देश के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के सबसे पुराने लंबित केसों को जल्द निपटाने के लिए खास व्यवस्था की है। उन्होंने चार अलग-अलग बेंच के गठन का आदश दिया है, जिसका काम सिर्फ पुराने सिविल और क्रिमिनल केसों की सुनवाई करना होगा।

बेंच का मकसद, 800 से ज्यादा सबसे पुराने मामलों का तेजी से निपटारा है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया है, जिससे कई सालों से लंबित केसों पर लगातार ध्यान दिया जा सके।

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सूर्यकांत, CJI:-
न्यायपालिका का सबसे बड़ा काम सिर्फ फैसला देना नहीं, बल्कि तय समय में फैसला देना है, जिससे लोगों का कानून पर भरोसा बना रहे। पुराने मामले लंबे समय तक लटके रहने से लोगों को परेशानी होती है, इसलिए अब इन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

फास्ट ट्रैक सुनवाई की जिम्मेदारी किसे मिली?

13 जुलाई से यह व्यवस्था लागू हो गई है। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एसवीएन भट्टी की 2 बेंच मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सिर्फ सबसे पुराने सिविल केस सुनवाई करेगी इसी तरह जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुयान की दो बेंच पुराने क्रिमिनल केसों की सुनवाई करेगी। इन बेंचों को सिर्फ पुराने मामलों पर फोकस करना है, दूसरे काम नहीं सौंपे जाएंगे।

 

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हर बेंच के पास 200 पुराने केस

हर बेंच को करीब 200 पुराने मामले सौंपे गए हैं। यह CJI सूर्यकांत की ओर से लागू पहला प्रशासनिक सुधार बताया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल करीब 96 हजार मामले लंबित हैं, जिनमें से कई दशकों पुराने हैं।

क्यों अब हो रही है यह कवायद?

CJI सूर्यकांत का कहना है कि पुराने लंबित मामलों के निपटने से लोगों की न्याय व्यवस्था पर आस्था और बढ़ेगी, अदालत की कार्य प्रणाली बेहतर होगी और लंबित मामलों की संख्या घटेगी।