पंजाब की सियासत में नशे का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बीते दिनों पंजाब के दौरे पर थे और इस दौरान उन्होंने नशे का विरोध करने पर मारे गए परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात की। इसके अलावा भी कई अन्य पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्होंने पंजाब को नशा मुक्त बनाने का वादा किया। अपने इस दौरे के दौरान लुधियाना के दरेसी ग्राउंड में चिट्टा रावण का दहन किया तो दस साल पुरानी एक राजनीतिक तस्वीर ताजा हो गई और राजनीति के चक्र को लोग याद करने लगे। 


10 साल पहले पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी। उस समय प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे और कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब को नशा मुक्त बनाने का वादा किया और उस समय की सरकार पर नशे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। उस समय कांग्रेस ने अपना पूरा चुनावी कैंपेन नशे के मुद्दे पर ही खड़ा किया था। 

 

यह भी पढ़ें: IRCTC मंदिर दर्शन ही नहीं, विदेश भी घूमता है; भूटान, श्रीलंका और जापान का प्लान

 

कैप्टन ने फूंका था चिट्टे का रावण

18 अक्टूबर 2016 को कांग्रेस ने लुधियाना में ‘चिट्टा रावण’ के जरिए पंजाब में नशे की समस्या को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर निशाना साधा था। उस समय कांग्रेस विपक्ष में थी और आरोप लगा रही थी कि अकाली दल-बीजेपी सरकार राज्य में नशे के कारोबार पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय हुआ था, जब पंजाब में नशा आगामी विधानसभा चुनाव का बड़ा मुद्दा बन चुका था। कांग्रेस ने इसी प्रतीक के जरिए नशे की समस्या को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की थी।

10 साल बाद बदले किरदार

दस साल बाद वही प्रतीक एक बार फिर सामने है, लेकिन इस बार राजनीतिक भूमिका बदल चुकी है। 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनी लेकिन उनकी सरकार नशा खत्म नहीं कर सकी और अंत में कैप्टन खुद कांग्रेस छोड़ गए। उनके साथ उस समय मौजूद रवनीत बिट्टू ने भी कांग्रेस छोड़ बीजेपी का हाथ थाम लिया। मौजूदा समय में अब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है लेकिन नशे का मुद्दा लगातार बढ़ता जा रहा है। 

 

अमित शाह ने पंजाब में नशा खत्म करने का वादा करते हुए चिट्टे का रावण फूंका। उनके साथ बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया। बिट्टू 2016 में कांग्रेस के सांसद थे और उस समय अकाली दल-बीजेपी सरकार के खिलाफ पार्टी की राजनीति का हिस्सा थे। अब वह बीजेपी में हैं और उसी चिट्टा रावण के जरिए आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने की राजनीतिक कवायद में नजर आ रहे हैं। यानी चेहरा वही, मुद्दा वही और विरोध का तरीका भी लगभग वही, लेकिन निशाने पर अब दूसरी सरकार है और किरदारों ने पाला बदल लिया है। पंजाब के राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम की चर्चा हो रही है।

 

यह भी पढ़ें: गाने में काम दिलाने के बहाने गैंगरेप करने वाले 3 दोषियों को 20-20 साल की कैद

कांग्रेस के प्लान पर चल रही BJP?

पंजाब में मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी की सरकार है और 2022 में पार्टी ने पंजाब को नशा मुक्त करने का वादा किया था। हालांकि, पार्टी इस वादे को पूरा नहीं कर पाई। नशे के कारण मौतें और हिंसा के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पंजाब में करीब 4 महीने बाद विधानसभा चुनाव हैं और तमाम राजनीतिक दल नशे के मुद्दे को उठा रहे हैं। अब भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। पार्टी लगातार इस मुद्दे पर सक्रिय है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल भी इसी मुद्दे को उठा रहे हैं।

 

विधानसभा से लेकर सड़कों तक हर जगह इसी मुद्दे की गूंज सुनाई दे रही है। ऐसा ही माहौल 2017 के चुनाव से पहले भी बनाया गया था लेकिन नई सरकारें भी नशे को खत्म करने में असफल रही। अब बीजेपी 10 साल पहले जिस रणनीति पर कांग्रेस ने पंजाब में 10 साल बाद सरकार बनाई थी उसी रणनीति पर चलती हुई दिखाई दे रही है। अमित शाह लगातार इस मुद्दे पर सक्रिय नजर आ रहे हैं।