भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं और खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर इस बारे में जानकारी दी है। इन परीक्षणों के जरिए लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ मल्टी लेवल सिक्योरिटी सिस्टम और मिडियम दूरी पर एंटी-शिप क्षमता का प्रदर्शन किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इन परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल कर दिया है जिनके पास बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) क्षमता मौजूद है।

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करते हुए कहा कि परीक्षणों में इस्तेमाल किए गए इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि इन प्रणालियों को उभरते मिसाइल खतरों का सामना करने के लिए नवीनतम तकनीकों के साथ डिजाइन और विकसित किया गया है। जाहिर है रक्षा क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। 

 

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एयर डिफेंस होगा मजबूत

जानकारी के अनुसार, इन परीक्षणों के दौरान भारत ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम का प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य अलग-अलग स्तरों पर आने वाले मिसाइल खतरों को पहचानना और उन्हें हवा में ही निष्क्रिय करना है। रक्षा मंत्री के अनुसार, परीक्षणों ने यह भी दिखाया कि भारत का रक्षा तंत्र इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) स्तर तक के खतरों का मुकाबला करने की क्षमता रखता है।

नेवल एंटी-शिप मिसाइल टेस्ट भी सफल

इन परीक्षणों के दौरान एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई। नौसेना के लिए विकसित नेवल एंटी-शिप मिसाइल–मीडियम रेंज (NASM-MR) का पहला फ्लाइट टेस्ट भी सफलतापूर्वक किया गया। इस परीक्षण में मध्यम दूरी पर समुद्री लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। इससे भारतीय सशस्त्र बलों की समुद्री हमलावर और रक्षा क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है।

स्वदेशी रक्षा तकनीकों पर भरोसा

रक्षा मंत्री ने कहा कि इन सफल परीक्षणों ने यह साबित किया है कि भारत लगातार स्वदेशी रक्षा तकनीकों को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने DRDO और इस परियोजना से जुड़े सभी वैज्ञानिकों और टीमों की सराहना की। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत लंबे समय से बहु-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली पर काम कर रहा है ताकि विभिन्न ऊंचाइयों और दूरी से आने वाले मिसाइल खतरों को रोका जा सके। हाल के परीक्षणों को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

 

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DRDO के चेयरमैन ने क्या कहा?

इन तीन लगातार सफल परीक्षणों के बाद भारत की रक्षा क्षमताओं में एक नई उपलब्धि जुड़ी है। अधिकारियों के अनुसार, यह परीक्षण भविष्य के उन्नत रक्षा ढांचे और आधुनिक युद्ध संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित तकनीकों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने इन परीक्षणों पर बारीकी से नजर रखी और डीआरडीओ और इंडस्ट्री की मिली-जुली कोशिशों की सराहना की। इसके पहले डीआरडीओ और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने वायु से सतह पर मार करने वाली अत्याधुनिक रुद्रम-II मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया था।