ब्रिक्स सम्मेलन से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक वार्ता चली। भारत और रूस के बीच मजबूत रक्षा सहयोग को और ज्यादा विस्तार देने पर भी बातचीत हुई। इसके अलावा साल 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर अमेरिकी डॉलर तक ले जाने पर भी चर्चा हुई। आइये समझते हैं मोदी-पुतिन मुलाकात की पांच बड़ी बातें...
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- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गले लगाकर व्लादिमीर पुतिन का स्वागत किया। उन्होंने तमिल कविता पर लिखी किताब तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। इस किताब को तमिल तमिल कवि तिरुवल्लुवर ने लिखी है। दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और मजबूत करने पर फोकस किया। पीएम मोदी और पुतिन दोनों देशों के बीच 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को और मजबूत करने की दिशा में काम करते रहने पर सहमत जताई।
- पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे हैं। वह तीन दिनों तक दिल्ली में रहेंगे। अभी तक दोनों देशों के बीच हुई बातचीत का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है, लेकिन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव के बयान से काफी कुछ झलकता है। उनके मुताबिक भारत और रूस ब्रह्मोस मिसाइल को अपग्रेड करने पर विचार कर रहे हैं।
- विदेश मंत्रालय के मुताबिक राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री ने यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया। अभी तक सम्मेलन की तारीख तय नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि राजनयिक माध्यमों से आपसी सुविधा के आधार पर तारीखों को तय किया जाएगा।
- बैठक में दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। इसके अलावा नेताओं ने बहुपक्षीय मंचों पर भारत-रूस संबंध विशेष तौर पर भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के भीतर सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
- दोनों नेताओं ने आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी भी चर्चा की। इसमें पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में संघर्ष पर विचार विमर्श किया। हाल ही में इन क्षेत्रों में समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा खतरे में पड़ी थी। पीएम मोदी ने एक बार फिर दोहराया कि बातचीत और कूटनीति ही संघर्षों को सुलझाने का सही रास्ता है और भारत शांति प्रयासों में मदद के लिए तैयार है।
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क्या सुखोई- 57 खरीदेगा भारत?
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव के मुताबिक ब्रह्मोस मिसाइल को अपग्रेड करने पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति पर भी चर्चा चल रही है। दोनों देशों के बीच नए असैन्य परमाणु रिएक्टर स्थापित करने पर भी विचार चल रहा है। बता दें कि पीएम मोदी और पुतिन की एक साल के भीतर दूसरी मुलाकात है। पिछले हफ्ते किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मलेन में दोनों नेताओं ने मुलाकात की थी।
