असम सरकार में मंत्री केशव महंत, भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थकों के निशाने पर हैं। उनकी बेटी दिबिशा महंत ने NEET पेपर लीक केस में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का विरोध किया था और प्रदर्शनकारियों के साथ नजर भी आई थी। लोगों ने तंज किया कि बीजेपी के बच्चे भी बीजेपी की नीतियों से परेशान हैं, अपनों को संभाल नहीं पा रहे हैं, दूसरों पर अपनी विचारधारा थोपते हैं। ट्रोलिंग के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने कैबिनेट सहयोगी केशव महंत का समर्थन किया है। 


केशव महंत की बेटी ने NEET परीक्षा में हुई अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया था। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। केशव महंत को खूब ट्रोलिंग झेलनी पड़ी और सरकार की साख पर भी सवाल उठे। मुख्यमंत्री सरमा ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बच्चों को उनके माता-पिता की राजनीतिक विचारधारा के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। 

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हिमंता बिस्व सरमा , मुख्यमंत्री, असम:-
मेरा भाई मेरी बात नहीं मानता। मेरे बच्चे भी मेरी कई बातें नहीं मानते। जरूरी नहीं कि आपकी राजनीतिक सोच आपके माता-पिता जैसी ही हो। PM मोदी के बारे में उसने जो कहा, उससे मुझे दुख हुआ है। जब मैं उससे मिलूंगा तो बात करूंगा। 


हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी ही मिसाल दी और कहा कि उनके भाई उनकी नहीं सुनते और उनके बच्चे भी उनकी हर बात नहीं मानते। उन्होंने कहा कि विचारधारा को इस नजरिए से नहीं देखना चाहिए। एक ही परिवार के लोगों की सोच अलग-अलग हो सकती है। इसमें कुछ गलत नहीं है।

हिमंत बिस्व सरमा, मुख्यमंत्री, असम:-
राजनीतिक विचारधारा माता-पिता जैसी हो, यह जरूरी नहीं है। केशव महंत की बेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो बात कही, उससे दुख हुआ है। जब उनसे मुलाकात होगी तो इस बारे में बात करेंगे।

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'बच्चों की बात पर अभिभावकों न घसीटें'

हिमंत बिस्व सरमा ने कहा, 'बच्चों के काम के लिए माता-पिता को विवाद में नहीं घसीटना चाहिए। केशव महंत अभी बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद करने में व्यस्त हैं। ऐसे में उन्हें मानसिक रूप से परेशान नहीं करना चाहिए।'

हिमंता बिस्व सरमा, मुख्यमंत्री, असम:-
केशव महंता अभी ऐसी स्थिति में हैं कि राज्य में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद करना उनका फर्ज है। अगर हम उन पर मानसिक दबाव डालेंगे तो इससे हमें कोई फायदा नहीं होगा। अगर मेरा बेटा कुछ गलत कहता है तो हैरान न हों। हो सकता है कि कल मेरा बेटा वकील बन जाए और किसी ऐसे व्यक्ति के लिए काम करे जिसे मैं पसंद नहीं करता। बच्चों के बड़े होने के बाद माता-पिता को इसमें घसीटने का कोई मतलब नहीं है।

'बच्चे के काम पर मां-बाप जिम्मेदार नहीं'

हिमंत बिस्व सरमा ने कहा, 'कल को अगर मेरा बेटा वकील बनकर किसी ऐसे व्यक्ति के लिए काम करे जिसे मैं पसंद नहीं करता तो इसका मतलब यह नहीं कि मुझे विवाद में घसीटा जाए। जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो माता-पिता को उनके हर फैसले के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जाना चाहिए।'

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'यह उनका व्यक्तिगत फैसला था। उन्होंने असम के लिए बहुत काम किया, खासकर असम में IIM खोलने में मदद की। नई शिक्षा नीति लागू करने में उनका बड़ा योगदान रहा है। इतिहास उन्हें इसी बात के लिए याद रखेगा और सकारात्मक रूप से आंकेंगे।'

'देश के लिए धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा'

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा, 'विरोध प्रदर्शनों को देश विरोधी ताकतें न इस्तेमाल कर सकें, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों के हित में इस्तीफा दिया।

क्या है पूरा मामला?

4 जून से ही जंतर मंतर पर NEET पेपरलीक केस में धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठ गए। पूरे देश के लोगों ने समर्थन दिया। असम सरकार के एक मंत्री  केशव महंत की बेटी भी प्रदर्शनों में शामिल हुईं। इसे लेकर मंत्री और सीएम हिमंता को निशाना बनाया गया, अब उन्होंने इस पर जवाब दिया है।