भारत के बांग्लादेश में नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को केंद्र सरकार ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के बराबर दर्जा दिया है। यह दर्जा मुख्य रूप से प्रोटोकॉल और टेबल ऑफ प्रिसिडेंस के तहत दिया गया है। दिनेश त्रिवेदी को अप्रैल 2026 में बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को देखते हुए उनकी यह नियुक्ति काफी अहम मानी जा रही है।
दिनेश त्रिवेदी ने हाल ही में बांग्लादशे की राजधानी ढाका जाकर ऑफिस का चार्ज भी संभाला लिया है। वह पेट्रापोल बेनापोल सीमा के रास्ते बांग्लादेश पहुंचे थे और इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी भी थीं। बॉर्डर पर भारतीय और बांग्लादेशी अधिकारियों ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेश के राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपने राजनयिक कार्य की औपचारिक शुरुआत की।
कौन हैं दिनेश त्रिवेदी?
दिनेश त्रिवेदी भारतीय राजनीति का जाना पहचाना नाम हैं। उनका जन्म 4 जून 1950 को नई दिल्ली में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से गुजराती है। उनके माता पिता विभाजन के समय कराची से भारत आए थे और बाद में उनका परिवार कोलकाता में ही रहने लगा था। दिनेश त्रिवेदी ने अपनी पढ़ाई कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से की और इसके बाद अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से एमबीए किया।
पढ़ाई पूरी करने के बाद दिनेश त्रिवेदी ने कुछ समय अमेरिका में काम किया। इसके बाद वह भारत लौटे और प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने लगे। बाद में उन्होंने अपना एयर फ्रेट बिजनेश शुरू किया। राजनीति में आने से पहले वह सामाजिकमुद्दों पर भी सक्रिय रहे और उन्होंने भ्रष्टाचार और राजनीति के अपराधीकरण जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई।
राजनीति में एंट्री
दिनेश त्रिवेदी ने अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी। इसके बाद वह जनता दल में भी गए। उनके राजनीतिक जीवन में सबसे अहम मोड़ 1998 में आया, जब उन्होंने ममता बनर्जी की बनाई हुई तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। दिनेश त्रिवेदी ममता बनर्जी के साथ जुड़े और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। वह तृणमूल कांग्रेस के पहले महासचिव भी रहे और लंबे समय तक उन्होंने पार्टी में काम किया। कई बार वह संसद भी पहुंचे। 2009 में वह पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए थे। इसके बाद उन्हें मनमोहन सिंह सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री बनाया गया।
साल 2011 में दिनेश त्रिवेदी को रेल मंत्री बनाया गया। वह ममता बनर्जी के बाद रेल मंत्रालय संभालने वाले पार्टी के नेता बने और ममता के सीएम बनने के बाद उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दी गई थी। 2012 में उन्होंने रेल बजट पेश किया था और उस बजट में यात्री किराए में बढ़ोतरी का प्रस्ताव था। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के भीतर विवाद हुआ और बाद में त्रिवेदी ने रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
बीजेपी में शामिल होने पर मिली बड़ी जिम्मेदारी
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में वह बैरकपुर सीट से हार गए। इसके बाद वह फिर राज्यसभा पहुंचे और फरवरी 2021 में उन्होंने राज्यसभा और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। मार्च 2021 में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। अप्रैल 2026 में केंद्र सरकार ने दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया। यह नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि आमतौर पर ऐसे पदों पर करियर डिप्लोमैट यानी भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं। दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति को एक राजनीतिक नियुक्ति के रूप में देखा गया।
अब मिला कैबिनेट रैंक?
केंद्र सरकार ने उन्हें इस अहम नियुक्ति के बाद केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा दिया है। यह दर्जा प्रोटोकॉल से जुड़ा है और इसे भारत सरकार की ओर से बांग्लादेश के साथ संबंधों को दी जा रही अहमियत के रूप में देखा जा रहा है। दिनेश त्रिवेदी पहले केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं, लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में काम कर चुके हैं और अब वह बांग्लादेश में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। एक राजनेता और प्रशासक होने के नाते उनका अनुभव भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को संभालने के लिए काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने पदभार संभालते ही अहम फैसला लेते हुए बांग्लादेश के नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से शुरू कर दिया है।


