IIT बॉम्बे के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली और इसके बाद से लगातार विवाद हो रहा है। आत्महत्या का कारण अभी तक सामने नहीं आया है लेकिन मृतक छात्र का परिवार आरोप लगा रहा है कि उनके बेटे के साथ संस्थान में जातिगत आधार पर भेदभाव होता था, जिससे वह परेशान था। संस्थान ने बताया कि छात्र फोन से पेपर में नकल कर रहा था जिसके बाद उसे समझाया गया था। इस पूरे मामले की अभी जांच जारी है लेकिन इस बीच दो मुद्दों पर हर किसी का ध्यान गया। पहला मुद्दा तो IIT जैसे संस्थानों में छात्रों के बढ़ते आत्महत्या के मामलों का है। दूसरा मुद्दा छात्रों के साथ जातिगत आधार पर होने वाले भेदभाव से है। 

 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर जारी बहस के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2020-21 से 2024-25 के बीच देशभर के IITs में कम से कम 53 छात्रों की मौत हुई। इनमें 45 मौतें आत्महत्या के रूप में दर्ज की गईं, जबकि आठ मामलों को अन्य अननेचुरल डेथ की लिस्ट में रखा गया है। खास बात यह है कि मृत छात्रों में 54.7 प्रतिशत यानी 29 छात्र SC, ST और OBC समुदायों से थे। यह जानकारी IITs की ओर से शिक्षा मंत्रालय को उपलब्ध कराए गए आधिकारिक आंकड़ों में सामने आई है।

 

यह भी पढ़ें: टेलीकॉम कंपनियों पर TRAI सख्त! ग्राहकों को देने होंगे बिना डेटा वाले रिचार्ज

मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ा

शिक्षा मंत्रालय को भेजे गए IITs के आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 में पांच छात्रों की मौत दर्ज हुई थी। इसके बाद 2021-22 और 2022-23 में छह-छह मौतें हुईं। आंकड़ा 2023-24 में अचानक बढ़कर 17 और 2024-25 में 19 हो गया। यानी पांच साल में कुल 53 मौतों में से 36 मौतें केवल लास्ट के दो सालों में ही हुई हैं। कुल मौतों में आत्महत्या की हिस्सेदारी लगभग 84.9 प्रतिशत रही है जो लगातार चिंता बढ़ा रही है। 2024-25 में दर्ज 19 मौतों में छह को अननेचुरल डेथ की कैटेगरी में रखा गया है। 

SC, ST और OBC छात्रों का आंकड़ा

IIT बॉम्बे में साहिल की आत्महत्या के मामले में परिवार जातिगत उत्पीड़न का आरोप लगा रहा है और इसको लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। ऐसे में SC, ST और OBC छात्रों की मौत से जुड़ा आंकड़ा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। हिंदुस्तार टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 23 मौतें सामान्य वर्ग के छात्रों की थीं। OBC वर्ग के 12, SC वर्ग के 10, ST वर्ग के सात और EWS वर्ग के एक छात्र की मौत दर्ज हुई। इस तरह SC, ST और OBC वर्ग को मिलाकर 29 मौतें, यानी कुल का 54.7 प्रतिशत, हुईं। 

 

हालांकि, हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में ही इन आंकड़ो को SC, ST और OBC के एडमिशन अनुपात के रूप में बताया गया है। सामान्य वर्ग के 23 मृत छात्रों में सात मौतें अननेचुरल डेथ के रूप में दर्ज की गई हैं। इसके विपरीत OBC के सभी 12 और ST के सभी सात मामलों को आत्महत्या के रूप में दर्ज किया गया। SC वर्ग के 10 मामलों में नौ आत्महत्या के थे। EWS के एक मामले को भी आत्महत्या के रूप में दर्ज किया गया। मौत का आंकड़ा एडमिशन के अनुपात में है लेकिन आत्महत्या के मामले में SC, ST और OBC वर्ग के बच्चों का आंकड़ा ज्यादा है। हालांकि, इन आंकड़ो को सीधे तौर पर संस्थानों में जातिगत भेदभाव से नहीं जोड़ा जा सकता। IIT जैसे संस्थानों में पढ़ाई के दबाव के कारण छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 

 

यह भी पढ़ें: 'ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर पैसा वसूला जा रहा', तेजस्वी का सरकार पर बड़ा आरोप

लगातार बढ़ रहे मामले

IITs ही नहीं देश के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इन मामलों को लेकर देशभर में चिंता है और इनको कम करने के लिए प्रयास भी किए जा रहे हैं। IITs में छात्रों की मौतों का आंकड़ा 2023-24 और 2024-25 में पिछले तीन वर्षों की तुलना में काफी बढ़ा। यह आंकड़े लगातार डरा रहे हैं और संस्थान इनको कम करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।