पिछले हफ्ते स्ट्रेलियाई संघीय पुलिस की आयुक्त क्रिसी बैरेट ने आगाह किया था कि बच्चों की मदद के मामले में एआई पर आधारित चैटबॉट इंसानों की जगह नहीं ले सकते हैं। उनकी यह टिप्पणी एडिलेड विश्वविद्यालय के एक हालिया अध्ययन के बाद आई जिसमें पाया गया कि ऑनलाइन यौन उत्पीड़न का शिकार होने पर ऑस्ट्रेलिया के तीन में से एक से अधिक बच्चे मदद के लिए एआई चैटबॉट का सहारा लेते हैं, जबकि कुछ बच्चे इस बारे में किसी को कुछ भी नहीं बताते।

 

बच्चों के लिए एआई का इस्तेमाल कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है। मसलन, इससे उन्हें पढ़ाई में मदद मिल सकती है और दूसरों से बातचीत करने के कौशल को बेहतर बनाने का अभ्यास करने का मौका मिल

सकता है। लेकिन इसके साथ एक जोखिम भी है। बच्चे भावनात्मक सहारे के लिए माता-पिता या दूसरे भरोसेमंद  लोगों के बजाय एआई चैटबॉट और डिजिटल सहायकों पर निर्भर होने लग सकते हैं।

 

यह भी पढ़ें: नवरात्रि में नहीं खरीदनी पड़ेगी गरबा ड्रेस, पुरानी साड़ी से बनाएं डिजाइनर लहंगा

बच्चे AI चैटबॉट का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?

ऑस्ट्रेलिया में एआई का इस्तेमाल करने वाले 10 से 17 वर्ष की उम्र के लगभग आधे बच्चे इसका उपयोग व्यक्तिगत और सामाजिक जरूरतों के लिए कर रहे हैं। इनमें संवेदनशील विषयों पर सलाह लेना, अपनी भावनाओं के बारे में बात करना और यूं ही बातचीत में समय बिताना शामिल है। ऐसे में सवाल उठता है कि माता-पिता अपने बच्चों को एआई का सुरक्षित इस्तेमाल करना कैसे सिखा सकते हैं?

इसका एक व्यावहारिक कारण यह है कि एआई चैटबॉट चौबीसों घंटे सवालों के जवाब दे सकते हैं। ऐसे में जब किसी बच्चे को तुरंत कोई जानकारी चाहिए और उस समय माता-पिता, कोई भरोसेमंद वयस्क या दोस्त उपलब्ध नहीं होता, तो वह स्वाभाविक रूप से चैटबॉट की मदद ले सकता है। दूसरा कारण जिज्ञासा है। वयस्कों की तरह बच्चे और किशोर भी एआई को आजमा रहे हैं। वे समझना चाहते हैं कि यह प्रौद्योगिकी कैसे काम करती है और किस तरह उनके जीवन को बेहतर बना सकती है।

 

गहरे भावनात्मक जुड़ाव की तलाश। हालांकि, कुछ मामलों में बच्चों के एआई चैटबॉट से बात करने के पीछे कहीं गहरी वजहें होती हैं। हो सकता है कि कोई बच्चा किसी ऐसी बात के बारे में जानकारी चाहता हो, जिसे लेकर वह अपने माता-पिता या दोस्तों से बात करने में झिझकता हो। किशोरावस्था में बच्चे अपनी पहचान और व्यक्तित्व को समझने की कोशिश करते हैं। इस दौरान उनके मन में अधिक संवेदनशील सवाल उठने लगते हैं। यही वजह है कि छोटे बच्चों की तुलना में किशोर व्यक्तिगत मामलों पर एआई से बातचीत करने की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं।

कुछ बच्चों के लिए इसकी वजह भावनात्मक जुड़ाव की कमी भी हो सकती है। जो बच्चे पहले से ही किसी तरह की परेशानी या असुरक्षा का सामना कर रहे होते हैं, उनके व्यक्तिगत मामलों में चैटबॉट का सहारा लेने की आशंका अधिक होती है।

अकेलेपन की वजह से साथी बना AI चैटबॉट

डेनमार्क में 2025 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि अकेलापन हाई स्कूल के विद्यार्थियों में एआई को साथी बनाने की इच्छा का एक शुरुआती कारण हो सकता है। कुछ अन्य अध्ययनों से भी संकेत मिलता है कि माता-पिता या अभिभावकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव की कमी किशोरों को चैटबॉट से बातचीत करने की ओर ले जा सकती है।

 

यह भी पढ़ें: पैर में बीपी की मशीन लगाकर क्या पता कर सकते हैं हार्ट ब्लॉकेज? डॉक्टर से जानिए

लोगों के बजाय चैटबॉट चुनने से बच्चे क्या खो देते हैं?

सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर बच्चे एआई का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने लगें, तो वास्तविक जीवन में लोगों से उनकी बातचीत कम हो सकती है। इससे मानवीय रिश्तों को लेकर उनकी अपेक्षाएं भी अवास्तविक हो सकती हैं। इस समस्या का एक संबंध एआई की उस प्रवृत्ति से है, जिसमें वह उपयोगकर्ता की बातों से जरूरत से ज्यादा सहमति जताता है और उसकी राय को चुनौती देने से बचता है। इंसानी रिश्तों में स्वाभाविक रूप से मतभेद होते हैं। लोग हमेशा एक-दूसरे की बात से सहमत नहीं होते, कभी असहज सवाल पूछते हैं और कभी किसी की राय को चुनौती भी देते हैं।

 

एआई के साथ बातचीत में इस तरह की स्वाभाविक खींचतान अक्सर नहीं होती। इससे बच्चों के सामाजिक अनुभव की समझ प्रभावित हो सकती है। यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बच्चे और किशोर अभी यह सीख ही रहे होते हैं कि रिश्ते कैसे बनते हैं और उन्हें कैसे निभाया जाता है। शोध से पता चलता है कि किशोरों के विकास के लिए असल जीवन में लोगों के साथ बातचीत करना बेहद जरूरी है।

 

एआई के पास पूरी जानकारी नहीं होती। एक दूसरी चिंता एआई की ओर से दी जाने वाली सलाह की गुणवत्ता को लेकर है। समस्या केवल यह नहीं है कि एआई भरोसेमंद लगने वाली गलत जानकारी दे सकता है, बल्कि यह भी है कि उसे बच्चे के जीवन की पूरी परिस्थितियों का पता नहीं होता। इसके विपरीत, माता-पिता और देखभाल करने वाले लोग बच्चे की परिस्थितियों, उसकी उम्र और जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इसलिए वे उसके लिए अधिक संवेदनशील, उपयुक्त और परिस्थितियों के अनुरूप सलाह दे सकते हैं।

 

इसके कुछ ऐसे प्रभाव भी होते हैं, जिन पर आसानी से ध्यान नहीं जाता। जब कोई बच्चा माता-पिता से बात करने के बजाय अपने सवाल एआई चैटबॉट से पूछता है, तो वह परिवार के साथ रोजमर्रा के छोटे-छोटे संवाद और भावनात्मक जुड़ाव के अवसर खो सकता है। हर बार छूटा हुआ ऐसा मौका भले ही मामूली लगे, लेकिन समय के साथ इनका असर महत्वपूर्ण हो सकता है।

 

बच्चों के मामले में यह बात विशेष रूप से मायने रखती है। शोध बताते हैं कि किशोरावस्था से पहले के सालों में माता-पिता के साथ मजबूत और सुरक्षित भावनात्मक रिश्ता बच्चों को किशोरावस्था की चुनौतियों का सामना करने में मदद करता है। तो माता-पिता और अभिभावक बच्चों को एआई आजमाने का मौका देते हुए उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं?

 

यह भी पढ़ें: दिल्ली की इन जगहों पर फ्री में मिलेगी गरबा और डांडिया नाइट्स पर एंट्री

पेरेंट्स बच्चे को सुरक्षित कैसे रखें?

1. बच्चे के साथ मिलकर एआई को समझें- बच्चे के साथ कुछ समय निकालकर अलग-अलग एआई टूल को आजमाएं। आप कई तरह की गतिविधियां कर सकते हैं। किसी विषय पर नए विचार सोचने के लिए एआई की मदद लें। जांचें कि चैटबॉट किसी जानकारी का सही स्रोत बता सकता है या नहीं। एआई से उसके बारे में सवाल पूछें, जैसे, क्या तुम्हारे अंदर भावनाएं हैं? और क्या तुम सोच सकते हो?

 

बच्चे को मुख्य पात्र बनाकर एआई से एक छोटी कहानी लिखवाएं और फिर उसमें बदलाव करने को कहें। एआई से कोई चुटकुला सुनाने को कहें। चैटबॉट के साथ ‘बीस सवाल’ जैसा खेल खेलें, जिसमें सवालों के जरिए किसी चीज का पता लगाया जाता है।

 

2. बच्चे से सवाल पूछें- बच्चे के साथ एआई टूल और उनकी खूबियों को आजमाते समय ऐसे सवाल पूछें, जिनसे वह इस प्रौद्योगिकी के बारे में गंभीरता से सोच सके। उदाहरण के लिए तुम्हें क्या लगता है कि एआई कौन-से काम अच्छी तरह कर सकता है? ऐसे कौन-से काम हैं, जिन्हें इंसान कर सकते हैं, लेकिन एआई नहीं? तुम्हारे हिसाब से एआई को जानकारी कहां से मिलती है? एआई कितनी बार गलत हो सकता है? उसकी जानकारी की जांच कैसे की जा सकती है? तुम्हें क्या लगता है कि एआई चैटबॉट तुम्हारी दी हुई जानकारी का क्या करता है?

 

3. बच्चे को भरोसा दिलाएं कि आप उसकी मदद के लिए मौजूद हैं- बच्चे को प्रोत्साहित करना जरूरी है कि वह मुश्किल या संवेदनशील विषयों पर एआई के बजाय आपसे सलाह ले। इसके लिए जरूरी है कि जब भी बच्चा कोई संवेदनशील बात उठाए, तो आप जिज्ञासा और खुले मन से उसकी बात सुनें। शोध बताते हैं कि जिन किशोरों को लगता है कि उनके माता-पिता उनकी बात को स्वीकार करते हैं और उन्हें समझने की कोशिश करते हैं, वे उनसे अधिक बातें साझा करते हैं। सलाह देने या अपनी राय जाहिर करने की जल्दबाजी करने के बजाय पहले बच्चे की बात ध्यान से सुनने के लिए समय निकालें।