कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया है। हालांकि शुक्रवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इन मीडिया रिपोर्ट्स को न केवल खारिज किया, बल्कि पूरी तरह से झूठा बताया।
 
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सिर्फ एक वकील ने एक पत्र भेजा था। अदालत में कोई रिट याचिका दाखिल नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि कोई औपचारिक फाइलिंग न होने पर केवल एक पत्र को रिट याचिका नहीं माना जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया रिपोर्टिंग को लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना बताया। 

 

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पिछले दो दिनों में यह पूरी तरह से झूठ बयान दिया गया कि मामला दाखिल किया गया। पूरी तरह से अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होकर झूठी खबरें फैलाई गई कि चीफ जस्टिस ने मामले को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया है। सुबह 10 बजे तक एक पेज भी फाइल नहीं किया गया। यह एक निवेदन था, जिसे मिश्रा या किसी और ने भेजा था। मैं उस निवेदन को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं? लोग लापरवाही से इसकी खबरें फैलाने लगते हैं। - सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश

 

 

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क्या है पूरा मामला?

वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने एक अन्य मामले को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। इसी दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया रिपोर्ट्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इससे पहले 22 जुलाई अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया। हालांकि इस संदर्भ में कोई औपचारिक तौर पर याचिका नहीं दाखिल नहीं होने पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, 'हमारा और अपना समय बर्बाद न करें।' वकील ने पुलिस कार्रवाई के वीडियो का जिक्र किया तो चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'वीडियो देखने का समय नहीं है।'