इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील इन दिनों जजों से नाराज हैं। वकीलों की एक मांग है कि जस्टिस अजय भनोट इलाहाबाद हाई कोर्ट में नहीं रहेंगे। वकील उन पर एक साथी वकील के साथ अभद्रता का आरोप लगा रहे हैं। वकीलों का कहना है कि एक IPS अधिकारी के लिए वकील से ही जस्टिस अजय भनोट माफी मंगवाने लगे। यह अदालत में वकीलों की गरिमा का अपमान है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने एक आदेश में कहा है प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने दूसरे वकीलों को उनके कोर्ट रूम में नहीं घुसने दिया। कोर्ट रूम का गेट बाहर से बंद कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में कह चुका है कि किसी वकील को अदालत में जाने से रोकना कोर्ट की अवमानना है। जस्टिस देशवाल को आज कई मामलों की सुनवाई टालनी पड़ी, क्योंकि उन्हें बताया गया कि वकील कोर्ट रूम में नहीं पहुंच पा रहे हैं।
इलाहाबाद में वकीलों की नाराजगी की वजह से यूपी के कोने-कोने से आए मुवक्किलों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अदालती कार्रवाही बाधित होने की वजह से उनके मुकदमे खिंच रहे हैं। वकीलों का कहना है कि अगर अदालत में जज ही वकीलों से बदसलूकी करने लगेंगे तो कोर्ट चलाने के लिए वकील क्यों तैयार हों, जज अपने रवैया सुधारें।
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कैसे जज के खिलाफ ही भड़क गए वकील?
विवाद जस्टिस अजय भनोट की अदालत में हुआ। आरोप है कि एक वकील ने पुलिस अधीक्षक (SP) को वकीलों के लिए आमतौर पर तय सीट पर बैठे देखकर आपत्ति जताई। उन्होंने अधिकारी से थोड़ा पीछे बैठने को कहा था। अधिकारी पीछे चले गए थे। वहां बैठे सरकारी वकील ने कहा कि यह जज जस्टिस भनोट ने अधिकारियों के बैठने के लिए तय की है।
वकीलों को इसकी जानकारी नहीं थी। इस पर जस्टिस अजय भनोट ने उस वकील से खराब लहजे में बात किया और माफी मंगवाई। उन्होंने वकील के सामने शर्त रख दी कि या तो जेल जाइए या तो माफी मांगिए।
बार एसोसिएशन ने भी कहा है कि जस्टिस भनोट के कोर्ट रूम में पुलिस अफसरों और दूसरे बड़े अधिकारियों के लिए अलग कुर्सी रखी जा रही थी। ऐसा तब हो रहा है, जब वह जगह, वकीलों के लिए आरक्षित थी। बार एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि जज ने वकील को जेल भेजने की धमकी दी और एक वरिष्ठ अधिवक्ता का मजाक उड़ाया।
बार एसोशिएशन की जिद क्या है?
बार एसोसिएशन के एक सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अगर कार्रवाई न हुई तो बार काउंसिल जस्टिस अजय भनोट की अदालत का बहिष्कार करेंगे। बहिष्कार का कोई औपचारिक अपील नहीं हुआ है लेकिन वकील नहीं जा रहे हैं। बुधवार को वकीलों ने कोर्ट नंबर 49 में तोड़फोड़ की थी, यहं जस्टिस भनोट सुनवाई कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने कमरे में रखा फर्नीचर और दूसरा सामान तोड़ दिया। जिस सरकारी वकील ने शिकायत की थी, उनके साथ भी हाथापाई हुई। जस्टिस अजय भनोट को वहां से हटना पड़ा।
जस्टिस देशवाल उस समय एक जमानत मामले की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने वकीलों की नारेबाजी सुनी। उन्होंने बुधवार को रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) से कोर्ट रूम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज जांचने और इसमें शामिल वकीलों की पहचान करने को कहा था। कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि ऐसे वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
बार एसोशिएशन का आधिकारिक पक्ष क्या है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने 27 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा। पत्र में कहा गया है, 'जस्टिस अजय भनोट की अदालत में एक घटना हुई। जज ने पुलिस अधिकारी या बड़े अधिकारी के लिए अगली पंक्ति में अलग कुर्सी रखने का नियम बनाया था। एक पुलिस अधीक्षक सरकारी वकील के पीछे बैठे थे। एक अधिवक्ता ने उनसे विनम्रता से पीछे बैठने को कहा। इस पर सरकारी वकील ने अधिवक्ता को डांटा और जज के आने पर शिकायत कर दी। जज ने अधिवक्ता की तरफ उंगली उठाकर जेल भेजने की धमकी दी। अधिवक्ता ने माफी मांगी तो जज ने पुलिस अधीक्षक से माफी मांगने को कहा। अधिवक्ता ने माफी मांग ली, लेकिन बार का आरोप है कि जज ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया। जज ने उसी अदालत में बैठे वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव का भी मजाक उड़ाया।'
बार एसोसिएशन का कहना है कि इस व्यवहार से अधिवक्ताओं की गरिमा को ठेस पहुंची है और यह अवमानना की श्रेणी में आता है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से उचित कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वे जस्टिस अजय भनोट की अदालत का बहिष्कार करेंगे। बार ने अदालत में किसी खास व्यक्ति के लिए अलग कुर्सी रखने की नई व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई है। पत्र में कहा गया है कि अगर अदालत अधिवक्ता का अपमान कर सकती है तो अधिवक्ता भी अदालत का अपमान करने से नहीं हिचकेगा। पत्र पर बार के नए अध्यक्ष डॉ. सीपी. उपाध्याय और महासचिव संतोष कुमार मिश्र के हस्ताक्षर हैं।
बार एसोसिएशन की मदद मांग रहे जज?
