ईरान मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप को कुछ सूझ नहीं रहा है। ताकत, आर्थिक प्रतिबंध, समुद्री नाकेबंदी... सबकुछ करके देख लिया है। अब उन्हें एक बार भी जन विद्रोह की याद आई है। अमेरिका के अलावा इजरायल में भी यही आम धारणा है कि जन विद्रोह से ही ईरान में तख्तापलट किया जा सकता है। बिना तख्तापलट के इजरायल अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकता है। पिछले दिसंबर-जनवरी में ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों को जो धोखा दिया, उससे ईरान की जनता बेहद सतर्क है।
ट्रंप की मंशा है कि ईरान की जनता अपनी ही सरकार के खिलाफ लड़कों पर उतार आए। ठीक वैसे ही जैसे पिछले साल दिसंबर में उतरी थी। पिछले साल दिसंबर में ईरान में महंगाई के खिलाफ जनता सड़कों पर उतरी थी। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 10 विश्वविद्यालयों से हुई थी। कई हफ्तों तक हिंसक विरोध प्रदर्शन का दौर जारी रहा। ईरान की सरकार ने व्यापक स्तर पर दमन का सहारा लिया। पश्चिमी देशों के मुताबिक दमनकारी कार्रवाई में 30 हजार से अधिक नागरिकों की जान गई। हालांकि ईरान की सरकार ने 3117 लोगों की मौत को स्वीकार किया।
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ट्रंप पर ईरानियों को भरोसा क्यों नहीं?
जनवरी महीने में डोनाल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर ईरान के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। बेजामिन नेतन्याहू ने भी सरकार उखाड़ फेंकने की अपील की। नया मोड़ उस वक्त आया जब ईरान के अर्धसैनिक बलों ने 13 जनवरी को सबसे हिंसक कार्रवाई शुरू की। तब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा था, 'अपनी संस्थाओं पर कब्जा कर लो। मदद आ रही है।'
दुनियाभर में आशंका जताई जाने लगी कि अमेरिका किसी भी वक्त हमला कर सकता है, लेकिन हुआ इसके उलट। ईरान के प्रदर्शनकारियों को अमेरिका से कोई मदद नहीं मिली। ईरान की सरकार ने भी अपना नियंत्रण बढ़ा दिया। हजारों को मौत के घाट उतारने के बाद लगातार प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जाने लगा। उसे फांसी पर लटकाया जाने लगा।
ईरान में जन विद्रोह इतना आसान क्यों नहीं?
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान पर हमला किया तो सरकारी विरोधी भावना सीधे देशभक्ति में बदल गई। नतीजा यह हुआ कि ट्रंप के बार-बार कहने के बावजूद ईरान की जनता दोबारा सड़कों पर नहीं उतरी। यही कारण है कि ट्रंप भी मान गए हैं कि ईरान में जन विद्रोह बेहद मुश्किल है। बुधवार को उन्होंने कहा, वहां प्रदर्शनकारियों को गोली मार दी जाती है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा कि ईरान की जनता कब विद्रोह करेगी? इस पर ईरान के लोगों ने ट्रंप को उनकी ही भाषा में जवाब दिया। ईरान लोगों ने कहा, 'इस बार अगर आप लड़ेंगे तो मदद जरूर आएगी।' इसी साल जनवरी में ट्रंप ने ठीक ऐसा ही बयान दिया था। ईरान की जनता को प्रदर्शन करने पर कार्रवाई का डर सता रहा है। उन्हें इस बात का भी भरोसा नहीं है कि अमेरिका क्या सच में मदद करेगा?
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हम शासन उखाड़ फेंकने के करीब है: नेतन्याहू
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरान में सत्ता परिवर्तन को इजरायल का केंद्रीय मिशन बताया। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन को उखाड़ फेंकना इजरायल का मुख्य मिशन है। यह लक्ष्य पहुंच में है। दावा किया कि ईरान का शासन अब लड़खड़ा रहा है और पहले से बेहद कमजोर हो गया है। यह भी कहा कि वह अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहा है।
नेतन्याहू ने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि हम इस खतरे को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे, दूसरे शब्दों में इस शासन को उखाड़ फेंकेंगे। यही हमारा मुख्य लक्ष्य है, लेकिन हम इसके करीब हैं। यह असंभव नहीं है। यह हमारी पहुंच में है।'
