भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण को लेकर चल रही चर्चाओं पर अब खुद ISRO ने स्थिति साफ कर दी है। ISRO ने कहा है कि उसके निजीकरण या उसकी भूमिका कम करने की खबरें पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। संस्था ने साफ किया कि ISRO का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही अंतरिक्ष क्षेत्र में उसकी अहमियत कम होगी। यह सफाई ऐसे समय आई है जब ISRO के कर्मचारी संगठनों ने सरकार से संगठन के भविष्य और उसके कामकाज में होने वाले बदलावों को लेकर लिखित जवाब मांगा था।

 

ISRO ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में 2020 के बाद किए गए सुधारों का मकसद ISRO की भूमिका खत्म करना नहीं बल्कि देश के पूरे स्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करना है। नई व्यवस्था में निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में ज्यादा भागीदारी का मौका मिलेगा, जबकि ISRO का मुख्य ध्यान नई तकनीक, रिसर्च और भविष्य के बड़े अंतरिक्ष मिशनों पर रहेगा।

 

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2047 तक बड़े अंतरिक्ष मिशन पर फोकस

ISRO के मुताबिक, Space Vision 2047 के तहत भारत ने कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। इनमें 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य शामिल है। इसके साथ ही अगली पीढ़ी के लॉन्च सिस्टम और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट विकसित करने पर भी काम होगा।

 

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चंद्रमा और दूसरे ग्रहों की लगातार खोज के साथ भारत को दुनिया की बड़ी अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल करना भी इस योजना का हिस्सा है। ISRO का कहना है कि इन मिशनों के लिए अत्याधुनिक रिसर्च और तकनीकी क्षमता जरूरी है, इसलिए उसका फोकस इन क्षेत्रों से कम नहीं होगा।

निजी कंपनियों को मिलेगा बड़ा रोल

स्पेस सेक्टर में सुधारों के तहत निजी कंपनियों को पहले से विकसित और परिपक्व तकनीकों को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा। यानी जिन तकनीकों को ISRO ने विकसित कर लिया है, उन्हें उद्योग के जरिए बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया जा सकेगा। वहीं ISRO नई और ज्यादा चुनौतीपूर्ण तकनीकों पर काम करेगा। IN-SPACe निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ाने और उन्हें मंजूरी देने में मदद करेगा, जबकि NewSpace India Limited (NSIL) विकसित तकनीकों के व्यावसायीकरण की जिम्मेदारी संभालेगा।

 

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IN-SPACe चेयरमैन ने भी साफ किया रुख

कर्मचारी संगठनों की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने के दो दिन बाद IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका ने भी ISRO की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ISRO भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की बुनियाद बना रहेगा और उसकी भूमिका किसी भी तरह कम नहीं हो रही है। गोयनका ने कहा कि 2020 के बाद के सुधारों का उद्देश्य भारत के पूरे अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार करना है। निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने के बावजूद ISRO का मुख्य काम देश को अंतरिक्ष तकनीक के अगले स्तर तक पहुंचाना रहेगा।