष में फैसला सुनाया।

 

  • समुद्री क्षेत्र के मुद्दे पर पेरू और चिली के बीच भी विवाद है। दोनों देशों के बीच यह विवाद वर्षों से बना है। साल 2008 में पेरू ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चिली के खिलाफ मामला फाइल किया।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा केंद्र था चिली

वर्तमान में अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर के बीच व्यापार का सबसे अहम मार्ग पनामा नहर है। मगर आपने कभी सोचा कि नहर के बनने से पहले व्यापार कैसे होता था? दरअसल, नहर के बनने से पहले प्रशांत महासागर से जहाज अटलांटिक और यूरोप तक जाने से पहले चिल्ली के केप हॉर्न का चक्कर लगाते थे। यहां ठहरने के बाद जहाज अटलांटिक और यूरोप की तरफ बढ़ते थे। मतलब यह है कि एक समय चिली का केप हॉर्न एक अहम व्यापारिक मार्ग का हिस्सा था। लेकिन 1914 में पनाना नहर के बाद इसका महत्व घट गया। 

 

चिली की अर्थव्यवस्था

अगर चिली की अर्थव्यवस्था की बात करें तो ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी ही आय का सबसे अहम जरिया है। धान, अंगूर, आलू, सेब, चुकंदर और सूरजमुखी की खेती प्रमुखता से होती है। इसके अलावा सूअर, मुर्गी और भेड़ पालन बेहद आम है। चिली आज दुनिया में तांबा और लिथियम का बड़ा केंद्र है। उसकी नोमिनल जीडीपी 407 अरब अमेरिकी डॉलर है। चिली की गिनती लैटिन अमेरिका में सबसे अधिक प्रतिव्यक्ति वाले देशों में होती है। जीडीपी का लगभग 56 फीसद हिस्सा तांबा, लिथियम, आयोडीन और सर्विस सेक्टर से आता है। जीडीपी रैंकिंग में चिला का 44वां स्थान है।

 

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चिली पर स्पेन ने कैसे किया कब्जा?

1536-37 में स्पेनिश सेनाओं ने चिली पर हमला किया। इस हमले की अगुवाई डिएगो डी अल्माग्रो और उसके सहयोगियों ने किया। बाद में दूसरे प्रतिद्वंद्वी गुट ने हमला किया। इन्हें उम्मीद थी कि पेरू की तरह ही चिली में सोना और उन्नत सभ्यता मिलेगी। मगर निराशा हाथ लगने पर वापस चले गए।  

 

अल्माग्रो की मौत के बाद पेड्रो डी वाल्दिविया ने चिली पर नियंत्रण करने का अभियान चलाया। वह अपने प्रेमिका इनेस सुआरेज समेत 150 लोगों के साथ 1540 में चिली में दाखिल हुआ और 12 फरवरी 1541 को सैंटियागो की स्थापना की। वाल्दिया की सेना ने दक्षिणी चिली पर कब्जा करने का अभियान शुरू किया, लेकिन उसे मापुचे आदिवासियों से वर्षों तक प्रतिशोध का सामना करना पड़ा। 1553 में विद्रोहियों ने वाल्दिविया को पकड़ लिया और मौत के घाट उतार दिया। हालांकि धीरे-धीरे चिली के एक बड़े भूभाग पर स्पेन का कब्जा हो गया था। हालांकि 1810 में चिली को उपनिवेश से आजादी मिल गई।  

 

भारत के लिए क्यों अहम है चिली?

चिली लिथियम ट्रायंगल का हिस्सा है। दरअसल, एंडीज पर्वमाला के आसपास के क्षेत्र में लिथियम के विशाल भंडार है। यह भंडार चिली के अलावा अर्जेंटीना और बोलीविया तक फैले हैं। इस लिहाज से चिली का अपना रणनीतिक महत्व है। भारत ईवी सेक्टर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। लिथियम का इस्तेमाल बैटरी बनाने में किया जाता है। इस लिहाज से चिली भारत के विकास में एक अहम सहयोगी साबित हो सकता है। दूसरी तरफ चिली भी चाहता है कि भारत उसके खनन क्षेत्र में निवेश करे। पिछले साल चिली की राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिच फोंत ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात भी की थी। दोनों देशों के बीच बहुमूल्य खनिजों के खनन और उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग स्थापित करने पर सहमति बनी है।