दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आधी रात छात्रों के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने पेपर लीक मामले की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है। साथ ही, पेपर लीक के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करने वाला कानून बनाने की बात भी कही है। 

 

PM मोदी ने बताया कि कैबिनेट में इससे जुड़े मसौदे पर आज यानी 24 जुलाई को चर्चा होगी और सख्त फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मंजूरी मिलने के बाद इसे अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा और जल्द पास कराने की कोशिश होगी। ऐसे में देशभर में मौजूदा 'एंटी पेपर लीक कानून' की चर्चा तेज हो गई है। आइए इस लाॅ को समझते हैं।  

 

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क्या है एंटी पेपर लीक कानून? 

साल 2024 में केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू किया। इसे आम भाषा में एंटी पेपर लीक लॉ कहा जाता है। बता दें कि यह भारत का पहला केंद्रीय कानून है, जिसे सरकारी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, फर्जीवाड़े और संगठित परीक्षा माफिया पर रोक लगाने के लिए बनाया गया है। इस कानून को संसद से 12 फरवरी 2024 को पारित किया गया और 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू हो गया। 

क्यों लाया गया यह कानून?

पिछले कई सालों से NEET-UG, UGC-NET, SSC, रेलवे भर्ती और अन्य केंद्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामले लगातार सामने आए। कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में पेपर लीक गैंग सक्रिय पाए गए। वहीं 2024 में UGC NET 2024 परीक्षा भी पेपर लीक आशंकाओं के चलते रद्द करनी पड़ी थी।

 

NEET विवाद ने भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक और कानूनी संकट खड़ा कर दिया था। उस समय सरकार का कहना था परीक्षाओं में भरोसा बनाए रखने और पेपर लीक व नकल कराने वाले गिरोहों पर सख्त कार्रवाई के लिए एक मजबूत केंद्रीय कानून की जरूरत थी। इसी को देखते हुए सरकार ने  पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, इसके लिए यह कानून बनाया गया।

 

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किन भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होता है यह कानून? 

बता दें कि यह कानून केंद्र सरकार की ओर से कराई जाने वाली सभी सार्वजनिक (भर्ती और प्रवेश) परीक्षाओं पर लागू होता है। इनमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाएं, कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की भर्ती परीक्षाएं, रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की परीक्षाएं, बैंक भर्ती संस्थान (IBPS) की परीक्षाएं,  केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। इसके अलावा इस कानून के तहत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षाएं भी आती हैं, जैसे:

  • NEET-UG
  • JEE Main
  • CUET
  • UGC-NET

केंद्र सरकार आगे जिन नई सार्वजनिक परीक्षाओं को इस कानून के दायरे में लाएगी, उन पर भी यह कानून लागू होगा। 

कब लागू हुआ यह कानून?  

6 फरवरी 2024 को लोकसभा में यह विधेयक पारित किया गया, 9 फरवरी 2024 को राज्यसभा से मंजूरी मिली। इसके बाद 12 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी (President's Assent) मिली। 21 जून 2024 को यह कानून पूरे देश में लागू हुआ। यह कानून पूरे भारत में लागू है। इसके अलावा, केंद्र सरकार जिन सार्वजनिक परीक्षाओं को इसमें शामिल करती है, उन सभी पर यह कानून लागू होगा। 

 


इसके तहत इन 15 गड़बड़ियों को अपराध माना जाएगा  

  1. किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र या उत्तर लीक करना।
  2. प्रश्नपत्र या उत्तर लीक करने में किसी का साथ देना।
  3. बिना अनुमति के प्रश्नपत्र या OMR शीट अपने पास रखना।
  4. परीक्षा के दौरान किसी से जवाब लिखने में मदद लेना।
  5. परीक्षा दे रहे उम्मीदवार की सीधे या किसी और तरीके से मदद करना।
  6. उत्तर पुस्तिका या OMR शीट में छेड़छाड़ करना।
  7. उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में बिना अनुमति बदलाव करना।
  8. सरकारी एजेंसियों द्वारा तय परीक्षा नियमों का उल्लंघन करना।
  9. मेरिट से जुड़े दस्तावेजों में किसी भी तरह की छेड़छाड़ करना।
  10. सार्वजनिक परीक्षाओं के लिए तय सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करना।
  11. परीक्षा से जुड़े कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क से छेड़छाड़ करना।
  12. उम्मीदवारों की सीट व्यवस्था, परीक्षा डेटा या शिफ्ट में बदलाव करना।
  13. परीक्षा कराने वाली संस्था के अधिकारियों को धमकाना या उनके काम में बाधा डालना।
  14. परीक्षा या परीक्षा कराने वाली संस्था के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाना।
  15. फर्जी प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) जारी करना या किसी की जगह परीक्षा देना।   

इस कानून के तरत क्या मिलती है सजा?

इस कानून के तहत, पेपर लीक करने या फिर आंसर शीट के साथ छेड़छाड़ करने पर कम से कम 3 साल की जेल की सजा हो सकती है। इसे 10 लाख तक के जुर्माने के साथ 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा परीक्षा संचालन के लिए नियुक्त सर्विस प्रोवाइडर अगर दोषी होता है तो उसे 5 से 10 साल तक की जेल की सजा और 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना होगा। वहीं सर्विस प्रोवाइडर अवैध गतिविधियों में शामिल है, तो उससे परीक्षा की लागत वसूली की जाएगी। 

अब आगे क्या? 

अब पेपर लीक और नकल के खिलाफ मौजूदा कानून को और सख्त करने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि  सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 में कोई संशोधन किए जा सकते हैं। मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा फास्ट ट्रैक कोर्ट को अधिक अधिकार भी दिए जा सकते हैं।  सजा और जुर्माना भी बढ़ाया जा सकता है। PM मोदी ने गुरुवार रात  छात्रों के नाम एक वीडियो मैसेज जारी कर पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई किए जाने की बात कही है। वीडियो में उन्होंने कहा है कि शुक्रवार को कैबिनेट में पेपर लीक के खिलाफ और सख्त फैसला लिया जाएगा।