मणिपुर में जारी हिंसा तीन साल से ज्यादा के बाद भी नहीं रूक रही है। इसको लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की जंगलों में युद्ध जैसे अभियानों के लिए बने कोबरा यूनिट की दो बटालियन को मणिपुर में तैनात करने का निर्णय लिया गया है।

 

मणिपुर में मेइती और कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में मई 2023 से 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। राज्य प्रशासन और केंद्र सरकार राज्य में स्थायी शांति बहाल करने की कोशिशें कर रहे हैं, मगर अभी तक कामयाबी नहीं मिल पाई है।

 

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बंगाल और असम से भेजी जाएगी यूनिट

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ की दो कोबरा बटालियन- पश्चिम बंगाल स्थित 207वीं बटालियन और असम स्थित 210वीं बटालियन की मणिपुर में अभियानगत कार्यों के लिए तैनाती के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, 'कोबरा की ये दोनों बटालियन मणिपुर में हिंसा में शामिल सशस्त्र समूहों के खिलाफ विशेष अभियान चलाएंगी।'

कोबरा का गठन क्यों हुआ?

उन्होंने कहा कि ये दोनों यूनिट अगले कुछ हफ्ते में ममिपुर पहुंचेंगी। पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में उग्रवाद के अलावा कई भारतीय राज्यों में व्याप्त वामपंथी उग्रवाद के खतरे से निपटने के लिए सीआरपीएफ ने 2008-09 में ‘कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन’ (कोबरा) का गठन किया था। कोबरा की फिलहाल कुल 10 बटालियन हैं और वे ज्यादातर नक्सल-रोधी अभियानों में तैनात हैं। कोबरा की प्रत्येक बटालियन में करीब 1,000 कमांडो होते हैं।

 

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गृह मंत्रालय ने इस बटालियन के कमांडो को नक्सलियों के खिलाफ खुफिया जानकारी आधारित जंगल युद्ध और गुरिल्ला रणनीति वाले सफल अभियान चलाने का श्रेय दिया है। मंत्रालय के अनुसार, इन अभियानों से इस वर्ष मार्च में देश में माओवादी हिंसा का अंत हुआ। 

 

अधिकारियों ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में अभियान अब छिपे आईईडी का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने तथा क्षेत्र की सामान्य सुरक्षा तक मुख्य रूप से सीमित रह गए हैं तथा ऐसे में सीआरपीएफ ने कोबरा की दो इकाइयों को मणिपुर भेजने की योजना बनाई, जहां पूर्ण शांति बहाल करने का काम अभी जारी है।