भारत की सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) को अमेरिकी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) से वेनेजुएला में अपना परिचालन पूरी तरह से शुरू करने का लाइसेंस मिल गया है। इस फैसले के बाद वेनेजुलएला के तेल पर लगे प्रतिबंधों से जुड़ी बाधा दूर हो चुकी है। इसके बाद कंपनी को अपनी वेनेजुएला परियोजनाओं के वित्तीय संचालन में सुविधा मिलेगी। वहीं 50 करोड़ डॉलर से अधिक के लंबित लाभांश की वसूली भी कर पाएगी। बता दें कि ईरान युद्ध के बीच भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू किया। हालांकि कम छूट और माल ढुलाई में इजाफा होने से यह तेल महंगा पड़ रहा है।

 

ओएनजीसी के निदेशक (वित्त) अनुपम अग्रवाल ने पहली तिमाही ने बताया कि अमेरिकी मंजूरी मिलने के बाद कंपनी को वेनेजुएला की परियोजनाओं में काम करने की पूरी आजादी मिल गई है। प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों के कारण कंपनी पहले वहां अपनी गतिविधियों को सीमित कर रही थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।

 

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ओएनजीसी की विदेशी निवेश यूनिट ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) की सैन क्रिस्टोबल तेल परियोजना में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी वेनेजुएला की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी पेट्रोलियोज डी वेनेजुएला एसए () की है। काराबोबो परियोजना में भी ओवीएल की 11 प्रतिशत की साझेदारी है।

वेनेजुएला के साथ बातचीत कर रही ओएनजीसी

अनुपम अग्रवाल ने बताया कि ओएनजीसी वेनेजुएला के अधिकारियों और संयुक्त उद्यम भागीदारों के साथ सैन क्रिस्टोबल और काराबोबो परियोजनाओं पर बातचीत कर रही है। कंपनी को जल्द ही नए समझौतों और कुछ परियोजनाओं का परिचालन नियंत्रण वेनेजुलएला की सरकारी कंपनी से अपने हाथ में मिलने की उम्मीद है।

 

अनुपम अग्रवाल का कहनाहै कि ओएनजीसी अब इन परियोजनाओं में निवेश बढ़ाकर तेल उत्पादन बढ़ाने की स्थिति में है। सैन क्रिस्टोबल परियोजना ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 2.65 लाख टन तेल का उत्पादन किया। यह इसकी क्षमता का लभग दसवां भाग है।

सैन क्रिस्टोबल परियोजना

ओएनजीसी विदेश लिमिटेड की वेबसाइट के मुताबिक सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र पूर्वी वेनेजुएला में में स्थित है। यह परियोजना 160.18 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। ओएनजीसी विदेश ने  8 अप्रैल 2008 को इस परियोजना में 40% हिस्सेदारी हासिल की थी। संयुक्त उद्यम के तौर पर वेनेजुएला की सरकारी कंपनी पीडीवीएसए भी शामिल है। इसके बाद 'पेट्रोलेरा इंडोवेनेजोलाना एसए' (PIVSA) नामक एक संयुक्त उद्यम कंपनी का गठन किया गया। पीडीवीएसए की कंपनी सीवीपी की 56% और पीडीवीएसए सोशल की 4% हिस्सेदारी के साथ कंपनी के पास कुल 60 फीसद हिस्सा है। वहीं ओएनजीसी की ओएनजीसी विदेश और ओएनजीसी नील गंगा के माध्यम से 40 फीसद हिस्सेदारी है।

 

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काराबोबो-1 परियोजना

इस परियोजना पर भी ओएनजीसी का निवेश है। कैराबोबो परिजोयना वेनेजुएला के ओरिनोको तेल बेल्ट के पूर्व में स्थित है। ओएनजीसी विदेश ने आईओसी, ऑयल इंडिया, रेपसोल और पेट्रोनास के साथ मिलकर मई 2010 में वेनेजुएला सरकार से कुल 40% हिस्सेदारी हासिल की थी। साझेदार पेट्रोनास 2013 में परियोजना से बाहर हो गया और पेट्रोनास के 11% शेयर पीडीवीएसए को चले गए। पेट्रोकाराबोबो में साझेदारों की वर्तमान हिस्सेदारी पीडीवीएसए 71%, रेपसोल 11%, ओएनजीसी विदेश 11%, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन 3.5% और ऑयल इंडिया के पास 3.5% है।

वेनेजुएला में सबसे अधिक तेल भंडार

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। ओपेक के मुताबिक वेनेजुएला में 303 अरब बैरल कच्चा तेल का भंडार है। कुछ दिन पहले ही वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने नई दिल्ली का दौरा किया था। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर चर्चा की थी।