लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी अगले सप्ताह दो बड़े कार्यक्रमों के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट वोट बैंक और प्रदेश के युवा वर्ग को साधने की रणनीति पर उतरेंगे। 5 अगस्त को बागपत में पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के श्रद्धांजलि समारोह में शामिल होकर वह जाट नेताओं और किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे, जबकि 8 अगस्त को प्रयागराज में करीब डेढ़ लाख छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। कांग्रेस इसे संगठन विस्तार का अभियान बता रही है लेकिन राजनीतिक जानकार इसे 2027 के चुनाव से पहले नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

 

राहुल गांधी का पहला कार्यक्रम बागपत में होगा। यहां वह जाट नेताओं और किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बागपत, बड़ौत, छपरौली, शामली, कैराना, खतौली, मीरापुर, सरधना, सिवालखास, हस्तिनापुर और मेरठ ग्रामीण जैसी कई विधानसभा सीटों पर जाट मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कभी इन क्षेत्रों में कांग्रेस का मजबूत जनाधार था, लेकिन समय के साथ यह आधार दूसरे दलों की ओर खिसक गया। अब पार्टी इस वर्ग में दोबारा अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

 

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प्रयागराज में युवाओं से संवाद, इन मुद्दों पर रहेगा फोकस

बागपत दौरे के तीन दिन बाद राहुल गांधी 8 अगस्त को प्रयागराज पहुंचेंगे, जहां करीब डेढ़ लाख छात्रों और युवाओं के शामिल होने की संभावना है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय इसकी तैयारियों में जुटे हैं और प्रयागराज समेत आसपास के करीब 20 जिलों से छात्रों को कार्यक्रम में लाने की योजना बनाई गई है।

सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी युवाओं से संवाद के दौरान बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, सरकारी भर्तियों में देरी, रिक्त पदों पर नियुक्तियां, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार के अवसर, संविदा भर्ती, निजीकरण, युवाओं के पलायन और संविधान व सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। कांग्रेस की कोशिश इन मुद्दों के जरिए युवाओं के बीच सीधा राजनीतिक संवाद स्थापित करने की है।

युवाओं पर फोकस क्यों?

 

कांग्रेस का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा मतदाता वर्ग युवा है। पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, रोजगार की कमी और प्रतियोगी छात्रों के आंदोलनों ने इन मुद्दों को राजनीतिक रूप से अहम बना दिया है। पार्टी का आकलन है कि यदि युवाओं के बीच भरोसा बनाया गया तो 2027 के चुनाव में इसका सीधा राजनीतिक लाभ मिल सकता है। राहुल गांधी भी हाल के वर्षों में युवाओं और छात्रों से लगातार संवाद की राजनीति को प्राथमिकता देते रहे हैं।

कांग्रेस के सामने चुनौती आसान नहीं है। भाजपा सरकारी योजनाओं, लाभार्थी वर्ग और संगठनात्मक नेटवर्क के सहारे मजबूत स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी भी युवाओं, प्रतियोगी छात्रों और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति के जरिए अपना आधार मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में कांग्रेस को केवल बड़े कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि लगातार जमीनी सक्रियता और संगठन विस्तार से अपनी जगह बनानी होगी।

 

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क्या बदलेगा सियासी समीकरण?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस जाट समाज और युवाओं के बीच लगातार संपर्क बनाए रखती है और इन मुद्दों पर आंदोलन व संगठन दोनों को मजबूत करती है, तो उसे राजनीतिक लाभ मिल सकता है। फिलहाल राहुल गांधी के बागपत और प्रयागराज के प्रस्तावित दौरे को कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने नए राजनीतिक अभियान की शुरुआत के रूप में देख रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह रणनीति 2027 की चुनावी बिसात पर कांग्रेस को कितनी मजबूती दिला पाती है।