जस्टिस देशवाल ने एक आदेश में कहा है कि हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले ज्यादातर वकील बहुत ईमानदार और अच्छे व्यवहार वाले हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि बार एसोसिएशन के किसी आह्वान के बिना भी खुद को वकील बताने वाले कुछ लोग बेवजह अधिवक्ताओं को कोर्ट में जाने से रोक रहे थे। कोर्ट ने नवनिर्वाचित बार एसोसिएशन से इस मामले को देखने का अनुरोध किया ताकि बार और बेंच की गरिमा बनी रहे।
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अजय भनोट को लेकर गुस्सा क्यों?
खबरगांव से नाम न बताने की शर्त पर कई वकीलों ने कहा कि जस्टिस अजय भनोट का रवैया वकीलों के लिए बेहद खराब है। वह अदालत में वकीलों से ही 'तुम-तड़ाक' से बात करते हैं, अभद्र व्यवहार करते हैं। बार के सामने वकील अपनी शिकायतें मौखिक तौर पर रखते रहे हैं। कुछ मामलों में वकीलों ने आरोप लगाया है कि उनके मामले सही से सुने जाते। अब वकीलों ने साफ कहा है कि अजय भनोट की अदालत का वे बहिष्कार करेंगे कोई सुनवाई नहीं होने दी जाएगी।
जस्टिस अजय भनोट पर कुछ जूनियर वकीलों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ यह तक पूछ लेते हैं, 'कहां से पढ़े हो, कहां से पढ़के आए हो।' ऐसे सवाल, अदालत में जूनियर को कानून के पेशे के प्रति हतोत्साहित करते हैं। एक वर्ग का यह भी कहना है कि इसके पीछे उनकी मंशा खराब नहीं होती बल्कि वह समझाना चाहते हैं।
बुधवार को भी वकीलों ने कोर्ट नंबर 61 का बहिष्कार किया था। कुछ वकीलों ने कहा कि वह कोर्ट नंबर 40 में बैठे लेकिन वहां भी वकीलों ने विरोध किया, जिसके बाद वह चले गए। वकील बेहद नाराज हैं और उनका कहना है कि हाई कोर्ट की इस बेंच में उन्हें नहीं बैठने दिया जाएगा।
लखनऊ बेंच जा सकते हैं जस्टिस अजय भनोट
सूत्रों के मुताबिक जस्टिस अजय भनोट को इलाहाबाद में हो रहे विरोध के बाद लखनऊ बेंच जा सकते हैं। कई सीनियर वकीलों ने कहा है कि उनकी अदालत चलने नहीं दी जाएगी। वकीलों के गुस्से और प्रदर्शन के बीच बार और बेंच में सहमति बननी अभी मुश्किल है। हो सकता है कि जस्टिस भनोट को अगले कुछ दिनों तक लखनऊ बेंच भेजा जाए।
वकीलों के गुस्से पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख क्या है?
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने इसे लेकर नाराजगी जाहिर की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 28 अक्टूबर 2026 को जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत में देवेंद्र कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य की जमानत याचिका की सुनवाई हो रही थी। सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने कोर्ट नंबर 66 के बाहर गलियारे में हंगामा किया, अदालत की कार्यवाही प्रभावित हुई। कोर्ट नंबर 49 के बाहर वकील हंगामा कर रहे थे।
कोर्ट का कहना है कि यह व्यवहार अदालत की कार्यवाही में दखलअंदाजी है। गरीब मुकदमेबाज न्याय के लिए आते हैं। कुछ वकीलों की किसी कोर्ट से समस्या है लेकिन वे दूसरी अदालतों की कार्यवाही में हंगामा नहीं कर सकते हैं। कोर्ट का कहना है कि यह अवमाननना है।
अदालत ने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को निर्देश दिया कि कोर्ट नंबर 66 के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज से घटना में शामिल वकीलों की पहचान कर अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश करें। पहचान के बाद मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए और अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए भेजा जा सकता है। रजिस्ट्रार (कंप्लायंस) को आदेश की प्रति रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को भेजने को कहा गया है।
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कौन हैं जस्टिस अजय भनोट?
अजय भनोट का जन्म 4 अगस्त 1969 को हुआ था। उन्होंने 1994 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। 15 जनवरी 1995 को उन्होंने वकील के तौर पर खुद को नामांकित कराया। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में सिविल, संवैधानिक, टैक्स, सेवा, कंपनी और आपराधिक मामलों के साथ पर्यावरण और औद्योगिक विवादों पर भी काम किया।
वह भारत सरकार के वकील, उत्तर प्रदेश सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल और एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का भी प्रतिनधित्व किया है। 23 मई 2015 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया था।
22 सितंबर 2017 को उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया। 6 सितंबर 2019 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वह अभी इलाहाबाद हाई कोर्ट में पोस्टेड हैं। 3 अगस्त 2031 में वह अपने पद से रिटायर होंगे।
