मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबी पदयात्राओं के लिए पूर्व मुख्यमंत्री के दिग्विजय सिंह जाने जाते हैं। दिग्विजय सिंह एक बार फिर सड़कों पर उतरने जा रहे हैं। विजयादशमी यानी 20 अक्टूबर से वह उज्जैन के महाकाल मंदिर से उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तक 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' की शुरुआत करेंगे। करीब 950 किलोमीटर लंबी यह यात्रा धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता, दान के सही हिसाब और चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार जैसे बड़े मुद्दों को लेकर निकाली जा रही है।
हालांकि, इसे पूरी तरह से गैर-राजनीतिक और सामाजिक-धार्मिक जन-जागरण यात्रा बताया जा रहा है। इसमें कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल के झंडे और बैनर का इस्तेमाल नहीं होगा। इसके बावजूद, राजनीति के जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश से लेकर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों तक निकलने वाली इस यात्रा का सियासी असर गहरा हो सकता है।
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यात्रा की शुरुआत कैसे होगी?
यात्रा शुरू होने से पहले 20 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से उज्जैन में शिप्रा नदी के पास बालाजी गार्डन में शिवलिंग का निर्माण और विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद कन्या भोज और भंडारे का आयोजन होगा। देश की पांच प्रमुख पवित्र नदियों के जल को संग्रहित करके एक विशेष रथ में रखा जाएगा, जो यात्रा के साथ-साथ अयोध्या तक जाएगा।
दिग्विजय हर दिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। यह यात्रा करीब 70 दिनों में पूरी होगी और मध्य प्रदेश के उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, अशोकनगर और ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर से होते हुए उत्तर प्रदेश के अयोध्या पहुंचेगी। अकेले उज्जैन जिले में यात्रा का पड़ाव 5 दिनों का रहेगा।
यात्रा के जरिए प्रमुख मांगें
दिग्विजय सिंह ने इस पदयात्रा के जरिए यात्रा के प्रमुख एजेंडे को सामने रखा। अयोध्या राम मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी मौजूदा 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' को भंग करके पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के समय गठित 'रामालय ट्रस्ट' को दी जाए। इसमें शंकराचार्यों और प्रमुख संतों को शामिल किया जाए।
उनका कहना है कि अयोध्या, उज्जैन महाकाल और ओरछा के रामराजा मंदिर जैसे बड़े धार्मिक स्थलों में आने वाले चंदे और वित्तीय लेनदेन का पूरा लेखा-जोखा जनता के सामने सार्वजनिक किया जाए। उनका यह भी कहना है कि सभी बड़े और प्रमुख मंदिरों के निर्माण, जमीन खरीद और ठेकों में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच हो और इनका नियमित स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
इस यात्रा के जरिए उन्होंने चुनाव आयोग और EVM पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाना चाहिए। साथ ही EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने और SIR में गड़बड़ियों की जांच की मांग भी उठाई है।
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पहले की यात्राएं और उसका असर
उन्होंने इसके पहले भी कई पदयात्राएं की हैं। इन पदयात्राओं के जरिए वह जनसंपर्क स्थापित करने में सफल रहे हैं। उन्होंने 2017-18 के बीच नर्मदा परिक्रमा यात्रा की शुरुआत की थी। 3,300 किलोमीटर लंबी इस धार्मिक यात्रा के दौरान वह मध्य प्रदेश के 110 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों से गुजरे। इस यात्रा ने बीजेपी सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। इसके नतीजे में 2018 में कांग्रेस 15 साल बाद मध्य प्रदेश की सत्ता में वापस आई।
कांग्रेस के केडर में दम भरने के लिए उन्होंने 2022-23 में भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की थी। कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकली इस 4,000 से अधिक किलोमीटर की यात्रा के कोऑर्डिनेटर दिग्विजय सिंह ही थे। इस यात्रा ने संगठन के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने का काम किया।
इस यात्रा के राजनीतिक मायने
भले ही इस यात्रा में पार्टी का झंडा न दिखे लेकिन इसके दूरगामी संकेत समझे जा रहे हैं। राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश में किसी भी सियासी बवाल पर दिग्विजय सिंह हमेशा से मुखर रहे हैं। महाकुंभ के दौरान शंकराचार्य ने सीधे और सीएम योगी के परोक्ष रुप से जो धार्मिक बवाल मचा था उसे वह पूरी तरह से भूनाने में लगे हैं। बीजेपी के कोर मुद्दे जैसे राम मंदिर और धार्मिक स्थल पर दिग्विजय सिंह सीधे धार्मिक प्रशासनिक व्यवस्था, शंकराचार्यों के सम्मान और पारदर्शिता का सवाल उठाकर बीजेपी के एकतरफा नैरेटिव को चुनौती दे रहे हैं।
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इस यात्रा से मध्य प्रदेश के मालवा और बुंदेलखंड अंचल (उज्जैन, राजगढ़, ओरछा) से होकर उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी। बुंदेलखंड और यूपी के सीमावर्ती इलाकों में धार्मिक-सामाजिक समीकरणों को साधने की यह एक बड़ी कोशिश है। चुनावी असफलताओं के बाद इस लंबी यात्रा के जरिए कांग्रेस और विपक्ष के कैडर को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय करने की रणनीति के रूप में भी इसे देखा जा रहा है। अगर पीछे के पदयात्रा को देखे तो मध्य प्रदेश में हालिया चुनावी असफलताओं के बाद यह यात्रा पार्टी कार्यकर्ताओं में नए सिरे से ऊर्जा भरने का जरिया बन सकती है।
