देशभर में नकली और घटिया बीजों से किसानों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए केंद्र सरकार सख्त 'सीड एक्ट' को लाने की तैयारी में है। 60 साल पुराने बीज अधिनियम (Seeds Act, 1966) में बदलाव आज के समय में किसानों के लिए सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। इसकी जरूरत राजस्थान के एक हालिया मामले से आप बखूबी समझ सकते हैं। यह मामला गुजरात की एक कंपनी के जरिए राजस्थान में घटिया मूंगफली बीज बेचे जाने का था। जोधपुर में जांच के दौरान करीब 15 करोड़ रुपये के नकली और घटिया बीज जब्त किए गए थे।

 

यह अकेला मामला नहीं है, इसी साल महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में नकली सोयाबीन बीज के चलते 17 किसानों की फसल बर्बाद हो गई। एक और मामले में बिहार में औचक निरीक्षण के दौरान 11 हजार से ज्यादा नमूनों की जांच में 162 बीज नकली निकले। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे बीज सीधे तौर पर किसान की पूरे साल की मेहनत और पूंजी बर्बाद कर देते हैं। बीज खराब निकलने पर फसल चौपट होती है और किसान कर्ज के बोझ तले दब जाता है।

 

यह भी पढ़ें: बाढ़ में कैश बांट रहे पप्पू यादव, लेसी सिंह बोलीं- आखिर पैसा कहां से आ रहा?

नियमों को सख्त बनाने की तैयारी में केंद्र सरकार

नकली और घटिया बीजों के कारोबार को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार अब नियमों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त बनाने की तैयारी में है। मौजूदा समय में लागू 1968 का सीड एक्ट दशकों पुराना होने के कारण आज के बीज बाजार और बढ़ते फर्जीवाड़े से निपटने में काफी नहीं है। इस एक्ट में दंड के प्रावधान इतने कमजोर हैं कि नकली सामान बेचने वालों पर असर ही नहीं पड़ता। यही वजह है कि यह अवैध कारोबार लगातार फलता-फूलता रहा।

 

इस को देखते हुए सरकार ने नए सीड एक्ट में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान जोड़ने का फैसला लिया है, ताकि नकली और घटिया बीज बनाने, बेचने और सप्लाई करने वालों के लिए यह कारोबार करना लगभग असंभव हो जाए। हालांकि, यह कानून केवल बिक्री तक सीमित नहीं होगा, बल्कि बीजों को बनाने से लेकर वितरण तक की पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी और जवाबदेही तय करने की दिशा में इसपर काम हो रहा है।

 

इसके अलावा, सरकार इस कानून को थोपने के बजाय किसानों की राय शामिल करते हुए इसकी तैयार कर रही है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में अब तक 20 किसान संगठनों से सीधा संवाद किया जा चुका है, इसमें किसानों की ओर से करीब 18,000 सुझाव भेजे गए हैं। सरकार का कहना है कि इन जमीनी अनुभवों और सुझावों को कानून के अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा, ताकि नियम सिर्फ कागजों पर सख्त न रहें बल्कि जमीन पर भी असरदार साबित हों। 

 

यह भी पढ़ें: भारत आने से पहले ही शी चिनफिंग का विरोध, पुलिस ने तिब्बतियों को हिरासत में लिया

नए एक्ट से क्या बदलेगा?

  • नए सीड एक्ट के लागू होने के बाद किसानों और बीज उद्योग से जुड़े हर पक्ष पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है, इसमें जो सजा और जुर्माना से जुड़े कड़े नियम लाए जा सकते हैं। नए एक्ट से क्या बदलेगा, क्या हो सकते हैं इसमें संभावित बदलाव? 
  • कड़ी सजा और भारी जुर्माना: नए एक्ट में नकली, मिलावटी या घटिया बीज बनाने और बेचने वालों को अब सिर्फ नोटिस या मामूली फाइन से नहीं, बल्कि जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
  • पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी: कानून का दायरा सिर्फ खुदरा बिक्री तक सीमित नहीं होगा, बल्कि बीज निर्माण, भंडारण और वितरण के हर चरण पर जवाबदेही तय  की जा सकती है। 
  • 1968 के कमजोर प्रावधानों की जगह सख्त: नए एक्ट में पुराने कानून में मामूली सजा के चलते जो फायदा माफियाओं को मिल रहा है, वह अब खत्म हो सकता है।  
  • शिकायत और कार्रवाई की तेज प्रक्रिया: इसके अलावा किसानों को नकली बीज मिलने पर जल्द जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने वाला तंत्र बनाए जाने की संभावना है।
  • सरकारी तंत्र में भी जवाबदेही: राजस्थान बीज निगम जैसे मामलों को देखते हुए बीज प्रमाणन और वितरण से जुड़े सरकारी अधिकारियों पर भी निगरानी सख्त हो सकती है।

बताया जा रहा है कि 20 किसान संगठनों से मिले करीब 18,000 सुझावों को मसौदे में शामिल किए जाने से कानून व्यावहारिक स्तर पर किसानों के हित में ढलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि बदलावों से नकली बीजों के कारोबार पर लगाम लगेगी और किसानों को कानूनी सुरक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण बीज मिलना सुनिश्चित होगा।