उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (एनडीए) में सीटों की लड़ाई खुलकर सामने आने लगी है। करीब तीन महीने तक संगठन को मजबूत करने में जुटे राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के मुखिया और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अब बीजेपी के सामने 36 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश कर दी है। इससे पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, निषाद पार्टी और अपना दल (एस) भी पिछली बार से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। ऐसे में बीजेपी के सामने सहयोगियों की महत्वाकांक्षाओं और अपने संगठन के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
लोकसभा चुनाव के बाद जयंत चौधरी ने RLD को सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित रखने के बजाय पूरे प्रदेश में विस्तार की रणनीति अपनाई। पार्टी ने हाल ही में अनुपम मिश्रा को कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसके साथ ही संगठन में केवल जाट नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय पिछड़ा, दलित, ब्राह्मण और अन्य सामाजिक वर्गों के नेताओं को भी जिम्मेदारियां देकर नए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की गई है। RLD की परंपरागत ताकत बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बिजनौर, हापुड़, बुलंदशहर और आसपास के जाट बहुल क्षेत्रों में रही है लेकिन इस बार पार्टी की रणनीति पश्चिम तक सीमित नहीं है। संगठन विस्तार के जरिए मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक आधार तैयार करने की कवायद तेज कर दी गई है।
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सहयोगियों की बढ़ती मांग से बीजेपी पर दबाव
एनडीए के सभी प्रमुख सहयोगी विधानसभा चुनाव में पिछली बार से बड़ी हिस्सेदारी चाहते हैं। ऐसे में बीजेपी के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की टिकट की उम्मीदें हैं, दूसरी ओर सहयोगी दल ज्यादा सीटें मांग रहे हैं। यदि सहयोगियों की मांगें मान ली जाती हैं तो बीजेपी के कई दावेदारों की सीटें प्रभावित हो सकती हैं, जबकि कम हिस्सेदारी मिलने पर सहयोगी दलों की नाराजगी बढ़ सकती है।
RLD – पश्चिमी यूपी के जाट बहुल इलाकों में मजबूत आधार, अब पूरे प्रदेश में विस्तार की रणनीति।
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी – राजभर बहुल पूर्वांचल में प्रभाव।
निषाद पार्टी – निषाद, केवट, बिंद, मछुआरा और कश्यप समाज के बीच मजबूत पकड़।
अपना दल (एस) – कुर्मी मतदाताओं वाले इलाकों, खासकर विंध्य और मध्य यूपी में प्रभाव।
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2022 के नतीजे भी बढ़ा रहे दावेदारी
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने बहुमत हासिल किया था। वर्तमान विधानसभा में बीजेपी के साथ अपना दल (एस) के 13 विधायक, RLD के 9 विधायक, निषाद पार्टी के 5 विधायक और सुभासपा के 6 विधायक हैं। यही वजह है कि सभी सहयोगी दल अब अपने बढ़े हुए राजनीतिक प्रभाव का हवाला देकर अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं।
चुनाव में अभी समय है, लेकिन सीटों की खींचतान अभी से तेज हो चुकी है। बीजेपी के लिए सबसे कठिन फैसला यही होगा कि सहयोगियों को संतुष्ट रखते हुए अपने संगठन की नाराजगी भी न बढ़ने दे। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में सीट बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत होगी और उसी के बाद एनडीए का अंतिम चुनावी फार्मूला तय होगा।
