भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को विपक्षी दलों पर समाज में विभाजनकारी सोच के साथ काम करने और 'वंदे मातरम' का अपमान करने का जोरदार हमला बोला। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के अपमान को लेकर कहा कि देश की जनता ऐसे लोगों की सोच बदलने का काम करेगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर राष्ट्रगीत, राष्ट्रभक्ति और सम्मान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल कुछ शब्द नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई और देशभक्ति की भावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी या अपमान करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ऐसे विचारों को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने लोगों से राष्ट्रीय प्रतीकों और देश की भावनाओं का सम्मान करने की अपील भी की।
'वंदे मातरम' और इतिहास का कड़ा संदेश
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का जिक्र करते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, 'वंदे मातरम, जिसने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की नींव रखी और जो हमारे शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों के लिए देशभक्ति का गीत बन गया, उसका आज भी इस देश में कुछ लोगों द्वारा अपमान किया जा रहा है लेकिन मैं उनसे कहना चाहता हूं कि इस देश की मिट्टी में ऐसी ताकत है कि अगर लोदी और सिकंदर जैसे लोगों की सोच बदल सकती है, तो आने वाले समय में भारत की मिट्टी की ताकत उन लोगों की सोच भी बदल देगी जिन्होंने वंदे मातरम का अपमान किया है।'
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पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर हमला
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर सीधा निशाना साधते हुए नितिन नवीन ने कहा कि अतीत में देश के संसाधनों धार्मिक और सामाजिक आधार पर बांटने की कोशिशें की गई है। उन्होंने कहा, 'लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार इस देश के गरीब का है जिनकी दुआओं से यह सरकार सत्ता में आई है। सरकार की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, जिसमें जाति, समुदाय या पहचान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता।प्रधानमंत्री कहते हैं कि विकास योजनाएं समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। जब उन्होंने लोकतंत्र के संसद में सिर झुकाकर प्रवेश किया तो अपने पहले ही भाषण में कहा कि उनकी सरकार गरीबों के लिए होगी और गरीबों को समर्पित होगी।'
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नितिन नवीन ने बताया कि बीजेपी ने संत रविदास जी के सामाजिक समरसता के विचारों को आधार बनाकर 'समरसता संकल्प अभियान' की शुरुआत की है। उन्होंने कहा, 'ऐसे में जब हमारा समाज गहरी सामाजिक असमानताओं और कई सामाजिक बुराईयों से घिरा हुआ था। तब संत रविदास के विचारों और प्रयासों ने इन कुरीतियों पर करारा प्रहार किया और देश भर में सामाजिक समरसता की नींव रखी। विदेशी आक्रमणों और बड़े पैमाने पर हो रहे धर्म परिवर्तन के दौर में रविदास के विचारों और उनके संघर्ष ने भारतीय समाज और सनातन परंपराओं की रक्षा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।'
