नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जबरदस्त तरीके से हमलावर हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन के मंच से कहा कि नरेंद्र मोदी की विदेश नीति यही है कि वह सबको गले लगाते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि पता नहीं इनके दिमाग में कहां से घुस गया है कि विदेश नीति का मतलब नेताओं के गले लगना है। अब राहुल गांधी के इस सवाल पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं ने भी पलटवार किया है। बीजेपी नेता इसके जवाब में राहुल गांधी की दादी यानी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो के गले लगने का वीडियो निकाल लाए हैं।  

 

बीजेपी की आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय और सांसद निशिकांत दुबे समेत कई नेताओं ने इंदिरा गांधी और फिदेल कास्त्रो के गले लगने का फोटो/वीडियो शेयर किया। हालांकि, अमित मालवीय ने अब यह वीडियो डिलीट कर दिया है। इसी वीडियो के जरिए बीजेपी समर्थक राहुल गांधी को जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं। अब यह वीडियो वायरल है इसलिए हम उस घटना का जिक्र कर रहे हैं जिसका यह वीडियो है। इसकी वजह है कि इंदिरा गांधी और फिदेल कास्त्रो की यह मुलाकात खूब चर्चा में रही थी।

 

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राहुल गांधी ने क्या किया?

राहुल गांधी जब मंच से अपनी बात रख रहे थे, इसी दौरान विदेश नीति का जिक्र आया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दुनियाभर के नेताओं से गले मिलने का मजाक उड़ाते हुए कहा कि इनकी विदेश नीति यही है। इतना ही नहीं, उसी दौरान मंच पर आए कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को राहुल गांधी ने गले भी लगा लिया। यही वीडियो अब वायरल हो गया है और बीजेपी भी इसको लेकर सवाल उठा रही है। 

फिदेल कास्त्रो ने इंदिरा गांधी को क्यों गले लगाया था?

फिदेल कास्त्रो क्यूबा के क्रांतिकारी नेता थे। 25 नवंबर 2016 को उनका निधन हुआ था। साल 1976 से 2008 तक क्यूबा के राष्ट्रपति रहे फिदेल कास्त्रो का उदय क्रांति से हुआ था और वह क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता थे। यानी जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं तब फिदेल कास्त्रो की क्यूबा के राष्ट्रपति थे। नेहरू-गांधी परिवार के करीबी रहे फिदेल इंदिरा गांधी को अपनी 'बहन' जैसा मानते थे।

 

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जो वीडियो वायरल हो रहा है वह साल 1983 के मार्च महीने में दिल्ली में हुए नॉन अलाइंड समिट का है। इसमें लगभग 100 देशों के राष्ट्राध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि हिस्सा लेने पहुंचे थे। यह सातवां नॉन अलाइंड समिट था और दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित हुआ था। तब क्यूबा के राष्ट्रपति की हैसियत से फिदेल कास्त्रो भी भारत आए थे। इससे पहले 1979 में यह सम्मेलन हवाना में हुआ था और मेजबान क्यूबा था। 

1983 में जब दिल्ली में यह कार्यक्रम शुरू हुआ तब फिदेल कास्त्रो ने मंच से कहा था कि वह अपनी 'बहन' इंदिरा गांधी को इस सम्मेलन का हथौड़ा (Gavel) सौंपेने पर गर्व महसूस कर रहे हैं। इसी के बाद दोनों अपनी कुर्सी से उठे और इंदिरा गांधी ने फिदेल से हथौड़ा लेने के बाद हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया। हालांकि, फिदेल ने हाथ नहीं मिलाया और इंदिरा गांधी को गले लगा लिया। इस पर इंदिरा ने भी एतराज नहीं जताया और आगे बढ़कर गले लग गईं। बता दें कि यह फिदेल कास्त्रो का आखिरी भारत दौरा भी था।