केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 84,084 करोड़ रुपये की 'समुद्र मंथन' प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश की अपतटीय हाइड्रोकार्बन क्षमता के क्षेत्र में इसे एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम बताया। प्रोजेक्ट के तहत गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल एवं गैस की खोज, अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग और नई खोज के लिए बुनियादी ढांचे के विकास में सहायता प्रदान की जाएगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय प्रोजेक्ट को लागू करेगा। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में योजना को मंजूरी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि समुद्र मंथन योजना के तहत गहरे समुद्र और अति-गहरे समुद्री में हर कुएं की ड्रिलिंग के लिए 650 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन को बढ़ाना है, ताकि देश की आयात पर निर्भरता कम की जा सके। समुद्र मंथन योजना के कुल परिव्यय में से 43,200 करोड़ रुपये आवंटन गहरे समुद्र में ड्रिलिंग के लिए किया गया है। साल 2031 तक यानी पांच वर्षों तक योजना पर काम किया जाएगा।
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उत्पादन शुरू करने के लिए 10 हजार करोड़
10 हजार करोड़ रुपये का निवेश बुनियादी ढांचे पर किया जाएगा, ताकि अभी तक हुई खोजों से उत्पादन शुरू किया जा सके। समुद्री क्षेत्र से आंकड़ा जुटाने में 28,534 करोड़ रुपये और तेल एवं गैस विनिर्माण व सेवा क्षेत्रों के विकास के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित होगा। सरकार ने कहा कि यह योजना समुद्री बेसिन क्षेत्रों में अन्वेषण गतिविधियों को तेज करेगी, निवेश आकर्षित करेगी और भारत की अपतटीय हाइड्रोकार्बन क्षमता को विकसित करने में मदद करेगी।
सरकार को प्रोजेक्ट से क्या उम्मीद?
भारत 88 फीसद तक कच्चा तेल विदेश से आता है। वहीं प्राकृतिक गैस का भी आधा हिस्सा आयात करना पड़ता है। सरकार को उम्मीद है कि यह योजना 60 करोड़ टन से अधिक तेल एवं गैस भंडार की खोज, घरेलू उत्पादन में इजाफा, रोजगार सृजन और विनिर्माण को बढ़ावा देने में सहायता करेगी। समुद्र मंथन योजना के तहत उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करके समुद्र में बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण और तेल व गैस की खोज की जाएगी। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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बेहद महंगा है कुआं खोदना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर समुद्र मंथन योजना का जिक्र किया था। भारत लंबे समय से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अलावा अन्य समुद्री क्षेत्र में गैस और तेल की खोज में जुटा है, ताकि ऊर्जा के मामले में विदेशी निर्भरता कम की जा सके।
हालांकि समुद्र में ईंधन खोजना बेहद महंगा होता है। समुद्र में 1500 मीटर से ज्यादा की गहराई में एक एक कुएं को खोदने में 870 करोड़ रुपये से 2,175 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है। इसके बाद भी सफलता की कोई गारंटी नहीं है।
