उत्तर प्रदेश की सियासत में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच तकरार बढ़ सकती है। कांग्रेस ने अपने प्रदेश कार्यकारी का एलान किया है। अब अध्यक्ष पर अजय राय से छिन गया है और नई जिम्मेदारी आराधना मिश्रा को दी गई है। यूपी कांग्रेस में नंबर 2 का पद इमरान मसूद को मिला है। वह यूपी कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त हुए हैं।
इमरान मसूद की पहुंच प्रियंका गांधी और कांग्रेस अलाकमान तक है, वह समाजवादी पार्टी को कड़े तेवर भी दिखा रहे हैं, ऐसे में अब गठबंधन धर्म में भी पेच फंस सकता है। कांग्रेस ने आराधना मिश्रा मोना को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। इमरान मसूद वर्किंग प्रेसिडेंट होंगे। नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू है। देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष का पद सौंपा गया है।
कांग्रेस के नए पदाधिकारी कौन-कौन हैं?
- प्रदेश अध्यक्ष: आराधना मिश्रा 'मोना'
- कार्यकारी अध्यक्ष: इमरान मसूद
- वरिष्ठ उपाध्यक्ष: देवेंद्र निषाद
- वरिष्ठ उपाध्यक्ष: आलोक प्रसाद
- नेता, कांग्रेस विधानमंडल दल: चौधरी वीरेंद्र सिंह
इमरान मसूद का बढ़ा कद, सपा के लिए परेशानी है?
अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच तगड़ी दोस्ती है। 21 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जब राहुल गांधी धरने पर बैठे थे, तब पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। अखिलेश यादव उन्हें अपने कार्यकर्ताओं के साथ बस पर सवार होकर छुड़ाने पहुंच गए। दिल्ली में गजब नजारा दिखा था। दोनों संसद में भी एक सुर में नजर आते हैं लेकिन जमीन पर इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के सांसद भिड़ते रहे हैं। वह गठबंधन के लिए कई बार मुश्किल साबित होने वाले बयान दे देते हैं।
क्यों सपा से टकराते हैं इमरान मसूद?
यूपी में इमरान मसूद,सपा के बराबर सीटों की मांग कर रहे हैं। वह राजनीतिक उपेक्षा का आरोप लगाते हैं, यह भी दावा करते हैं कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उनका कहना है कि अखिलेश यादव, मुस्लिम नेतृत्व को अनदेखा करते हैं, कांग्रेस के जनाधार वाली सीटों पर भी अपने प्रत्याशी उतारना चाहते हैं।
साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जब वह कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे तो उन्हें सहारनपुर क्षेत्र में टिकट और संगठन में बड़ा कद मिलने की उम्मीद थी। इन उम्मीदों पर पानी फिरा, उन्हें टिकट तक नहीं मिला। न ही इमरान मसूद किसी अपने को टिकट दिला पाए। कुछ ही महीनों में उनकी राह कांग्रेस से अलग हो गई।
अब वह कांग्रेस से सांसद हैं और यह असंतोष जाहिर करते रहे हैं कि मुस्लिम नेताओं का समाजवादी पार्टी सिर्फ इस्तेमाल करती है लेकिन बोलता मुस्लिम चेहरा, समाजवादी पार्टी को बर्दाशत नहीं है। मुखर मुस्लिम नेताओं को आगे बढ़ाने और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर स्टैंड लेने में कतराती है, जिससे गठबंधन की राजनीति में भी दोनों के बीच तल्खी बनी रहती है।
समाजवादी पार्टी भी इमरान मसूद से खुश नहीं?
कैराना सांसद इकरा हसन ने अखिलेश यादव को गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत बताया तो इमरान मसूद भड़क गए। उन्होंने राहुल गांधी को विपक्ष की असली आवाज कहा। दोनों 2024 लोकसभा चुनाव में इसी गठबंधन के तहत जीते थे। अब किसका नेता बड़ा वाले दावे पर टकरा रह हैं।
इमरान मसूद:-
पूरे देश में विपक्ष की आवाज सिर्फ राहुल गांधी हैं और इसी से BJP परेशान है। राहुल गांधी ने मेहनत करके अच्छा माहौल बनाया है और उनके बिना कुछ संभव नहीं है।
बड़ा भाई बनने की चाह, कांग्रेस का खेल बिगाड सकती है?
इमरान मसूद ने गठबंधन में कांग्रेस को 'बड़ा भाई' भी बताया है। इकरा हसन कहती हैं कि भारतीय जनता पार्टी को हराने की क्षमता सिर्फ अखिलेश यादव में है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अकेले ज्यादा कुछ नहीं कर पाएगी। समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना रहा है कि गठबंधन का स्वरूप राहुल गांधी और अखिलेश यादव तय करेंगे।
दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व, मजबूत गठबंधन की बात कहता है। अब इमरान मसूद का बात-बात पर सपा पर दबाव बनाने वाली रणनीति, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को ही रास नहीं आती है। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के संदेश अलग-अलग हैं, इसलिए जमीन पर दिक्कत हो सकती है।
सपा-कांग्रेस का गठबंधन, कितनी बड़ी ताकत है?
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने 2024 का लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में साथ लड़ा था। दोनों ने मिलकर 43 सीटें जीतीं। इनमें SP को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं। गठबंधन ने फैजाबाद सीट भी जीती, जिसमें अयोध्या आती है। इस सीट पर 2019 में BJP जीती थी। यह गठबंधन, जमीन पर बीजेपी पर 20 साबित हुआ था। अगर यह खटाई में पड़ता है तो दोनों दलों के लिए नुकसान का सौदा साबित हो सकता है।
