दिल्ली में एक व्यक्ति के SBI डेबिट कार्ड ATM में फंस गया। इसके बाद उसके खाते से 80 हजार रुपये निकल गए और उसे पता भी नहीं चला। रकम वापस पाने के लिए व्यक्ति को करीब 10 महीने तक इंतजार करना पड़ा और आखिरकार उसे उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की सेवा में कमी मानते हुए बैंक को 15 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का निर्देश दिया है।


जानकारी के अनुसार, यह मामला संजय मिश्रा की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनका SBI डेबिट कार्ड ATM में फंस गया था, जिसके बाद उनके खाते से धोखाधड़ी कर 80 हजार रुपये निकाल लिए गए। आयोग की अध्यक्ष मोनिका ए श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल की पीठ ने इस शिकायत पर सुनवाई की, जिसमें SBI को जिम्मेदार ठहराया गया। 

 

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क्या है पूरा मामला?

शिकायत के अनुसार, 13 जनवरी 2024 को दोपहर करीब 2 बजकर 15 मिनट पर संजय मिश्रा ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के ATM से अपने SBI डेबिट कार्ड के जरिए 10 हजार रुपये निकाले। लेन-देन पूरा होने के बाद उनका कार्ड मशीन में फंस गया। कई कोशिशों के बाद भी कार्ड बाहर नहीं निकला। संजय मिश्रा के मुताबिक, ATM बूथ के अंदर मदद के लिए एक फोन नंबर लिखा हुआ था। उन्होंने उस नंबर पर संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को PNB हेल्प सेंटर का कर्मचारी बताया और उन्हें मशीन पर क्लियर बटन दबाकर कार्ड बाहर निकालने के लिए कहा। इसके बाद भी कार्ड मशीन से बाहर नहीं निकला।

खाते से निकले पैसे

शिकायत में कहा गया कि फोन पर मौजूद व्यक्ति ने मिश्रा को बताया कि शाम को बैंक का इंजीनियर ATM पर आएगा और पहचान पत्र दिखाने के बाद वह अपना कार्ड ले सकते हैं। इसके बाद वह ATM बूथ से बाहर निकल गए। इसके के बाद उन्हें दो SMS अलर्ट मिले, जिनमें उनके खाते से 5-5 हजार रुपये निकाले जाने की जानकारी थी।

 

इसके बाद मिश्रा ने तुरंत SBI से संपर्क कर कार्ड ब्लॉक कराया और मामले की शिकायत पुलिस और साइबर क्राइम अधिकारियों से भी की। जब वह शिकायत करने के बाद वापस ATM बूथ पर पहुंचे तो वहां एक सिक्योरिटी गार्ड मौजूद था और बूथ में पहले दिख रहा मदद वाला नंबर हटा दिया गया था।

खाते से हुए कुल 12 ट्रांजेक्शन

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि ATM के कार्ड स्लॉट में खराबी दिखाई दे रही थी और उसके कुछ हिस्से गायब भी थे। इससे संजय मिश्रा को शक हुआ कि मशीन में स्किमिंग डिवाइस लगाया गया हो सकता है। उन्होंने ATM पर मौजूद गार्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाए। संजय मिश्रा ने आगे कहा कि बाद में SBI से उन्हें पता चला कि उनके खाते से कुल 12 लेन-देन किए गए थे, जिनमें पॉइंट-ऑफ-सेल ट्रांजैक्शन भी शामिल थे। उनका दावा था कि उन्हें केवल शुरुआती दो ट्रांजैक्शन के अलर्ट मिले, जबकि उन्होंने तुरंत बैंक को सूचना देकर कार्ड ब्लॉक करा दिया था।

10 महीने बाद मिला पैसा

संजय मिश्रा ने जनवरी 2024 में बैंकिंग ओम्बड्समैन और SBI के पास शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 9 फरवरी 2024 को उन्होंने निर्धारित शिकायत फॉर्म और जरूरी दस्तावेज भी जमा किए। इसके बावजूद उनका मामला लंबे समय तक हल नहीं हुआ। देरी से परेशान होकर उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की और SBI को धोखाधड़ी से निकाली गई 80 हजार रुपये की रकम वापस करने तथा उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च के लिए मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की।

 

हालांकि, इस बीच मुख्य रकम से जुड़ा विवाद हल हो गया था। संजय के खाते में 80 हजार रुपये 7 दिसंबर 2024 को वापस जमा कर दिए गए थे। यह रकम धोखाधड़ी की सूचना दिए जाने के करीब 10 महीने बाद लौटाई गई थी। आयोग ने यह भी नोट किया कि नोटिस देने के बावजूद SBI की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। इसके बाद अप्रैल 2025 में मामले की सुनवाई बैंक के खिलाफ एकतरफा आगे बढ़ी।

 

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SBI पर लगा जुर्माना

आयोग ने माना कि बार-बार शिकायत और फॉलो-अप के बावजूद रकम लौटाने में काफी देरी हुई। आयोग ने इसे सेवा में कमी माना और SBI को मुकद्दमे का खर्च देने के लिए कहा गया। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि धोखाधड़ी से निकाली गई रकम शिकायतकर्ता को वापस कर दी गई, लेकिन यह राशि करीब 10 महीने की देरी से और आयोग का दरवाजा खटखटाने के बाद लौटाई गई। इसलिए SBI को मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए शिकायतकर्ता को 15 हजार रुपये देना होगा।