राघव चड्ढा , आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थापना के साल से ही पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। साल 2013 में जब पार्टी की नींव पड़ी तो राघव चड्ढा भी संस्थापक सदस्यों में से एक थे और अरविंद केजरीवाल की कोर टीम का हिस्सा  बने। उन्हें AAP ने कई जिम्मेदारियां दीं। पहले विधायक, फिर राज्यसभा सांसद तक बने लेकिन अचानक उन्होंने अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका दिया।

राघव चड्ढा ने 24 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। खुद तो गए ही लेकिन अपने साथ पार्टी के दो तिहाई सांसद भी लेते गए। उनमें क्रिकेटर हरभजन सिंह का भी नाम शामिल है। अब अरविंद केजरीवाल ने पहली बार, राघव चड्ढा के निकलने पर खुलकर बात की है।

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अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा पर क्या कहा?

यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह ने एक इंटरव्यू में अरविंद केजरीवाल से सवाल किया, 'क्या आपको अंदाजा था कि राघव चड्ढा चले जाएंगे?' 

जवाब में अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'मेरे को पता नहीं था। मेरे को किसी का आइडिया नहीं था।'

दूसरे 7 साथियों पर अरविंद केजरीवाल ने क्या कहा?

अरविंद केजरीवाल ने पार्टी छोड़कर गए सांसंदों पर कुछ भी तल्ख टिप्पणी नहीं की। जो 7 सांसद गए, उनमें से कई अरविंद केजरीवाल के करीबी थे। जिन पर अरविंद केजरीवाल भरोसा जताते थे, उन्हें राज्यसभा भेजा। जब यह सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'क्या कर सकता हूं, चले गए, जहां गए, वे वहां खुश रहें। खुश रहना चाहिए उन्हें। सुकून होता हूं।' 

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AAP के लिए कितने अहम थे राघव चड्ढा?

राघव चड्ढा, आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। साल 2013 से ही वह पार्टी में अहम भूमिका निभा रहे थे। पार्टी प्रवक्ता से लेकर विधायक और सांसद तक की जिम्मेदारी उन्होंने निभाई। अरविंद केजरीवाल उन पर इस हद तक भरोसा जताते थे कि साल 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया, लोग उन्हें 'सुपर सीएम' तक बुलाने लगे।


राघव चड्ढा भी उन चेहरों में से एक थे, जिन्होंने दिल्ली जन लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार किया था। वह पार्टी का घोषणापत्र तैयार करने वाली कोर टीम में रहे और कुछ समय तक कोषाध्यक्ष भी रहे।

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क्यों अचानक AAP छोड़ गए राघव चड्ढा?

AAP के सबसे कम उम्र के प्रवक्ता रहे, उन्हें मीडिया ने खूब कवरेज दी। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में वह राजेंद्र नगर से विधायक बने, साल 2022 तक वह राज्यसभा सांसद बन गए। वह राज्यसभा के सबसे युवा सदसस्यों में से एक थे। उन्हें राज्यसभा में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा का नेतृत्व छीना तो वह पार्टी छोड़कर चले गए।

राघव चड्ढा हाल के दिनों में सिर्फ जनहित के मुद्दे उठाते थे, अरविंद केजरीवाल का उस तरह से बचाव नहीं करते थे, जैसे उनके बाकी सांसद साथी करते थे। अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद ही उनका मोहभंग पार्टी से हो गया था।